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नाबालिग संग रेप के आरोपी को पंचायत ने जुर्माना वसूलकर छोड़ा, पीड़िता ने खुदकुशी कर ली

Minor raped in Sahibganj, Jharkhand: आत्महत्या के बाद पीड़िता की मां की शिकायत के आधार पर मामला राधा नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया है. शिकायत के मुताबिक, आरोपी ने पीड़िता और उसकी मां के साथ मारपीट भी की थी.

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फरार आरोपियों की तलाश में जुटी पुलिस (फोटो- आजतक)
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सत्यजीत कुमार

झारखंड के साहिबगंज जिले में नाबालिग लड़की के साथ कथित रेप मामले में पंचायत के एक फैसले को लेकर विवाद हो रहा है (Jharkhand Minor Rape Case). आरोप है कि पंचायत ने रेप आरोपी से पीड़िता को अपराध के मुआवजे के तौर पर करीब 1.35 लाख रुपये का जुर्माना देने को कहा. इस फैसले के कुछ घंटों बाद 15 साल की पीड़िता ने अपनी जान ले ली.

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आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, घटना जिले के राधा नगर थाना क्षेत्र की है. 15 अगस्त को पड़ोस में रहने वाले शाहिद अनवर ने कथित तौर पर नाबालिग के साथ रेप किया और उसे जान से मारने की धमकी दी. शिकायत के मुताबिक, अगले दिन आरोपी और उसके परिवार ने पीड़ित परिवार को पुलिस के पास ना जाने की धमकी दी. इसके बाद 18 अगस्त की शाम को मामले को लेकर पंचायत हुई.

खबर है कि आरोपी ने पंचायत के सामने अपना अपराध कबूल कर लिया. इसके बाद पंचायत ने कथित तौर पर आरोपी से मुआवजे के तौर पर 1 लाख 35 हजार रुपये जुर्माना देने को कहा. खबरों के मुताबिक पीड़िता के परिवार ने ये पैसे लेने से मना कर दिया. उसी रात पीड़िता ने अपनी जान ले ली.

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रेप पीड़िता की मौत के बाद उसकी मां की शिकायत के आधार पर मामला राधा नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया है. आरोप है कि 16 अगस्त को आरोपी ने धमकी देते हुए उनके घर में घुसकर पीड़िता और उसकी मां के साथ मारपीट भी की थी. आरोपी और उसका परिवार फिलहाल फरार है. पुलिस उनकी तलाश में जुट गई है.

BJP ने राज्य सरकार को घेरा!

BJP राज्य अध्यक्ष बाबू लाल मरांडी ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई ना करने के लिए राज्य सरकार की आलोचना की. उन्होंने पोस्ट में लिखा,

संथाल परगना की एक और बेटी दुष्कर्म की भेंट चढ़ गई. शाहिद अनवर नाम के दरिंदे ने साहिबगंज की 15 साल की नाबालिग युवती से दुष्कर्म किया, जिससे आहत होकर पीड़िता ने अपनी जान दे दी. दरिंदे गरीब आदिवासी लड़कियों को हवस का शिकार बना रहे हैं. बेटियों को कभी पेट्रोल डालकर जिंदा जलाया जा रहा है, तो कभी टुकड़ों में काटकर फेंक दिया जा रहा है. पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की बजाय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झारखंड मुस्लिम मोर्चा की सरकार दरिंदों को बचाने के लिए हमेशा आगे आई है. मुसलमानों का वोटबैंक खिसकने के डर से हेमंत सोरेन ने कभी भी खुलकर इन शर्मनाक घटनाओं की निंदा तक नहीं की. आरोपियों पर कठोर कारवाई करना तो दूर की बात है.

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उन्होंने सवाल उठाया,

आरोपी का पूरा परिवार बिना पुलिस प्रशासन के मिलीभगत और सरकार के संरक्षण के फरार नहीं हो सकता. आदिवासी समाज को समझना होगा कि मुसलमानों की गोद में बैठकर राजनीति करने वाले हेमंत कभी भी आदिवासी बेटियों को न्याय नहीं दिला सकते.

मरांडी ने आगे लिखा कि  आदिवासी समाज को अपनी बेटियों की इज्जत बचाने के लिए खुद आगे आना होगा.

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