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इजरायल चुनाव हार जाएंगे नेतन्याहू? एग्जिट पोल ने दिया झटका

इजरायल चुनाव के एग्जिट पोल में बेंजामिन नेतन्याहू और गादी आइजेनकोट के गठबंधनों के बीच कड़ा मुकाबला दिख रहा है. बहुमत के लिए 61 सीटें जरूरी हैं. दोनों नेताओं ने जीत का दावा किया है. वोटिंग 77.7 फीसदी रही.

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एग्जिट पोल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को झटका.

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  • इजरायल के चुनावों में जारी एग्जिट पोल के अनुसार प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और विपक्षी गादी आइजेनकोट के गठबंधनों के बीच सीटों की संख्या लगभग बराबर है, स्थिति अभी साफ नहीं है।
  • चुनावों की पृष्ठभूमि में 7 अक्टूबर को हुए हमलों के बाद यह पहला आम चुनाव है, जिसमें आतंकवाद और सुरक्षा मुद्दे प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
  • अगले कदम में, दोनों नेताओं ने बहुमत पाने का दावा किया है, लेकिन सरकार बनाने के लिए आवश्यक 61 सीटों के साथ गठबंधन बनाना चुनौतीपूर्ण होगा और नई सरकार के शपथ लेने तक नेतन्याहू कार्यवाहक प्रधानमंत्री रहेंगे।

इजरायल के चुनाव को लेकर जारी एग्जिट पोल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को झटका जरूर लगा है, लेकिन तस्वीर साफ नहीं है. शुरुआती नंबर्स में विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट आगे चल रहे थे, लेकिन नए अपडेट में फासला लगभग खत्म हो गया. शुरुआती एग्जिट पोल में इजरायल के तीनों बड़े टीवी चैनलों ने गादी आइजेनकोट के गठबंधन को 52 सीटें और नेतन्याहू के गठबंधन को 50 सीटें मिलने का अनुमान जताया था. लेकिन बाद में तस्वीर बदल गई. टाइम्स ऑफ इजरायल ने चैनल 12 के हवाले से बताया कि नेतन्याहू का गठबंधन 52 सीटों पर पहुंच गया, जबकि आइजेनकोट के गठबंधन की सीटें घटकर 49 रह गईं.

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चैनल 13 और चैनल 11 ने दोनों ही गठबंधन को 51-51 सीटें दी हैं.  i24NEWS के एग्जिट पोल में नेतन्याहू का गठबंधन 55 और आइजेनकोट का 49 सीटों पर है. नेतन्याहू के करीबी माने जाने वाले चैनल 14 के मुताबिक उनके गठबंधन को 60 और आइजेनकोट को 43 सीटें मिल सकती हैं. 

नेतन्याहू की लिकुड सबसे बड़ी पार्टी

अमेरिकी मीडिया संस्थान एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, एग्जिट पोल में बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पर्टी को गादी आइजेनकोट की यशर पार्टी से ज्यादा सीटें मिल रही हैं. i24NEWS के मुताबिक ज्यादातर पोल में लिकुड को 24 या 25 सीटें मिली हैं, जबकि चैनल 14 ने उसे 30 सीटें दी हैं. 

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सरकार बनाने की राह आसान नहीं

इजरायली संसद नेसेट में कुल 120 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए 61 सीटें चाहिए. एक्सियोस की रिपोर्ट मुताबिक, अरब पार्टियों को 17 से 18 सीटें मिलने का अनुमान है. बेंजामिन नेतन्याहू के गठबंधन को सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीट मिलती नहीं दिख रही हैं. ऐसे में उनके लिए बहुमत साबित करना मुश्किल हो सकता है.

दूसरी तरफ, अगर गादी आइजेनकोट का गठबंधन थोड़ी बढ़त बना भी लेता है, तो उसे दोनों अरब पार्टियों के समर्थन से अल्पमत सरकार बनानी पड़ेगी. लेकिन अभी ये साफ नहीं है कि उनके सभी सहयोगी जीत दर्ज करने वाले अरब मुस्लिम नेताओं की सपोर्ट लेने के लिए राजी होंगे या नहीं.

दोनों नेताओं के दावे

एक्सियोस के मुताबिक आइजेनकोट ने आधी रात के बाद भाषण में जीत का दावा किया. उन्होंने कहा कि अगर नेतन्याहू ‘सभ्य नेता’ हैं तो जनता के बदलाव के फैसले के बाद राजनीति से हट जाएं. दूसरी तरफ नेतन्याहू ने भी बहुमत हासिल करने का दावा किया है.

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हारेट्ज की रिपोर्ट के मुताबिक नेतन्याहू ने कहा कि ‘जायनिस्ट जनता’ में दक्षिणपंथ को बड़ा बहुमत है, और एक मजबूत दक्षिणपंथी सरकार बनाने की अपील की. कतर के न्यूज चैनल अल जजीरा के मुताबिक नतीजे जो भी हों, नई सरकार के शपथ लेने तक बेंजामिन नेतन्याहू कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रहेंगे. 

7 अक्टूबर के हमले के बाद पहला चुनाव

अल जजीरा के मुताबिक, ये गाजा, लेबनान और ईरान में हुई जंग के बाद इजरायल का पहला आम चुनाव है. इजरायल के चुनाव आयोग के मुताबिक, इस बार 77.7 फीसदी वोटिंग हुई है, जो 1999 के बाद सबसे ज्यादा है. NBC न्यूज के मुताबिक करीब 57 लाख लोगों ने वोट डाला, जो 2022 के मुकाबले 7.1 फीसदी ज्यादा है. 

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कौन हैं गादी आइजेनकोट? 

66 साल के गादी आइजेनकोट इजरायली सेना (IDF) के पूर्व प्रमुख हैं. उनका परिवार मोरक्को से इजरायल आया था और मजदूर तबके से ताल्लुक रखता है. वे 2015 से 2019 तक सेना के प्रमुख रहे. साल 2022 में उन्होंने बेनी गांट्ज की नेशनल यूनिटी पार्टी से राजनीति में कदम रखा.

7 अक्टूबर के हमले के बाद आइजेनकोट, नेतन्याहू की वॉर कैबिनेट में शामिल हुए. दिसंबर 2023 में गाजा में एक सैन्य अभियान के दौरान उनके 25 साल के बेटे गाल की मौत हो गई. क्रिश्चियन साइंस मॉनिटर की रिपोर्ट के मुताबिक, गाल बंधकों के शवों को निकालने के अभियान में शामिल थे. आइजेनकोट ने इस युद्ध में अपने दो भतीजों को भी खोया. वे वॉर कैबिनेट में हमास के साथ समझौता कर बंधकों की रिहाई कराने के मजबूत समर्थक माने जाते थे.

जून 2024 में गादी आइजेनकोट ने बेनी गांट्ज के साथ वॉर कैबिनेट छोड़ दी. एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, उन्होंने नेतन्याहू पर युद्ध को लेकर स्पष्ट रणनीति न होने का आरोप लगाया. उनका कहना था कि राजनीतिक हित युद्ध से जुड़े फैसलों पर असर डाल रहे हैं. इस चुनाव में उनकी पार्टी का नाम यशर है.

आइजेनकोट ने 7 अक्टूबर के हमले में हुई चूक की जांच के लिए सरकारी आयोग बनाने की मांग की है. साथ ही, वे इजरायल के उत्तर और दक्षिण के प्रभावित इलाकों के पुनर्निर्माण और शिक्षा व स्वास्थ्य पर ज्यादा निवेश की वकालत कर रहे हैं. अल जजीरा के मुताबिक, हमले के करीब तीन साल बाद भी सरकार ने इसकी जांच के लिए आयोग नहीं बनाया है.

अगर बेंजामिन नेतन्याहू की बात करें तो वे टोटल 19 साल प्रधानमंत्री रह चुके हैं. 1996 से 1999, 2009 से 2021 और 2022 से अब तक. उन पर भ्रष्टाचार का मुकदमा चल रहा है. अगर वे चुनाव हारे, तो भ्रष्टाचार के मामले में उनकी मुसीबत बढ़ सकती है.

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