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तो 200 रुपये में पाकिस्तानी हिंदू बन सकेंगे इंडियन

पाकिस्तानी अल्पसंख्यकों को प्रॉपर्टी खरीदने, बैंक अकाउंट खोलने, यहां तक कि पैन नंबर और आधार कार्ड की सुविधा देने भी प्लान है.

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पाकिस्तान के बलूचिस्तान में श्री हिंगलाज माता मंदिर में एक हिंदू श्रद्धालु. यहां हर साल चार दिन तक मेला लगता है जिसमें भारत और पाकिस्तान के हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं. तस्वीर 2011 की है. फोटो: रॉयटर्स
पाकिस्तानी अल्पसंख्यकों पर भारत सरकार मेहरबान हुई है. वह पाकिस्तानी अल्पसंख्यकों - जिनमें हिंदू भी शामिल हैं - को भारत की नागरिकता देने की प्रक्रिया आसान करने वाली है. इसके लिए होम मिनिस्ट्री ने नया प्रपोजल तैयार किया है. मिनिस्ट्री के एक अधिकारी ने बताया कि प्रस्ताव में पाकिस्तानी अल्पसंख्यकों को 'लॉन्ग टर्म वीजा' देकर प्रॉपर्टी खरीदने, बैंक अकाउंट खोलने, यहां तक कि पैन नंबर और आधार कार्ड देने पर भी विचार किया जा रहा है. प्रस्ताव के मुताबिक, ऐसे लोगों से बहुत कम फीस लेकर 18 जिलों के डीएम को दो साल की अवधि में नागरिकता देने का हक दिया जाएगा. ये जिले हैं रायपुर (छत्तीसगढ़), अहमदाबाद, गांधीनगर, राजकोट, कच्छ और पाटन (गुजरात), भोपाल और इंदौर (मध्य प्रदेश), नागपुर मुंबई, पुणे और ठाणे (महाराष्ट्र), पश्चिमी दिल्ली और उत्तरी दिल्ली (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र), जोधपुर, जैसलमेर और जयपुर (राजस्थान) और लखनऊ (उत्तर प्रदेश). अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तान से आए हिंदुओं - जो वहां अल्पसंख्यक हैं - को लॉन्ग टर्म वीजा पर भारत में रहने में मुश्किलें पेश आती हैं. इसलिए सरकार उनका बैंक अकाउंट खोलने, पैन और आधार नंबर देने का प्लान भी कर रही है.

यह योजना अभी सिर्फ प्रस्ताव के चरण में है और इस पर जनता की प्रतिक्रिया और सुझाव मांगे गए हैं. इससे मिली जानकारी गृह मंत्रालय की विदेशी ब्रांच को भेजी जी सकती है.

अभी पाकिस्तानी अल्पसंख्यकों को भारत में नागरिक के तौर पर रजिस्ट्रेशन की फीस 5 हजार और देशीकरण की फीस 15 हजार रुपये है. लेकिन नया प्रस्ताव कहता है कि इसकी जगह एक साथ अप्लाई करते समय और रजिस्ट्रेशन या देशीकरण का सर्टिफिकेट देते समय उनसे सिर्फ 100-100 रुपये लिए जाएं. यानी प्रस्ताव लागू हुआ तो पाकिस्तानी हिंदू सिर्फ 200 रुपये खर्च करके भारतीय बन सकेंगे.

अधिकारी ने कहा, 'ऐसी रिपोर्ट है कि बांग्लादेश और पाकिस्तान के अल्पसंख्यक समुदायों (हिंदू, सिख, ईसाई, जैन, पारसी और बौद्ध) के लोग धार्मिक उत्पीड़न या इसके डर से भारत में शरण चाहते हैं. इनमें से बहुत सारे भारत में बगैर किसी मान्य ट्रैवल डॉक्युमेंट के या ऐसे डॉक्युमेंट पर आए हैं जिनकी अवधि पूरी हो चुकी है.'

सरकार ने पिछले साल ही 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आने वाले पाकिस्तानी और बांग्लादेशी अल्पसंख्यक नागरिकों को मानवता के आधार पर ट्रैवल डॉक्युमेंट्स की अवधि पूरी होने के बाद भी यहां रहने की छूट दी है. सूत्रों का कहना है कि जोधपुर, जैसलमेर, जयपुर, रायपुर, अहमदाबाद, राजकोट, कच्छ, भोपाल, इंदौर, मुंबई, नागपुर, पुणे, दिल्ली और लखनऊ में बड़ी संख्या में पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थियों की आबादी है.

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