पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान से जुड़े एक प्रस्ताव को ‘को-स्पॉन्सर’ (समर्थन) किया है. इस प्रस्ताव में खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के सदस्य देशों और जॉर्डन पर ईरान के भयानक हमलों की कड़ी निंदा की गई है. साथ ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने की ईरान की धमकियों की आलोचना की गई है.
संयुक्त राष्ट्र में ईरान के हमलों के खिलाफ पेश प्रस्ताव को भारत ने समर्थन दिया
UNSC के प्रस्ताव में बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन की क्षेत्रीय अखंडता, संप्रभुता और राजनीतिक स्वतंत्रता का पुरजोर समर्थन किया गया. वहीं इन देशों पर ईरान के हमलों की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बताया गया.


इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त राज्य अमेरिका की अध्यक्षता में 15 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने इस प्रस्ताव को पास किया. इसके पक्ष में 13 वोट पड़े, जबकि विरोध में कोई वोट नहीं पड़ा. वीटो का अधिकार रखने वाले स्थायी सदस्य चीन और रूस ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया.
भारत ने बहरीन के नेतृत्व वाले इस प्रस्ताव को 135 दूसरे देशों के साथ मिलकर 'को स्पॉन्सर' किया. इन देशों में ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, बांग्लादेश, भूटान, कनाडा. मिस्र, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, इटली, जापान, कुवैत, मलेशिया, मालदीव, म्यांमार, न्यूजीलैंड, नॉर्वे, ओमान, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, सिंगापुर, स्पेन, यूक्रेन, संयुक्त अरब अमीरात, यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका, यमन और जाम्बिया शामिल हैं.
इस प्रस्ताव में बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन की क्षेत्रीय अखंडता, संप्रभुता और राजनीतिक स्वतंत्रता का पुरजोर समर्थन किया गया. वहीं इन देशों पर ईरान के हमलों की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बताया गया.
ईरान से मांग की गई है कि वह GCC देशों और जॉर्डन के खिलाफ अपने हमले तुरंत बंद करे और प्रॉक्सी गुटों को इन देशों पर हमले के लिए उकसाने वाली कार्रवाइयों को बिना किसी शर्त के रोक दे. प्रस्ताव में अंतरराष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय नेविगेशन अधिकारों का सम्मान करने पर जोर दिया गया है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने या बाब अल मंडेब में समुद्री सुरक्षा को खतरे में डालने वाली ईरान की किसी भी धमकी या कार्रवाई की निंदा की गई है.
बहरीन के नेतृत्व वाले प्रस्ताव में रिहायशी इलाकों और नागरिक संपत्तियों पर हुए हमले और इसके चलते हुई नागरिकों की मौत की भी निंदा की गई है. ईरान से अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों के तहत अपने दायित्वों का पालन करने का आग्रह किया गया है.
दूसरी तरफ रूस ने भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक प्रस्ताव पेश किया था. लेकिन इसे पारित कराने के लिए रूस जरूरी 9 वोट जुटाने में असफल रहा. इस प्रस्ताव में ईरान, इजरायल, अमेरिका या फिर खाड़ी देशों का कोई जिक्र नहीं था, जो वेस्ट एशिया में चल रहे संघर्ष में शामिल हैं. इसमें केवल सैन्य गतिविधियों को रोकने का आग्रह किया गया था. लेकिन यह प्रस्ताव पारित नहीं हो पाया.
वीडियो: ईरान ने अमेरिका के तेल टैंकर को निशाना बनाया














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