जोशीमठ (Joshimath) में होटेल मल्लारी-इन के सामने बैठकर लोग धरना दे रहे हैं. होटेल मल्लारी-इन और माउंट व्यू, प्रशासन के मुआयने के हिसाब से 'असुरक्षित' हैं. दरक रहे हैं. इसलिए दोनों होटलों को बंद कर के सील कर दिया गया है. मल्लारी-इन के मालिक का कहना है कि उन्हें होटल ढहाने का कोई विरोध नहीं है, लेकिन पहले प्रशासन उनका मुआवज़ा तय कर दे. इंडिया टुडे के अमित भारद्वाज से बात करते हुए एक प्रदर्शनकारी ने कहा,
"बिना मुआवजा तोड़ देंगे घर, बत्ती काट दी"- जोशीमठ में प्रदर्शन कर रहे लोगों ने और क्या बताया?
कई लोगों के पास घर के कागज नहीं हैं.


"प्रशासन पहले हमसे बात करता है कि हम आपके घर-ज़मीन तब तक नहीं तोड़ेंगे, जब तक आपके पूरे मुआवजे की बात न हो जाए. और, बात करने के बाद आज आप देखें प्रशासन ने पूरी फ़ोर्स भेज दी है. सारे घरों की लाइट काट दी है. पूरे जोशीमठ में लाइट नहीं आ रही है. रात के अंधेरे में उनका प्लान है कि इमारतें तोड़ दें. ये सरकार और प्रशासन की गुंडागर्दी है. पहले हमें मुआवजा दीजिए. बद्रीनाथ की तरह ही हमारा पुनर्वास करिए. उसके बाद आप तोड़िए; कोई बात नहीं."
प्रदर्शनकारियों ने स्थानीय मीडिया को बताया कि उन्हें डर है कि अगर तोड़फोड़ की प्रक्रिया शुरू हो गई, तो प्रशासन उनके मुआवजे को टाल देगा. वो लोग भी प्रदर्शन में शामिल हैं, जिनके घर बहुत पुराने हैं, जिनके क़ाग़ज़ात नहीं हैं.

जोशीमठ नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष शैलेन्द्र पंवार का कहना है कि यहां लोगों की 100-100 साल पुरानी ज़मीनें हैं. और, जब यहां घर बने तब नक्शे की ज़रूरत नहीं पड़ती थी. कहा,
अभी तक की चार ज़रूरी बातें -"यहां प्राधिकरण भी बनाया गया, लेकिन मास्टर-प्लान आजतक नहीं बना. नगर पालिका परिषद शुरू से मांग कर रहा है कि यहां लोगों के घरों के नक्शों का ब्योरा परिषद के पास हो."
हमारे साथी रणवीर ग्राउंड पर हैं. पूरे मुद्दे को लगातार कवर कर रहे हैं. हमने उनसे हालिया स्थिति जाननी चहिए. उन्होंने बताया-
- चमोली की ज़िलाधिकारी हिमांशी खुराना का ये कहना है कि सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीच्यूट (CBRI) की एक टीम आएगी. साथ में लोकल प्रशासन के कुछ अफ़सर जाएंगे और ये लोग जोशीमठ की उन इमारतों का मुआयना करेंगे, जिन इमारतों को नुक़सान हुआ है. उनमें से कौन-कौन सी गिराई जानी हैं, उनका पहले टेस्ट किया जाएगा. उसके बाद उनको गिराने के तरीक़ों पर विचार-विमर्श होगा और फिर गिराने के निर्देश दिए जाएंगे. यानी कि आज, 10 दिसंबर को गिराने की कोई बात नहीं थी.
- आज, 10 जनवरी को बड़ी संख्या में लोगों का जोशीमठ से पलायन हुआ है. अभी तक क़रीब 725 मकानों पर लाल निशान लगाया गया है, जिसका मतलब है कि वो घर रहने के लिए सुरक्षित नहीं हैं. इसमें दो चीज़ें हैं. जिन लोगों के मकान ख़ाली कराए गए, उन्हें किसी पास के स्कूल या होटेल में भेजा गया था. जो अस्थायी व्यवस्था है, उसमें हर परिवार को एक कमरा दिया गया है. जहां समान रखना तो मुमकिन नहीं है. तो लोगों ने कुछ समान छोड़ दिए. कुछ को छोटी गाड़ियों से अपने किसी रिश्तेदार के यहां पहुंचा दिया.
- स्थानीय निवासियों का आरोप है कि 2 जनवरी को उन्होंने धमाके की आवाज़ सुनी थी. और, कहा कि NTPC ने ये धमाका किया. NTPC ने अपने शुरूआती बयान में कहा था कि उनकी सुरंग जोशीमठ के नीचे नहीं है. लेकिन लोगों के आरोप पर उन्होंने आगे और कुछ नहीं कहा. हमारे साथी रणवीर ने NTPC से बात करने की कोशिश की है कि उनका पक्ष भी सामने आ जाए. लेकिन पिछले तीन दिनों से NTPC कोई बयान नहीं दे रहा.
- टिहरी और कर्णप्रयाग. इन दोनों जगहों में भी दरारें दिख रही हैं. वैसे सामान्यतः पहाड़ी इलाक़ों में बारिश के बाद या छोटे भूकंप के बाद भी दरारें आ जाती हैं. लेकिन लोगों के आरोप के मुताबिक़, 2 जनवरी के धमाके के बाद ये दरारें बढ़ गई हैं.
वीडियो: जोशीमठ छोड़कर जा रहे लोग हुए भावुक, अपने घरों को देखकर नहीं रुक रहे आंसू






















