राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ के खिलाफ विपक्ष की तरफ से दिए गए अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion against Jagdeep Dhankhar) के नोटिस को खारिज कर दिया गया है. राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश (Harivansh) ने विपक्ष के इस नोटिस को खारिज करते हुए इसे तथ्यों से परे बताया. बता दें कि विपक्षी दलों ने 10 दिसंबर को जगदीप धनखड़ को पद से हटाए जाने की मांग की थी. जिसे लेकर उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव पेश करने के लिए अनुच्छेद 67-B के तहत नोटिस दिया था.
नाम की स्पेलिंग गलत, एड्रेस का अता-पता नहीं! जगदीप धनखड़ के खिलाफ ऐसे गिरा अविश्वास प्रस्ताव
राज्यसभा के उपसभापति Harivansh ने अपने फैसले को राज्यसभा के महासचिव पी. सी. मोदी को सौंपा. Harivansh ने कहा कि Jagdeep Dhankhar की प्रतिष्ठा धूमिल करने के लिए जल्दबाजी में इसे तैयार किया गया है. पूरी याचिका में उपराष्ट्रपति के नाम की स्पेलिंग भी गलत है.
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आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने अपने फैसले को राज्यसभा के महासचिव पी. सी. मोदी को सौंपा. हरिवंश ने कहा कि इसे धनखड़ की प्रतिष्ठा धूमिल करने के लिए जल्दबाजी में इसे तैयार किया गया है. उन्होंने अपने फैसले में कहा कि नोटिस देश की संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा कम करने और सभापति जगदीप धनखड़ की छवि खराब करने के लिए दिया गया था.
क्यों दिया था विपक्ष ने नोटिस?10 दिसंबर को विपक्ष ने जगदीप धनखड़ पर सदन में कार्यवाही के दौरान पक्षपातपूर्ण बर्ताव करने का आरोप लगाया था. इसलिए विपक्ष की तरफ से जगदीप धनखड़ को पद से हटाने के अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया गया था. इस नोटिस पर विपक्ष की तरफ से 60 सांसदों ने हस्ताक्षर भी किए थे. संविधान के आर्टिकल 67 B के तहत कम से कम 50 सदस्यों के साइन से राज्यसभा में अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है.
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क्यों किया नोटिस खारिज?राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने नोटिस खारिज करते हुए कहा कि इसमें कई खामियां थीं. पूरी याचिका में उपराष्ट्रपति के नाम की स्पेलिंग भी गलत है. नोटिस को लापरवाह ढंग से तैयार किया गया है. इसमें कई तरह की गलतियां हैं. जैसे, नोटिस जिसे लिखा गया है, उसके नाम तक का उल्लेख नहीं है. ना ही इसके साथ संबंधित दस्तावेज संलग्न है.
उपसभापति ने कहा कि यह नोटिस उचित फॉर्मेट में भी नहीं है. संविधान के अनुच्छेद 90(C) के प्रावधानों के मुताबिक कोई भी प्रस्ताव लाने के लिए 14 दिन पहले नोटिस देना होता है. लेकिन संसद की कार्यवाही 20 दिसंबर को समाप्त हो रही है. ऐसे में नेता प्रतिपक्ष और अन्य सांसदों की ओर से दिया गया नोटिस स्वीकार्य नहीं है.
बता दें कि अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए कम से कम 14 दिन पहले नोटिस दिया जाना जरूरी होता है, जबकि संसद का शीतकालीन सत्र 20 दिसंबर को समाप्त हो रहा है.
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