पाकिस्तान में एक और फतवा जारी होने वाला है. क़त्ल का फतवा. और इस बार कोई ऐरा गैरा निशाने पर नहीं है. बल्कि पाकिस्तान का एक बड़ा नेता है. अगर वो माफ़ी नहीं मांगते हैं तो फिर काफिर क़रार दे दिए जाएंगे. साफ साफ कह दिया गया है कि अगर वो काफिर ठहरा दिए जाते हैं तो कोई भी आशिके रसूल उनको क़त्ल कर देगा, और वो क़त्ल कोई गुनाह नहीं होगा.
मोहम्मद साहब का अपमान करने का ये इलज़ाम क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान खान पर लगा है. चौंक गए न. चौंकने वाली बात तो है ही क्योंकि ये वही इमरान खान हैं, जिन्होंने पोकेमोन गो गेम को गैर इस्लामी बताया था. अब उनको काफिर क़रार दिया जा रहा है. आप अंदाज़ा लगा सकते हैं जिंदगी कितनी मुश्किल है पाकिस्तान में. इन्ना सा बोल जाइए. उसका मतलब निकाल कर खुद आपके सामने मौलवी लोग रख देंगे. इस खबर में आप मौलवी साहब और इमरान खान को सुनने के बाद खुद तय कर लेंगे कि क्या सही है और क्या गलत. आप तय कर लेंगे कि इन मौलवी साहिबान को मामला उछालना था. अपनी दुकान चलाने के वास्ते.
पीर मोहम्मद अफज़ल कादरी पाकिस्तान में इस्लामी स्कॉलर हैं, जो पाकिस्तानी गवर्नर सलमान तासीर के बेटे शान तासीर के खिलाफ भी फतवा जारी कर चुके हैं. अब उन्होंने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के चीफ इमरान खान को एक ओपन लेटर लिखा है. जिसमें उन्होंने इमरान खान पर ब्लासफेमी का इल्जाम लगाया है. और कहा है कि तुमने मोहम्मद साहब के बारे में गलत बयानी की है. सार्वजानिक रूप से माफ़ी मांग लो अगर ऐसा नहीं करते हो. तो काफिर घोषित कर दिया जाएगा.
क्या लिखा है उर्दू में लिखे गए खुले ख़त में
आपने एक तकरीर में जो सोशल मीडिया पर मैं ने भी देखी है, कहा है कि जब नबी पर वही (अल्लाह के मैसेज) आना बंद हो हुई, तो मुहम्मद (स.) साहब ने अपने आपको पागल समझा. खां साहब! काफ़िर ने हज़रत नबी अकरम को मजनू कहा था, तो अल्लाह ने फ़रमाया आप अपने रब के फजल से मजनू नहीं हैं. खां साहब! आप नबी पाक की खुले तौर पर तौहीन कर रहे हैं यानी आपने कुफरिया बातें कहीं हैं. आप अपने जुर्म का मीडिया पर एतराफ करके अल्लाह और रसूल अकरम से और मुसलमानों से एलानिया माफ़ी मांगिए. खुदा न करे आप अपनी जिद पर अड़े तो फिर उल्लेमा-ए-दीन पर लाजिम है कि आपको काफिर और गुस्ताख-ए-रसूल घोषित कर दिया जाए. खां साहब आपने पहले भी और कई सियासतदानों ने दीनी तालीम न होने की वजह से दिल दुखाने वाली बातें की हैं. मैं इसरार करूंगा कि सभी नेताओं, फ़ौज और अफसरान के लिए इस्लामी जानकारी हासिल करना जरूरी कर दिया जाए. पीर मोहम्मद अफज़ल कादरी
डेली पाकिस्तान से बातचीत में पीर कादरी ने कहा कि अगर लीडर इमरान खान सबके सामने माफ़ी नहीं मांगते हैं तो फिर आर्गेनाईजेशन को धर्म के खिलाफ गलत बयानी करने को लेकर 'वाजिब-उल-क़त्ल' का फतवा देना पड़ेगा. इतने पर ही कादरी नहीं ठहरे. कहा, 'अगर स्टेट इमरान खान के खिलाफ सख्त एक्शन लेने में नाकामयाब होता है तो फिर कोई भी आशिक-ए-रसूल (मोहम्मद साहब को चाहने वाला) उनको क़त्ल कर देगा. और ये कोई गुनाह नहीं होगा. इमरान खान ने अपनी एक स्पीच में कहा था, 'जब बुरा वक्त आता है. कई बार मुश्किल वक्त आए हैं. तो कुरान की एक आयत जो मैं हमेशा मुश्किल वक्त में याद करता हूं. मैं समझता हूं आप लोग भी उस आयत को ज़रूर याद रखें. वो बड़ी इम्पोर्टेंट आयत है. क्योंकि जब मोहम्मद (स.) साहब को कई महीने 'वही' (अल्लाह का मैसेज) नहीं आई, तो वो ये समझने लगे शायद ये मैं इमेजिन तो नहीं कर रहा था.
सोचा कहीं मैं पागल तो नहीं हो रहा था. फिर उन्होंने सोचा अल्लाह थे तो शायद वो मुझे भूल गए हैं. तो देर के बाद जो आयत आई वो बहुत इम्पोर्टेंट थी. तो अल्लाह ने अपने हबीब मोहम्मद साहब से कहा, याद करो जब तुम यतीम थे तो तुम्हें किसने खाना दिया. जब तुम गुम थे तो तुम्हें किसने रास्ता दिखाया.' यानी अल्लाह ने उन्हें माजी याद दिलाया कि माजी में किसी ने तुम्हारी मदद की थी वो तुम्हारी फिर मदद करेगा.' https://www.youtube.com/watch?v=Bv0eOogWoNI इमरान खान का ये बयान सुनकर आप को खुद अंदाज़ा हो गया होगा कि इमरान खान का ये सब कहने का मकसद क्या था. मगर मौलवी साहब इतने पिनके हुए होते हैं. कि उन्हें खाज के लिए कुछ चाहिए. अगर इमरान को जानकारी नहीं थी कि मोहम्मद साहब ने ऐसा सोचा था या नहीं तो उनको बताया जा सकता था कि इमरान साहब आप जो ऐसा बोल रहे हैं ऐसा नहीं था. मगर ऐसा कर देंगे तो दुकानें कैसे चलेंगी. खौफ कैसे बनाया जाएगा. कभी तो कुछ समझदारी से कर लिया करो.