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UNGA में गोलान हाइट्स पर इजरायल के खिलाफ प्रस्ताव आया, भारत ने समर्थन कर दिया

Golan Heights सीरिया का एक इलाका है जिस पर इज़रायल ने 5 जून 1967 से कब्जा किया हुआ है. यह इलाका रणनीतिक रूप से इज़रायल के लिए खास मायने रखता है.

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इज़रायल के कब्जे वाला सीरियाई इलाके गोलान हाइट्स का एक दृश्य. (तस्वीर:Reuters/India Today)

भारत ने इज़रायल (Israel) के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के एक प्रस्ताव का समर्थन किया है. इस प्रस्ताव में इज़रायल से गोलान हाइट्स (Golan Heights) इलाके से हटने की मांग की गई है. गोलान हाइट्स, सीरिया में एक इलाका है जिस पर 5 जून, 1967 को इज़राइली सेना ने कब्ज़ा कर लिया था. भारत इस मुद्दे पर फिलिस्तीन (Palestine) के साथ उन 91 देशों की लिस्ट में है, जिन्होंने इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया है.

गोलान हाइट्स खाली करो इज़रायल

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्ताव में कहा गया है कि इज़रायल सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव का पालन करने में विफल रहा है. इसके मुताबिक, UNGA ने अपनी मांग दोहराई है कि सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के अनुपालन में इज़राइल 4 जून, 1967 की सीमा का अनुपालन करते हुए सीरियाई वाले गोलान हाइट्स से हट जाए. प्रस्ताव में इस बात पर चिंता जताई गई है कि सुरक्षा परिषद और महासभा के प्रस्तावों से उलट इजरायल 1967 से सीरियाई गोलान से पीछे नहीं हटा है.

कौन दिया साथ, कौन हुआ खिलाफ?

28 नवंबर को हुए मतदान में भारत के अलावा संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के समर्थन में वोट करने वाले देशों में बांग्लादेश, पाकिस्तान, नेपाल, चीन, लेबनान, ईरान, इराक और इंडोनेशिया सहित 91 देश शामिल हैं. वहीं, ऑस्ट्रेलिया, यूनाइटेड किंगडम, अमेरिका, पलाऊ, माइक्रोनेशिया, इज़राइल, कनाडा और मार्शल द्वीप समूह ने इस प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया. यूक्रेन, फ्रांस, जर्मनी, डेनमार्क, बेल्जियम, जापान, केन्या, पोलैंड, ऑस्ट्रिया और स्पेन सहित 62  देशों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया.

गोलान हाइट्स का महत्व

गोलान हाइट्स सीरिया में मौजूद एक पहाड़ी इलाका है. यहां से सीरिया की राजधानी दमिश्क साफ दिखाई देती है. इज़रायल इसका फायदा उठाते हुए सीरिया की गतिविधियों पर नज़र रख सकता है. इज़राइल ने साल 1967 में सीरिया के साथ 6 दिन चले युद्ध के बाद गोलान हाइट्स पर अपना कब्जा जमा लिया था. 

बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, सीरिया ने 1973 में एक बार फिर से गोलान हाइट्स को दोबारा हासिल करने का प्रयास किया था. लेकिन उसे कामयाबी नहीं मिली. रिपोर्ट के मुताबिक, साल 1974 से दोनों देशों ने इस इलाके में युद्ध विराम लागू कर दिया है और तब से संयुक्त राष्ट्र की सेना युद्धविराम रेखा पर तैनात है. इज़रायल ने साल 1981 में गोलान हाइट्स को अपनी सीमा रेखा में मिलाने की घोषणा की थी जिसे इंटरनेशनल लेवल पर मंजूरी नहीं मिली.

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