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इस गांव में अपनी भाभी से शादी करती है ननद

दोनों औरतें एक दूसरे को वरमाला पहनाती हैं. फिर लेती हैं फेरे.

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फोटो - thelallantop
राजू की रानी से शादी तय हुई. फिर शादी का दिन आया. राजू की बहन मीना घोड़ी चढ़ी. बारात रानी के घर की तरफ बढ़ने लगी. बाजे-गाजे के साथ सब रानी के घर पहुंचे. मीना और रानी ने अग्नि के सात फेरे लिए. मीना, रानी को बियाह के अपने घर ले आई. ये बात कुछ हज़म नहीं हुई ना? शादी करनी थी राजू और रानी को. राजू की बहन मीना काहे गयी रानी को बियाहने? आप सोच रहे होंगे कि हम आपको बरगला रहे हैं ये कहानी सुना के. लेकिन ये सब बात बिलकुल सच्ची है. एक बहुत पुरानी प्रथा है. गुजरात के तीन गांव में, सुरखेड़ा, सनद और अंबल गांव. इन तीनो गांवों में कभी भी दूल्हा खुद अपनी शादी में नहीं जाता. उसकी जगह उसकी बहन अपनी भाभी को ब्याहने जाती है. बारात में ननद ही घोड़ी चढ़ती है. भाभी के साथ सात फेरे लेती है. ननद भाभी एक दूसरे के गले में वरमाला भी डालते हैं. फिर विदा करके भाभी को अपने घर ले आती है. घर आ कर दुल्हन दूल्हे से मिलती है. अभी थोड़े दिन पहले फिर से ऐसा ही हुआ. वैसे तो ये प्रथा बहुत दिनों से चली आ रही है. लेकिन क्यों?
इन तीनों गांवों के एक-एक नगर देवता हुआ करते थे. तीनो कुंवारे रहे ज़िन्दगी भर. खुद शादी नहीं की तो किसी और को भी शादी करते नहीं देख सकते. अब यहां अगर कोई लड़का खुद अपनी शादी में चला गया तो नगर देवता नाराज़ जाएंगे. फिर उस लड़के के साथ कुछ बहुत बुरा होगा. वो मर भी सकता है. इसलिए शादी वाले दिन, दूल्हा अपने घर में ही कैद रहता है. उसकी कुवांरी बहन उसकी जगह घोड़ी चढ़ती है. अगर सगी बहन नही होती तो कज़िन्स भी जा सकती हैं. लेकिन दूल्हे को किसी भी कीमत पर घर से बाहर निकलने नहीं दिया जाता है. गांव के लोग मानते हैं कि बहन अपने भाई के लिए एक अच्छा भविष्य ले कर आती है. भाई को सारी मुसीबतों से बचाती है. इसीलिए भाई के लिए लड़की ब्याह कर लाने की ज़िम्मेदारी भी उसको ही दी गयी है.
इसी वजह से आजतक इन गांवों में कई पुश्तों से किसी भी आदमी ने अपनी शादी नही देखी. गांव के लोग अपनी इस परंपरा से बहुत ज्यादा जुड़े हुए हैं. उनको लगता है कि अगर किसी ने भी ये परंपरा तोड़ने की कोशिश की तो होने वाले दूल्हे के साथ ही उसके पूरे खानदान के लिए बुरा होगा. वैसे तो अभी तक ऐसा हादसा हुआ नहीं है. लेकिन फिर भी ये लोग इस परंपरा के खिलाफ कुछ करना नहीं चाहते. डर है कि कहीं नगर देवता पूरे गांव को श्राप ना दे दें. और फोटू देखो    

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