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सरकार ने कहा, कोरोना से गई 974 हेल्थ वर्कर्स की जान, पहले संख्या 1600 बताई थी

सरकार के पास कोविड के दौरान जान गंवाने वाले हेल्थकेयर वर्कर्स का सही डेटा ही नहीं है.

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IMA के मुताबिक कोविड के दौरान 1800 डॉक्टरों की मौत हो चुकी है. (फाइल फोटो- पीटीआई)

देश में कोविड-19 महामारी (Covid-19) को ढाई साल से ज्यादा हो चुके हैं. सरकारी आंकड़ों की मानें तो देश में इस महामारी से सवा पांच लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. इस महामारी के दौरान सैकड़ों हेल्थकेयर वर्कर्स की भी जानें गईं, जो लगातार अस्पताल में काम करते रहे. हालांकि, कोविड के दौरान कितने हेल्थ वर्कर्स की मौत हुई, इसे लेकर केंद्र सरकार के आंकड़े ही विरोधाभासी नजर आते हैं.

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974 हेल्थकेयर वर्कर्स की मौत?

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने हाल में बताया कि अब तक 974 हेल्थकेयर वर्कर्स के परिवार को 487 करोड़ रुपये मुआवजे के तौर पर दिए गए. केंद्र सरकार ने मार्च 2020 में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज (PMGKP) योजना की शुरुआत की थी. कहा गया कि कोविड के दौरान जान गंवाने वाले हेल्थकेयर वर्कर्स को 50 लाख रुपये की मुआवजा राशि दी जाएगी. ये योजना देश के 22 लाख से ज्यादा हेल्थकेयर वर्कर्स के लिए शुरू हुई थी, जिनमें कम्युनिटी हेल्थ वर्कर्स और प्राइवेट हेल्थ वर्कर्स भी शामिल थे. 

केरल के एक RTI कार्यकर्ता केवी बाबू ने सूचना का अधिकार (RTI) कानून के तहत इसी पर न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी से जानकारी मांगी थी. कंपनी ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के हवाले से सूचना उपलब्ध कराई.

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अंग्रेजी अखबार 'द हिन्दू' की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने 9 सितंबर को बताया कि जिन्हें मुआवजा दिया गया, उनमें 206 डॉक्टर्स थे. उनके परिवारवालों को 103 करोड़ रुपये दिए गए. वहीं नर्स, कम्युनिटी वर्कर्स और दूसरे स्टाफ सहित जान गंवाने वाले स्वास्थ्यकर्मियों की संख्या 768 है, जिनके परिवार को 384 करोड़ रुपये दिए गए. ये आंकड़े एक सितंबर तक के हैं. अखबार की रिपोर्ट बताती है कि मंत्रालय ने 2 अगस्त को एक दूसरी RTI के जवाब में कहा था कि PMGKP योजना के तहत 445 डॉक्टर्स के परिवार को 222.5 करोड़ रुपये दिए गए.

सरकार के आंकड़े विरोधाभासी

अब संसद में सरकार के दिए गए जवाब पर आते हैं. मार्च 2020 से डॉक्टरों और हेल्थकेयर वर्कर्स की मौत के राज्यवार आंकड़े क्या हैं? 26 जुलाई को इस सवाल के जवाब में स्वास्थ्य राज्य मंत्री भारती प्रवीण पवार ने राज्यसभा में कहा था कि कोविड-19 के कारण हुई मौत के आंकड़ों को केंद्र के स्तर पर तैयार नहीं किया जाता है. चाहे वो प्रोफेशनली हों या दूसरे आंकड़े हों.

वहीं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने इसी साल 8 फरवरी को बताया था कि PMGKP योजना के तहत 1616 हेल्थ वर्कर्स के परिवार को मुआवजा राशि दी गई. इनमें डॉक्टर्स भी शामिल हैं. मांडविया ने उस वक्त बताया था कि कुल 808 करोड़ रुपये उनके परिवारवालों को दिए गए. केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा था कि 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश में सिर्फ 6 राज्य ही हेल्थ वर्कर्स की मौत को लेकर अलग आंकड़े रख रहे हैं. इनमें महाराष्ट्र, गुजरात, सिक्किम, चंडीगढ़, अरुणाचल प्रदेश और त्रिपुरा शामिल हैं. स्वास्थ्य मंत्री ने कहा था कि स्वास्थ्य राज्य का विषय है. भारत सरकार राज्यों द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों को रखती है.

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IMA का डेटा अलग

RTI से जवाब मांगने वाले केवी बाबू आंखों के डॉक्टर भी हैं. कन्नूर के रहने वाले डॉ बाबू ने अखबार को बताया, 

"ये साफ है कि सरकार के पास ना तो डॉक्टरों की मौत को लेकर कोई सही जानकारी है और ना ही बीमा योजना से लाभ लेने वाले लोगों की संख्या के बारे में पता है. यह बहुत बड़ी गड़बड़ी है."  

दूसरी ओर, देश में डॉक्टरों की सबसे बड़ी संस्था इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के द्वारा इकट्ठा किए गए आंकड़ों को माने तो कोविड के दौरान करीब 1800 डॉक्टरों की मौत हुई. इनमें सरकारी और प्राइवेट, दोनों तरह के डॉक्टर्स शामिल हैं. IMA के मुताबिक, कोविड की पहली लहर के दौरान 757, दूसरी लहर के दौरान 839 और बाकी डॉक्टर्स की बाद में मौत हुई.

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