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हमास नहीं इजरायल की सुप्रीम कोर्ट ने दिया बेंजामिन नेतन्याहू को जोर का झटका, रद्द कर दिया ये 'विवादित कानून'

इजरायल की सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला ऐसे वक्त पर आया है, जब हमास के साथ जंग लड़ रही IDF ने गाजा पट्टी से कुछ सैनिकों को हटाने का फैसला किया है. अदालत के आदेश के बाद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को विपक्ष की आलोचना का सामना करना पड़ रहा है.

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इजरायल की सुप्रीम कोर्ट के फैसले से मुश्किल में बेंजामिन नेतन्याहू (फोटो- रॉयटर्स)

इजरायल की सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of Israel) ने उस विवादास्पद न्यायिक सुधार को रद्द कर दिया है जिसके कारण पिछले साल बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) सरकार के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे. इस बदलाव से असंवैधानिक समझे जाने वाले कानूनों को पलटने में सुप्रीम कोर्ट की शक्ति सीमित हो जाती थीं. कानून के आलोचकों का कहना है कि इसके चलते देश की न्यायिक प्रणाली कमजोर हो रही थी और लोकतंत्र को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया था. टाइम्स ऑफ इजरायल (Times of Israel) के अनुसार इजरायल के इतिहास में सबसे ज्यादा दक्षिणपंथी मानी जाने वाली मौजूदा नेतन्याहू सरकार का कड़ा विरोध हो रहा है. 2023 में सरकार द्वारा पारित कानून को पलटने का सुप्रीम कोर्ट का फैसला महीनों की आंतरिक उथल-पुथल के बाद आया है.

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पिछले साल जुलाई में, इजरायल की सरकार ने ये विवादास्पद कानून पारित किया था, जिसे अब "तर्कसंगतता" विधेयक के रूप में जाना जाता है. इसने इज़रायल में "बेहद अनुचित" समझे जाने वाले सरकारी फैसलों को रद्द करने की सर्वोच्च न्यायालय और निचली अदालतों की शक्ति को हटा दिया था. इस कानून ने आम जनता के बीच भारी गुस्से को जन्म दिया. सिर्फ इतना ही नहीं इस कानून के चलते इजरायली समाज दो हिस्सों में बंट गया था. जिसके कारण सैकड़ों-हजारों प्रदर्शनकारी सुधारों को रद्द करने और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के इस्तीफे की मांग करते हुए सड़कों पर उतर आए. विरोध करने वालों का दावा था कि साप्ताहिक विरोध प्रदर्शन इज़रायल के इतिहास में सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन था. उस समय, वायु सेना के पायलटों सहित सैकड़ों सैन्य रिजर्विस्टों ने सेवा के लिए रिपोर्ट करने से इनकार करने की धमकी दी थी. जिसके कारण चेतावनी दी गई कि इससे इजरायल की सैन्य क्षमताएं ख़राब हो सकती हैं.

इस मामले पर सुनवाई करते हुए इजरायल की सुप्रीम कोर्ट के एक बयान में कहा गया है कि 15 में से 8 न्यायाधीशों ने कानून के खिलाफ फैसला सुनाया, और कहा कि इससे "एक लोकतांत्रिक राज्य के रूप में इजरायल राज्य की बुनियादी विशेषताओं को गंभीर और अभूतपूर्व नुकसान होगा". इजरायल के न्याय मंत्री यारिव लेविन (Yariv Levin) ने "सभी शक्तियों को अपने हाथों में लेने" के लिए न्यायाधीशों की आलोचना की और इसे खत्म करने के उनके फैसले को अलोकतांत्रिक बताया. लेकिन विपक्षी नेता यायर लैपिड (Yair Lapid) ने फैसले का स्वागत करते हुए एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर कहा कि देश की शीर्ष अदालत ने "इजरायल के नागरिकों की सुरक्षा में अपनी भूमिका ईमानदारी से निभाई है".

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बीबीसी वर्ल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, इस कानून के खिलाफ पिछले साल बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों ने अदालत के फैसले का स्वागत किया. विरोध प्रदर्शनों की अगुवाई करने वाले शिकमा ब्रेसलर (Shikma Bressler) ने एक वीडियो बयान में कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल "हमारी गर्दन से तानाशाही की तलवार" हटा दी है."तर्कसंगतता" कानून नेतन्याहू सरकार द्वारा शुरू किए गए न्यायिक सुधारों की एक व्यापक श्रृंखला का हिस्सा था. इनसे कानूनों की समीक्षा करने या उन्हें खारिज करने की सुप्रीम कोर्ट की शक्ति कमजोर हो जाती, जिससे नेसेट (इजरायली संसद) में एक का साधारण बहुमत ऐसे फैसलों को खारिज करने में सक्षम हो जाता. इस कानून के लिए कहा जाता था कि इजरायल की सरकार ने न्यायाधीशों की नियुक्ति में अधिक शक्ति हासिल करने और मंत्रियों के लिए अपने कानूनी सलाहकारों की सलाह मानने की आवश्यकता को खत्म करने का भी प्रयास किया है.
 

 

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वीडियो: इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का आगे क्या होने वाला है?

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