'जिन एग और स्पर्म के मेल से ये बच्चा पैदा हुआ है, वो दलजिंदर और उनके पति के हो ही नहीं सकते. दलजिंदर को 20 साल पहले मीनोपॉज हो गया था. ये नामुमकिन है कि मीनोपॉज के बाद भी उनके शरीर में एग्स बन रहे हों. और 79 की उम्र के पुरुष का स्पर्म इतना स्ट्रॉन्ग नहीं होता कि बच्चा कर सके. ऐसी खबरों से लोगों में गलत मैसेज पहुंचता है. उन्हें झूठी उम्मीद मिलती है कि वो किसी भी उम्र में बच्चा कर सकते हैं. हम इसका विरोध करते हैं.'डॉक्टर्स कहते हैं कि उम्र के साथ औरतों के शरीर कमजोर पड़ जाते हैं. अगर ज्यादा उम्र में प्रेगनेंसी हो भी गई, तो मुमकिन है कि मां के शरीर की बीमारियां और कमियां बच्चे में आ जाएंगी. जिनमें कमज़ोर दिल और कमज़ोर हड्डियों जैसी दिक्कतें भी आ सकती हैं. होने वाले बच्चे की भलाई के लिए जरूरी है कि ज्यादा उम्र में बच्चा न पैदा किया जाए. डॉक्टरों के मुताबिक उनका बच्चा स्वस्थ पैदा हो ये मां की नैतिक जिम्मेदारी होनी चाहिए. पढ़िए: 70 की उम्र में मां बनने वाली पहली औरत नहीं हैं दलजिंदर
72 की उम्र में बच्चा करने के दावे पर डॉक्टरों ने उठाए सवाल
कहा, इस उम्र में मां बनना गैरजिम्मेदाराना हरकत है.
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फोटो - thelallantop
पिछले दो दिनों में अचानक पॉपुलर हुईं 72 साल की दलजिंदर कौर. बताया गया कि ये पहला बच्चा करने वाली देश की सबसे ज्यादा उम्र की औरत हैं. उनके पति 79 की उम्र में पहली बार पिता बने. और ये सब मुमकिन हो पाया IVF यानी इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन की वजह से. जाहिर सी बात है, मीडिया ने दलजिंदर कौर को घेर लिया. और करें भी क्यों न, 72 की उम्र में बच्चा पैदा करना अपने आप में एक नायाब बात थी. लेकिन कुछ डॉक्टरों ने इस पर सवाल उठाए हैं. टाइम्स ऑफ़ इंडिया की खबर के मुताबिक इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन, यानी औरत के शरीर के बाहर एग और स्पर्म का मेल कराने के कुछ नियम होते हैं. ये नियम इंडियन काउंसिल ऑफ़ मेडिकल रजिस्ट्री जारी करती है. नियम के मुताबिक इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन करवा रहे औरत और मर्द की कुल उम्र 100 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. जबकि दलजिंदर और उनके पति की कुल उम्र 150 साल है. टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने इस विषय पर कुछ डॉक्टरों से बात की. कर्नाटक की डॉक्टर और असिस्टेड रिप्रोडक्शन सोसाइटी की प्रेसिडेंट बीना वासन का कहना है:
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