अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप फिलहाल ईरान से जंग लड़ने के मूड में नहीं हैं. लेकिन सिर्फ तब तक ही, जब तक किसी अमेरिकी सैनिक की मौत नहीं होती. अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जरनल की रिपोर्ट में दावा किया गया कि ट्रंप ने खुद अपने करीबियों से ये बात कही है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि हफ्तों या फिर महीनों तक भी छोटे-मोटे हमले झेलने को तैयार हैं, बशर्ते अमेरिकी सैनिक सुरक्षित रहें. रिपोर्ट की मानें तो ट्रंप ने अपनी तरफ से लाल रेखा (trump draws red line) खींच दी है.
अमेरिकी अखबार की रिपोर्ट में दावा, ईरान पर और हमले नहीं करेंगे ट्रंप, लेकिन रखी है एक शर्त!
US-Iran peace deal: प्रेसिडेंट डॉनल्ड ट्रंप ने अपने करीबियों से कहा है कि वे ईरान पर तब तक हमला नहीं करेंगे जब तक अमेरिकी सैनिक सुरक्षित हैं. वे हफ़्तों और महीनों तक भी छोटे-मोटे हमले झेलने को तैयार हैं, बशर्ते उनके रिसोर्स को कोई नुकसान न पहुंचे.


इस बात के संकेत तब भी मिले, जब 3 जून को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने ईरान पर अमेरिका के हालिया हमलों को महज जवाबी कार्रवाई बताया. साथ ही, उन्होंने कहा कि अगर ईरान जहाजों पर हमला नहीं करता, तो अमेरिका भी नहीं करेगा. यानी ट्रंप प्रशासन फिलहाल ईरान के साथ जंग बढ़ाने के पक्ष में नहीं है. कोशिश एक डील पर पहुंचने की हो रही है, जो पॉजिटिव संकेत है. लेकिन अगर दोनों देशों के बीच हमले जारी रहते हैं तो ट्रंप कब तक संयम बना कर रखेंगे, सवाल ये भी है.
ट्रंप का संयम कब तक रहेगा?रिपोर्ट के मुताबिक, लगातार हो रहे हमले ट्रंप पर दबाव बढ़ा रहे हैं. यानी जंग का खतरा पूरी तरह टला नहीं है. इस बीच ट्रंप लगातार यही दावा कर रहे हैं कि ईरान के साथ डील बेहद करीब है. अमेरिकी प्रेसिडेंट का दावा है कि इस डील से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पूरी तरह खुल जाएगा. ईरान अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम खत्म कर देगा और उसके एनरिच्ड यूरेनियम को भी नष्ट कर दिया जाएगा. ट्रंप ने ये भी कहा कि उन्हें समझौते की कोई जल्दी नहीं है.
ट्रंप प्रशासन ने ईरान जंग शुरू करते समय ही कहा था कि युद्ध लंबा नहीं चलेगा. इसमें 4 से 6 हफ्तों का समय लग सकता है. अमेरिका को उम्मीद थी कि वो अपने मिलिट्री टार्गेट जल्द ही अचीव कर लेगा. लेकिन तकरीबन 40 दिन तक चली जंग के बाद भी कोई नतीजा निकलता नहीं दिखा. उल्टा ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज ब्लॉक कर दिया जिसकी वजह से पूरी दुनिया के लिए एनर्जी संकट खड़ा हो गया.
ऐसे में अमेरिका पर भी जंग जल्दी ख़त्म करने का दबाव बढ़ा. ट्रंप घरेलू राजनीति में भी इस मुद्दे पर घिरते दिखे. उनके MAGA यानी ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ के समर्थकों ने जंग शुरू करने पर सवाल उठाया. ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के ही कई नेता उनके विरोध में आ गए. यहां तक कि ट्रंप प्रशासन के भीतर से ही जंग के खिलाफ आवाजें उठीं. ऐसे में चौतरफा घिरे ट्रंप ने जंग रोककर बातचीत का रास्ता चुनना सही समझा, जो कि पूरी दुनिया के लिए एक सही फैसला है.
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इन सबके बीच पश्चिमी एशिया में ईरान के हमले जारी हैं. दो दिन पहले ही ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिका बेस को निशाना बनाया. कुवैत के एयरपोर्ट पर मिसाइल और ड्रोन दागे. लेकिन इन हमलों के बावजूद अमेरिका काफी हद तक शांत दिखा. केवल छुटपुट हमलों से ही जवाब दे रहा है. हर बात पर बेवजह दंभ भरने वाले डॉनल्ड ट्रंप चुप हैं. उल्टा नेतन्याहू को फोन लगाकर हड़का रहे हैं. लेकिन ईरान पर ज्यादा कुछ नहीं बोल रहे हैं. ऐसे में उम्मीद है कि बातचीत जल्द किसी नतीजे पर पहुंच सकती है और दुनिया इस संकट से बाहर निकल सकती है.
वीडियो: ट्रंप-नेतन्याहू फ़ोन कॉल की एक-एक बात पता चली




















