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तैनू काला चश्मा जैसे गानों की लाइन लग जाएगी, पंजाब पुलिस ने वो फैसला लिया है

एक कॉन्सटेबल ने ये गाना तब लिख दिया था जब वो स्कूल में था.

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काला चश्मा गाने पर झूमे तो खूब हैं मगर इसे लिखा किसने, ये जानते हैं क्या?
तेनु काला चश्मा जचदा ऐ जचदा ऐ गोरे मुखड़े ते...
पक्का इस गाने के फैन होंगे आप. पिछले साल कट्रीना कैफ के इस गाने पर डांस ने आपको खूब थिरकाया भी होगा. पर क्या ये पता है कि इस गाने को लिखा किसने है? हां सोचो, सोचो... घुइयां पता है. हम बताए दे रहे हैं.
गाने को लिखा है पंजाब पुलिस के हेड कॉन्सटेबल अमरीक सिंह शेरा ने. ज़रूरी नहीं कि हर पुलिस वाला खाली डंडा चलाए. कुछ की कलम भी चलती है. और अमरीक की तो ऐसी चली कि आप झूम उठे. अमरीक ने ये गाना 1990 में ही लिख डाला था. वो तब 16 साल के थे और बारहवीं में पढ़ते थे. अब अमरीक 43 साल के हैं और फिलहाल कपूरथला में पोस्टेड हैं. उनके काला चश्मा गाने को पहली बार पंजाबी सिंगर अमर अरशी ने इंग्लैंड में एक परफॉर्मेंस के दौरान गाया था. गाना जबरदस्त हिट हुआ था.
1990 में ही अमरीक ने लिख डाला था काला चश्मा.
1990 में ही अमरीक ने लिख डाला था काला चश्मा.

गाने के हिट होने के बाद उन्हें कई ऑफर मिले, मगर उनकी नौकरी उनके पैशन के आगे आती रही. वो गाने नहीं लिख पा रहे थे. मगर अब ऐसा नहीं होगा. आप तो अमरीक के गाने पर खूब झूम लिए, मगर अमरीक के लिए झूमने वाली बात अब हुई है. द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब के डीजीपी ने उन्हें अपने पैशन के लिए पूरा समय लेने की छूट दे दी है. वो अब अपने इस काम के लिए आसानी से छुट्टी ले सकेंगे. उन पर कोई रोक-टोक नहीं होगी. अमरीक इस बात को लेकर बेहद खुश हैं. खुशी की बात हम लोगों के लिए भी है कि अमरीक अब और गाने लिख सकेंगे और हम लोगों को एंटरटेन करेंगे.

गाना बनने की कहानी भी दिलचस्प है
1990 की बात है. अमरीक अपने कुछ दोस्तों के साथ चंडीगढ़ गए थे. वहां उन्होंने एक खूबूसरत लड़की को देखा, जिसने आंखों पर काला चश्मा लगाया हुआ था और चंडीगढ़ का एक पुलिस आरक्षक उसे बहुत गौर से देख रहा था. शेरा की आंखों में ये तस्वीर जैसे छप गई. उन्होंने इस पल को मन में कैद कर लिया और दौड़ा दिया पेन. गाना निकला... तैनू काला चश्मा...
गाने का पुराना वर्जन भी सुन लीजिए-

गाने के लिए मिले सिर्फ 11 हजार रुपए
अमरीक जालंधर के एक गांव तलवंडी चोधरियां के रहने वाले हैं. अपने गानों में वो अपने गांव का नाम ज़रूर डाल देते हैं. काला चश्मा में भी गांव का जिक्र है. वो कहते हैं आगे भी वो अपने गांव का जिक्र अपने गानों में करते रहेंगे. अपने गाने के हिट होने पर अमरीक खुश तो बहुत रहते हैं. मगर उन्हें इसके लिए वो मान-सम्मान और पैसा नहीं मिला जिसके वो हकदार थे. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमरीक सिंह से इस गाने को फिल्म में चलाए जाने की बात छिपाई गई. उन्हें बताया गया था कि गाना एक सीमेंट फैक्ट्री के इवेंट में गाया जाएगा. इसके लिए उनसे केवल 11000 रुपए का एग्रीमेंट साइन करवा लिया गया था. फिल्म में अपना गाना धोखे से लिए जाने को लेकर उन्हें अफसोस है, लेकिन गाने के सफलता से वह खुश भी हैं.
काला चश्मा गाने से अमरीक फेमस तो हुए मगर उनके साथ धोखा भी हुआ.
काला चश्मा गाने से अमरीक फेमस तो हुए मगर उनके साथ धोखा भी हुआ.

अमर अर्शी तक गाना पहुंचने की कहानी ऐसी है कि अमरीक कई नामचीन कलाकारों के पास ये गाना लेकर गए, मगर किसी ने तवज्जो नहीं दी. अंत में अमर अर्शी ने इस गाने को स्टेज पर गाया. बाद में यह गाना इंग्लैंड में वीआईपी कंपनी ने रिकॉर्ड किया और 1994 में भारत में केट्रेक कम्पनी ने इसे फिर रिकॉर्ड किया. इसके बाद शेरा ने कई हिट गाने लिखे, लेकिन सही पैसा नहीं मिलने पर उन्होंने गाने लिखना बंद कर दिया. मगर अब अमरीक फिर तैयार हैं. गाने लिखने के लिए. आपको एंटरटेन करने के लिए.


देखिए लल्लनटॉप वीडियो- 

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