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'अमेरिका जो जंग में हासिल नहीं कर सका, वो...', ईरान ने बताई बातचीत फेल होने की वजह

Iran-US Islamabad Talks Failed: ईरानी न्यूज एजेंसी तस्नीम के मुताबिक, अमेरिका ने बातचीत की मेज पर वह हासिल करने की कोशिश की, जो वह युद्ध के जरिए हासिल नहीं कर सका. और क्या बताया?

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बातचीत के दौरान ईरानी डेलीगेशन ने ईरान के अधिकारों पर जोर दिया. (फोटो: इंडिया टुडे)

पाकिस्तान के इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत फेल हो गई है. ईरान का कहना है कि अमेरिका की शर्तें जरूरत से ज्यादा सख्त थीं. इस वजह से समझौते का रास्ता नहीं निकला. ईरान ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका ने बातचीत की मेज पर वह हासिल करने की कोशिश की, जो वह युद्ध के जरिए हासिल नहीं कर सका. इससे पहले, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बताया था कि ईरान ने अमेरिका की शर्तें मानने से इनकार कर दिया है.

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ईरानी सरकार से जुड़ी न्यूज एजेंसी तस्नीम ने इस्लामाबाद भेजे गए अपने रिपोर्टर के हवाले से बताया कि अमेरिकी टीम की बहुत ज्यादा मांगों की वजह से अमेरिका और ईरान किसी समझौते पर नहीं पहुंच पाए. इस लंबी कूटनीतिक बातचीत के दौरान ईरानी डेलीगेशन ने ईरान के अधिकारों पर जोर दिया.

रिपोर्ट में बताया गया कि अमेरिकियों का इरादा उन लक्ष्यों को हासिल करना था जिन्हें वे ईरान के खिलाफ युद्ध से हासिल नहीं कर पाए थे. इसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान के कंट्रोल का मुद्दा और देश से न्यूक्लियर मटीरियल हटाना शामिल था, लेकिन ईरानी डेलीगेशन ने उस कोशिश को नाकाम कर दिया. 

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तस्नीम रिपोर्टर ने बताया कि ईरानी टीम ने अलग-अलग कोशिशों के जरिए अमेरिका के साथ एक कॉमन एग्रीमेंट फ्रेमवर्क पर पहुंचने की कोशिश की, लेकिन अमेरिका की ज्यादा मांगों के लालच ने उन्हें समझदारी और असलियत से बहुत धकेल दिया.

ईरान के सरकारी मीडिया प्रेस टीवी के मुताबिक, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा,

“कई मुद्दों पर कुछ बात आगे बढ़ी, लेकिन दो या तीन खास बातों पर मतभेद बने रहे और आखिरकार बातचीत बिना किसी समझौते के खत्म हो गई. ईरान को अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए अपने तरीके इस्तेमाल करते रहना चाहिए." 

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ईरानी डेलीगेशन के सदस्य प्रोफेसर सैयद मोहम्मद मरांडी ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप का प्रशासन गंभीरता से बातचीत नहीं कर रहा था. रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान पाकिस्तान और दूसरे क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ अपनी बातचीत और सलाह-मशविरा जारी रखेगा.

पाकिस्तान ने क्या कहा?

पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच असफल वार्ता पर बयान जारी किया. बयान में कहा गया,

"पाकिस्तान आने वाले दिनों में ईरान और अमेरिका के बीच संपर्क और बातचीत को बढ़ावा देना जारी रखेगा."

पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने दोनों देशों से सीजफायर बनाए रखने की अपील की. उन्होंने कहा, 

“सेना प्रमुख आसिम मुनीर (फील्ड मार्शल) ने सीजफायर के लिए कई राउंड की बातचीत में मदद की. हमें उम्मीद है कि दोनों पक्ष सीजफायर एग्रीमेंट जारी रखेंगे.”

जेडी वेंस ने क्या बताया?

शनिवार, 11 अप्रैल को अमेरिका और ईरानी डेलीगेशन के बीच बातचीत शुरू हुई. वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस ने नेगोशिएशन में अमेरिका की तरफ से लीड किया, जबकि ईरानी पार्लियामेंट के स्पीकर मोहम्मद बाकिर कालीबाफ ने ईरानी तरफ से लीड किया. कई राउंड की बातचीत के बाद जेडी वेंस ने रविवार, 12 अप्रैल की सुबह एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. पत्रकारों से बात करते हुए जेडी वेंस ने कहा,

"हम पिछले 21 घंटे से इस बातचीत में लगे हुए हैं और हमने ईरानियों के साथ कई अहम बातचीत की है. यह अच्छी खबर है. बुरी खबर यह है कि हम किसी समझौते पर नहीं पहुंच पाए हैं. मुझे लगता है कि यह ईरान के लिए ज्यादा बुरी खबर है, न कि अमेरिका के लिए. इसलिए, हम किसी समझौते पर पहुंचे बिना अमेरिका वापस जा रहे हैं... उन्होंने हमारी शर्तें मानने से मना कर दिया है."

जेडी वेंस इस्लामाबाद से अमेरिका के लिए रवाना हो गए हैं. ईरानी डेलीगेशन भी इस्लामाबाद से लौट गया है. पाकिस्तान में दोनों देशों के बीच कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई. इसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, परमाणु कार्यक्रम, युद्ध का मुआवजा, ईरान की सीज संपत्ति छोड़ना और पश्चिम एशिया में जंग पूरी तरह खत्म करना शामिल है. जेडी वेंस के बयान से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ समझौता हो या न हो, लेकिन जीत अमेरिका की ही होगी.

ये भी पढ़ें: इस्लामाबाद में ईरान-US की बातचीत फेल, जेडी वेंस बोले- ‘ईरान ने हमारी शर्तें नहीं मानी, हम अमेरिका लौट रहे’

परमाणु हथियार को लेकर ‘फंसी’ बातचीत

उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बताया कि अमेरिका के लिए सबसे बड़ा मुद्दा ईरान को न्यूक्लियर हथियार बनाने से रोकना है. उन्होंने कहा कि ईरान ने अमेरिका को अपना न्यूक्लियर एनरिचमेंट प्रोग्राम रोकने या परमाणु हथियार न बनाने को लेकर कोई ठोस कमिटमेंट नहीं दिया. यही बातचीत के पटरी से उतरने का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है.

जेडी वेंस ने यह भी बताया कि पाकिस्तान आने से पहले राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने उनसे कहा था कि अच्छी नीयत के साथ इस्लामाबाद जाएं. वेंस ने दावा किया कि उन्होंने इस्लामाबाद में ईरानी डेलीगेशन के साथ अच्छी और साफ नीयत के साथ बात की.

वीडियो: Iran-US Peace Talks में इजरायल का क्या रोल है?

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