"भारतीय निर्यातकों के लिए चीन में अपने सामान को निर्यात करने की भरपूर संभावनाएं हैं"वाणिज्य मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल चीन के साथ ट्रेड डेफ़िसिट यानी व्यापार में घाटा भी बढ़ा है. 2021 में चीन के साथ हुए व्यापार में भारत को करीब 48 खरब रुपये से ज्यादा का घाटा हुआ, जो 2019 में 38.2 खरब रुपये था. मंत्रालय की इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में चीन के रॉ मटीरियल, इंटरमीडिएट गुड्स, कैपिटल गुड्स की मांग बढ़ी है, जिस वजह से आयात में उछाल आया है. वहीं कंज्यूमर गुड्स के आयात में गिरावट दर्ज की गई है. 2019 के मुकाबले 2021 में कंज्यूमर गुड्स के आयात में 14.7 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई.

प्रतीकात्मक फोटो
पिछले साल भारत का सबसे ज्यादा मर्चेंडाइज ट्रेड अमेरिका के साथ हुआ. इस ट्रेड की कीमत करीब 840 खरब रुपये से ज्यादा रही. अमेरिका के बाद दूसरे नंबर पर चीन रहा. भारत ने चीन के साथ कुल 825 खरब रुपये का मर्चेंडाइज ट्रेड किया. इसके अलावा भारत ने UAE के साथ 51 खरब रुपये, सऊदी अरब के साथ 26 खरब रुपये, स्विट्ज़रलैंड के साथ 22.5 खरब रुपये और हांगकांग के साथ 21.7 खरब रुपये का मर्चेंडाइज ट्रेड किया.
वहीं अतिरिक्त विदेश व्यापार महानिदेशक (DGFT) अमिय चंद्रा का कहना है कि भारत ने अगले वित्त वर्ष 2022-23 के लिए 500 अरब डॉलर के निर्यात का लक्ष्य रखा है. चंद्रा के मुताबिक,
"चालू वित्त वर्ष में हम 400 अरब डॉलर का निर्यात लक्ष्य छूने को तैयार हैं. पहले नौ महीनों में देश का निर्यात 301.38 अरब डॉलर रहा है."अमिय चंद्रा ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी ने भारत को दुनिया के साथ नए सिरे से व्यापार करने के बारे में सोचने के लिए प्रेरित किया है. इसी लिए 2027 तक भारत का 1000 अरब डॉलर का निर्यात करने का लक्ष्य है.












