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JNU में छात्रों पर हुए हमले को डिप्टी वीसी ने सर्जिकल स्ट्राइक बताया

2016 में भारतीय सेना ने PoK में आतंकी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक किया था.

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चिंतामणि महापात्रा (फोटो: ANI)
जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU). यहां 5 जनवरी को हिंसा हुई. नकाबपोशों ने छात्रों और टीचर्स पर हमला किया. 34 स्टूडेंट घायल हुए. अब यूनिवर्सिटी के रेक्टर (डिप्टी वीसी) चिंतामणि महापात्रा ने इस हिंसा को सर्जिकल स्ट्राइक बताया है. उन्होंने कहा कि हमला करने वाले सभी नकाबपोश बाहर से आए थे. मुझे भी कुछ वक्त के लिए डर लगा. शिक्षक और अधिकारी भी चिंतित हैं. इसके अलावा महापात्र ने कहा-
हमारा लक्ष्य स्थिरता लाने और सेमेस्टर रजिस्ट्रेशन प्रोसेस को शुरू करना है. रजिस्ट्रेशन का विरोध कानून के दायरे में और छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए होना चाहिए. हम छात्रों से अपनी हड़ताल वापस लेने की अपील करते हैं.
हुआ क्या था? 5 जनवरी की शाम JNU में हिंसा हुई. कैंपस के अंदर घुस आए नकाबपोशों ने हाथों में सरिया, हॉकी स्टिक, डंडे और हथौड़े लेकर छात्रों और शिक्षकों पर हमला किया. करीब तीन घंटे तक ये हिंसा चली. हमलावरों ने हॉस्टलों के अंदर घुसकर स्टू़डेंट्स को मारा. कई स्टूडेंट्स लहुलूहान हो गए. कइयों के सिर फूटे. 34 चोटिल लोग हॉस्पिटल में भर्ती हुए थे, जिन्हें 6 जनवरी को डिस्चार्ज किया गया. इसके बाद JNU छात्रसंघ ने बयान जारी किया, हिंसा के लिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) को जिम्मेदार ठहराया. उधर ABVP इन इल्ज़ामों को साफ तौर पर खारिज कर रही है. उसका कहना है कि ये हमला लेफ्ट संगठनों ने किया था. दिल्ली पुलिस की जॉइंट कमिश्नर शालिनी सिंह ने बताया,
हमने सभी स्पॉट का दौरा किया है और जेएनयू में छात्रों के साथ बातचीत की है. जांच अपने प्रारंभिक चरण में है. छात्रों ने हमें कुछ जानकारी दी है.
JNU हिंसा मामले में अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है.
वीडियो-JNU हिंसा: ABVP के लड़कों ने पूछा, योगेंद्र यादव यहां क्यों आए?

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