अमेरिका के एक ट्रेड कोर्ट ने राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप को झटका दिया है. कोर्ट ने ट्रंप के 10 फीसदी ग्लोबल टैरिफ को अनुचित करार दिया है. अदालत ने कहा कि जिस व्यापार कानून का इस्तेमाल 10% ग्लोबल टैरिफ लगाने के लिए किया गया, वह कानूनी तौर पर सही नहीं था. फिलहाल यह राहत केवल उन चुनिंदा पक्षों को मिली है जिन्होंने इसे चुनौती दी थी. बाकी दुनिया और दूसरे अमेरिकी इंपोर्टर्स के लिए यह अस्थायी टैरिफ लागू रहेगा.
डॉनल्ड ट्रंप को झटका, अमेरिकी कोर्ट ने 10% ग्लोबल टैरिफ को बताया गलत, अब क्या करेंगे?
US Court of International Trade ने कहा कि जिस व्यापार कानून का इस्तेमाल 10% ग्लोबल टैरिफ लगाने के लिए किया गया, वह कानूनी तौर पर गलत था.


NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी इंटरनेशनल ट्रेड कोर्ट ने पाया कि 1974 के व्यापार अधिनियम (Trade Act of 1974) की धारा 122 का इस्तेमाल, जिस तरह से 10% ग्लोबल टैरिफ के लिए किया गया, वह कानूनी रूप से गलत था. कोर्ट ने इसे चुनौती देने वाले दो प्राइवेट इंपोर्टर्स और वाशिंगटन स्टेट को इससे राहत दी है.
अदालत 2-1 के बहुमत से यह फैसला सुनाया. अमेरिका के बाकी सभी राज्यों और अन्य कंपनियों को अभी भी यह 10% टैरिफ देना होगा, जब तक कि वे खुद अदालत न जाएं या फिर जुलाई में समय-सीमा खत्म न हो जाए. ट्रंप प्रशासन का लगाया 10% का अस्थायी ग्लोबल टैरिफ 24 जुलाई, 2026 को खत्म होने वाला है.
न्यूयॉर्क स्थित कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड ने सभी इंपोर्टर्स के लिए टैरिफ हटाने वाली रोक जारी करने से मना कर दिया. उसने 24 राज्यों के एक ग्रुप की अपील को खारिज कर दिया, जिसमें ज्यादातर डेमोक्रेट्स शामिल थे. अदालत ने कहा कि उन राज्यों के पास यह राहत मांगने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है.
कोर्ट ने फैसला सुनाया कि वाशिंगटन को छोड़कर, जिन राज्यों ने केस किया था, उनमें से ज्यादातर ऐसे इंपोर्टर नहीं थे जिन्होंने सेक्शन 122 के तहत लगाए गए टैरिफ का भुगतान किया हो या जो उसका भुगतान कर सकते हों. वॉशिंगटन ने सबूत पेश किया कि उसने यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन के जरिए टैरिफ का भुगतान किया था.
इसके अलावा, दो छोटे बिजनेस, खिलौना कंपनी 'बेसिक फन' और मसाला इंपोर्टर 'बर्लैप एंड बैरल' की ओर से भी मामले में तर्क पेश किए गए. इन कंपनियों ने दलील में कहा कि नए टैरिफ कानून में अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट के अहम फैसले को नजरअंदाज किया गया है. इस फैसले के तहत राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के 2025 के टैरिफ कानून को इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट के तहत रद्द कर दिया था.
व्हाइट हाउस और अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव के ऑफिस की तरफ से इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है.
ट्रंप ने क्या कहा?ट्रंप ने ट्रेड कोर्ट के फैसले के लिए ‘दो कट्टर वामपंथी जजों’ को जिम्मेदार ठहराया. वॉशिंगटन में उन्होंने पत्रकारों से कहा,
"इसलिए, कोर्ट के मामलों में मुझे अब किसी बात पर हैरानी नहीं होती. किसी भी बात पर नहीं… हमें एक फैसला मिलता है और हम काम को दूसरे तरीके से करते हैं."
ट्रंप प्रशासन इस फैसले को चुनौती दे सकता है.
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तीसरा रास्ताट्रंप प्रशासन अब 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 को अपनी नई टैरिफ रणनीति के मुख्य हथियार के रूप में देख रहा है. 'धारा 122' और 'IEEPA' (आपातकालीन शक्तियां) के उलट, 'धारा 301' को अमेरिकी अदालतों में चुनौती देना कठिन है.
इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत ट्रंप द्वारा दुनिया भर में लगाए गए टैरिफ को गलत ठहराया था. साथ ही यह भी कहा था कि 1977 का कानून प्रेसिडेंट को टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता है. इस फैसले से नाराज ट्रंप ने सभी देशों पर 10 फीसदी ग्लोबल टैरिफ लगा दिया था.
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