'6 जुलाई को समुद्र में तेज तूफान आया. और मेरी नाव पलट गई. मेरे साथी समुद्र में कूद गए. तीन की मौत नाव के नीचे आने से हो गई. बाकी जो बचे, वो डूब गए. लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी. पांच दिनों तक कुछ नहीं खाया. खाने को कुछ था ही नहीं. इसलिए बस पानी पीया.चारों तरफ पानी से घिरे रहने के बाद भी रविंद्र की प्यास बादलों ने बुझाई. जब बारिश होती तो वही पानी पी लेते. रविंद्र के लिए ये पांच दिन बेहद मुश्किल भरे थे. उन्होंने कहा,
सोचता था कि मेरी मौत जल्द हो जाएगी, लेकिन फिर जीने की चाह मुझे हिम्मत दे देती थी. 10 जुलाई को मैंने चिटगांव के पास बांग्लादेश का जहाज देखा. मुझे उम्मीद बंधी. मैं दो घंटे की कड़ी कोशिश के बाद उसके पास तक पहुंचा इसके बाद मुझे मदद मिली.रविंद्र को अपने भतीजे को नहीं बचाने का अफसोस है. बचाव से केवल तीन घंटे पहले उसकी मौत हो गई. रविंद्र के लिए फरिश्ता बने बांग्लादेश के जहाज पर सवार लोग. उन्हें चित्तागोंग तट से रेस्क्यू किया गया था. इसके बाद उन्हें इलाज के लिए कोलकाता लाया गया.
मशहूर शो 'दी मॉर्निंग' पर करोड़ों लोगों ने देखी एलिजाबेथ और लोगन की ये अजीब शादी




















