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पूरे पाकिस्तान को अपनी रेंज में ले सकने वाली 'निर्भय' का अब्दुल कलाम द्वीप से सफल परीक्षण

जानिए ये मिसाइल रूस के साथ मिलकर बनाई गई ब्राह्मोस से भी ज़्यादा ख़ास क्यों है.

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इस मिसाइल के आने से भारत की ब्राह्मोस पर निर्भरता कम होगी.
भारत ने स्वदेशी सब-सॉनिक क्रूज मिसाइल 'निर्भय' का ओडिशा के अब्दुल कलाम द्वीप से सफल परिक्षण किया है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने इस मिसाइल को विकसित किया है.  ‘निर्भय’ मिसाइल 6 मीटर लंबी, 0.52 मीटर चौड़ी है. इसका विंग्सस्पैन 2.7 मीटर लंबा है. निर्भय मिसाइल 300 किलोग्राम तक परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है. इसका अपना वजन लगभग 1500 किलोग्राम है. 1000 किलोमीटर तक सटीक निशाना निर्भय मिसाइल करीब 1000 किलोमीटर के दायरे में मौजूद ठिकानों को निशाना बना सकती है. रक्षा सूत्रों के मुताबिक, निर्भय सभी मौसम में काम करने वाली क्रूज मिसाइल है. इसे टेक ऑफ के लिए सॉलिड रॉकेट बूस्टर से संचालित किया जाता है. इस बूस्टर की वजह से ये आसमान में मंडरा सकती है. मतलब ये कि निर्भय मिसाइल हवा में कई पैंतरेबाजी भी कर सकती है. क्रूज़ मिसाइलों की खास बात होती है कि ये काफी कम उंचाई पर उड़ सकती है. इन्हें कंप्यूटर के ज़रिए कंट्रोल करके दुशमन के ठिकानों पर सटीक निशाने लगाए जा सकते हैं. ब्राह्मोस से भी खास क्यों है मिसाइल के सटीक निशाने के लिए इसमें बेहद उच्च स्तरीय नेवीगेशन सिस्टम लगा है. रक्षा वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि यह मिसाइल ब्रह्मोस की कमी को पूरा करेगी. ब्रह्मोस की मारक क्षमता 290 किलोमीटर तक है, जबकि निर्भय मिसाइल 1000 किलोमीटर तक मार सकती है. ब्राह्मोस ‘सुपरसोनिक क्रूज’ मिसाइल है. इसे भारत और रूस ने संयुक्त रूप से विकसित किया है. लेकिन लंबी दूरी तक की क्षमता वाली मिसाइल निर्भय अलग तरह की है. यह बेंगलुरु में डीआरडीओ की इकाई एयरोनोटिकल डेवलपमेंट इस्टैबलिशमेंट (एडीई) की ओर से विकसित की जा रही है. यह मिसाइल पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से बनी है. नवंबर 2017 में इस मिसाइल का 5वां टेस्ट किया गया था. इससे पहले, दूसरे टेस्ट को छोड़कर बाकी सभी टेस्ट नाकामयाब ही रहे थे. निर्भय मिसाइल की पहली परीक्षण उड़ान 12 मार्च, 2013 को सुरक्षा कारणों से बीच रास्ते में ही समाप्त करनी पड़ी थी. उस समय इसके एक हिस्से में तकनीकी गड़बड़ी आ गई थी. हालांकि 17 अक्तूबर, 2014 को दूसरी उड़ान सफल रही थी. अगला परीक्षण 16 अक्तूबर, 2015 को किया गया, जिसे उड़ान शुरू होने के 700 सैकंड बाद रोकना पड़ा था. मिसाइल का चौथा टेस्ट 21 दिसंबर 2016 को ओडिशा के बालासोर में किया गया. उस समय भी यह तयशुदा रास्ते से भटक गई थी.
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