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ईरान युद्ध किसने करवाया? ट्रंप के बड़े अधिकारी ने इस्तीफा देकर बता दिया

डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन के सीनियर अधिकारी जो केंट ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. केंट ने आरोप लगाया कि ईरान से अमेरिका को कोई तात्कालिक खतरा नहीं था. इजरायल समर्थक लॉबी और उनके अमेरिकी समर्थकों के दबाव में यह युद्ध शुरू किया गया है. उन्होंने कहा कि उनकी अंतरात्मा इस युद्ध का समर्थन करने से रोकती है.

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जो केंट ने आरोप लगाया कि इजरायली लॉबी के दबाव में ये युद्ध शुरू किया गया है. (इंडिया टुडे)

ईरान से जंग को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप अपने ही देश में घिरते नजर आ रहे हैं. पिछले दिनों विपक्षी सांसदों ने उनके फैसले पर सवाल उठाए थे. वहीं अब उनकी ही टीम के एक बड़े अधिकारी ने ईरान पर हमले के खिलाफ अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. अधिकारी का नाम है जो केंट. वो अमेरिका के नेशनल काउंटर टेररिज्म सेंटर के डायरेक्टर की भूमिका में थे.

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जो केंट ने इस्तीफे की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने अकाउंट से दी है. उन्होंने लिखा, 

काफी सोचने के बाद मैंने नेशनल काउंटर टेररिज्म सेंटर के डायरेक्टर के पद से इस्तीफा देने का फैसला किया है. मैं अपनी अंतरात्मा की आवाज के खिलाफ जाकर ईरान में चल रहे युद्ध का समर्थन नहीं कर सकता. फिलहाल ईरान हमारे देश के लिए कोई खतरा नहीं पैदा कर रहा था. यह साफ है कि हमने यह युद्ध इजरायल और उसकी शक्तिशाली अमेरिकी लॉबी के दबाव में शुरू किया है.

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यह ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू होने के बाद से ट्रंप प्रशासन की ओर से आया सबसे बड़ा इस्तीफा है. केंट ने ये स्टेप ऐसे मौके पर लिया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है. इसके चलते पूरे वेस्ट एशिया में तनाव पैदा हो गया है. 

काउंटर टेरिरिज्म सेंटर अमेरिका की एक इंटेलिजेंस और सिक्योरिटी एजेंसी है. यह अलग-अलग सरकारी विभागों (जैसे CIA,FBI, सेना) से जानकारी जुटा कर आतंकवादी खतरों की पहचान करती है. जो केंट ने डॉनल्ड ट्रंप के नाम एक पत्र लिखकर अपना इस्तीफा भेजा है. इस पत्र में उन्होंने लिखा,

मैं आपकी उन विदेश नीतियों का समर्थन करता हूं, जिसके आधार पर आपने साल 2016, 2020 और 2024 में चुनाव प्रचार किया था. इसे आपने पहले कार्यकाल में लागू भी किया. आप समझ चुके थे कि मिडिल ईस्ट में युद्ध एक ऐसा ट्रैप है, जिसमें हमारे कई देशभक्तों की जान गई है. और इसमें हमारे देश के संसाधन की भी बर्बादी हुई है.

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जो केंट ने ट्रंप प्रशासन में काम कर रहे हाई प्रोफाइल इजरायली अधिकारियों और उनकी समर्थक मीडिया लॉबी पर राष्ट्रपति ट्रंप को युद्ध के लिए उकसाने का आरोप लगाया है. उन्होंने लिखा,

इन अधिकारियों के चलाए गए प्रोपेगैंडा ने आपके (डॉनल्ड ट्रंप) अमेरिका फर्स्ट अभियान की पूरी तरह से कमजोर कर दिया है. इसी लॉबी ने ही ईरान के खिलाफ युद्ध का माहौल बनाया है. इन लोगों ने आपको भरोसा दिलाया कि ईरान अमेरिका के लिए खतरा पैदा कर रहा है. और उस पर हमला करने का यही सबसे सही मौका है. हमला करते ही हमारी जीत तय है.

उन्होंने आगे लिखा कि वो अमेरिका की अगली पीढ़ी को ऐसे युद्ध में जाने का समर्थन नहीं कर सकते, जिसमें अमेरिकी लोगों की जान तो जाएगी ही, लेकिन इससे अमेरिका को कोई फायदा नहीं होगा. जो केंट ने लिखा,

मैं आपसे विनती करता हूं कि आप इस पर विचार करें कि हम ईरान में क्या कर रहे हैं और किसके लिए कर रहे हैं. अब साहसी फैसले लेने का समय आ गया है. आप अपना रास्ता बदल सकते हैं. या फिर आप अमेरिका के लिए और ज्यादा अराजक स्थिति पैदा कर सकते हैं. फैसला आपके हाथ में है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने भी केंट के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा,

यह अच्छा है कि उसने इस्तीफा दे दिया है. क्योंकि उसको लगता है कि ईरान अमेरिका के लिए खतरा नहीं पैदा कर रहा है.

कौन हैं जो केंट ?

जो केंट को पिछले साल जुलाई में नेशनल काउंटर टेररिज्म सेंटर का डायरेक्टर बनाया गया था. सीनेट में उनको नॉमिनेट करने के लिए कड़ा मुकाबला हुआ था. उनके समर्थन में 52 और विरोध में 44 वोट पड़े थे. ट्रंप प्रशासन का हिस्सा बनने से पहले केंट ने राजनीति में एंट्री की भी कोशिश की थी. उन्होंने वाशिंगटन स्टेट से दो बार कांग्रेस का चुनाव लड़ा. लेकिन दोनों ही मौकों पर हार मिली.

राजनीति में आने से पहले वे आर्मी रेंजर और अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज का हिस्सा रह चुके हैं. उन्होंने मिडिल ईस्ट में 11 युद्ध अभियानों में हिस्सा लिया है. साल 2019 में ISIL (ISIS) के एक सुसाइड बॉम्बर ने सीरिया में उनकी पत्नी की हत्या कर दी थी. राष्ट्रपति ट्रंप को लिखे अपने पत्र में केंट ने अपनी पत्नी की मृत्यु का जिक्र किया है. उन्होंने लिखा, “इजरायल द्वारा रचे गए एक युद्ध में मेरी पत्नी की हत्या हो गई.”

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 13 अमेरिकी सैनिक मारे जा चुके हैं. वहीं ईरान में कम से कम 1044 लोगों की मौत हुई है. इसके अलावा खाड़ी देशों में 20 और इजरायल में कम से कम 15 लोगों की जान गई है. 

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