अमेरिका ने ईरान के साउथ में स्थित तटीय इलाकों में बमबारी की है. अमेरिका ने यहां स्थित IRGC के मिसाइल ठिकानों पर बंकर बस्टर बम गिराए हैं. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से लगे ठिकानों पर बम गिराए हैं. ये वो गुप्त ठिकाने थे, जहां से ईरान लगातार हमले कर रहा है. अरब देशों पर हो रहे अधिकतर मिसाइल और ड्रोन हमलों में इन्हीं ठिकानों का इस्तेमाल किया जा रहा है.
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US ने बताया कि उन्होंने Iran की एंटी-शिप क्रूज मिसाइल्स वाली साइट्स पर हमले किए हैं. CENTCOM के मुताबिक इन साइट्स से Strait of Hormuz में आने-जाने वाले जहाजों को खतरा था. ये हमला ऐसे समय में हुआ है, जब अमेरिका के अधिकतर NATO सहयोगियों ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अपने जंगी जहाज भेजने से मना कर दिया है.
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इस मामले पर बयान जारी करते हुए अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा,
'अमेरिकी सेना ने होर्मुज स्ट्रेट के पास समुद्र तट पर स्थित, ईरान की मिसाइल साइटों पर 5,000 पाउंड के गहराई में मार करने वाले कई बमों का सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया है.'

अमेरिकी सेना ने बताया कि उन्होंने ईरान की एंटी-शिप क्रूज मिसाइल्स वाली साइट्स पर हमले किए हैं. CENTCOM के मुताबिक इन साइट्स से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में आने-जाने वाले जहाजों को खतरा था. गौर करने वाली बात है कि ये हमला ऐसे समय में हुआ है, जब अमेरिका के अधिकतर NATO सहयोगियों ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अपने जंगी जहाज भेजने से मना कर दिया है. अमेरिका ने उनसे कहा था कि वो अपने जंगी जहाज भेजकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से निकलने वाले जहाजों को एस्कॉर्ट करें.
बंकर बस्टर की जरूरत क्यों?कई बार दुश्मन ऐसे अड्डे बनाता है जिनपर भारी बमबारी का कोई असर नहीं होता. ये अड्डे जमीन के काफी नीचे बने बंकर में होते हैं. ऐसे ठिकानों पर हमला करने के लिए बंकर बस्टर बम का इस्तेमाल किया जाता है. अमेरिका ने 2005 में पहली बार ये बम इजरायल को दिए थे. इनकी खासियत होती है इनके फटने की टाइमिंग. आमतौर पर फाइटर या बॉम्बर जहाज से गिरने के बाद बम जमीन पर टकराते ही फट जाते हैं. पर बंकर बस्टर बम जमीन के नीचे मौजूद अपने टारगेट तक पहुंचने के बाद फटते हैं.
'बंकर बस्टर बम' को ग्राउंड पेनेट्रेटिंग, माने जमीन भेदने वाला बम कहा जाता है. इस बम की ताकत इतनी अधिक होती है कि ये कंक्रीट के बने मजबूत बंकर्स को भी भेद सकता है. बंकर बस्टर बम लगभग 30 मीटर की गहराई तक जमीन में जा सकते हैं. वहीं ये 6 मीटर की मजबूत कंक्रीट को भी भेद सकते हैं. जमीन के नीचे जाने के बाद इनमें धमाका होता है जिससे टारगेट को अधिक से अधिक नुकसान पहुंचाया जा सकता है. आमतौर पर ये बम 2 हजार से 4 हजार पाउंड के बीच होते हैं. इनमें एक खास तरह का उपकरण लगा होता है जिसे 'डिलेड फ्यूज' (Delayed Fuse) कहा जाता है. Delayed Fuse के कारण ही ये बम अपने टारगेट तक पहुंचने के बाद फटते हैं.
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