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'डियर अमानतुल्ला, मोदी सरकार हरामखोर नहीं है'

AAP के विधायक लाल किले के मुशायरे में सरकार को गरिया आए, हमें अच्छा नहीं लगा और हम भक्त भी नहीं हैं.

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Source- Facebook
"मैं कुछ कहने आया हूं. जिस तरह से ये हरामखोर मोदी सरकार. जिस तरह से इन लोगों ने दहशतगर्दी के नाम पर अब्दुल समी क़ासमी को गिरफ्तार किया. आप लोग अगर ये तय कर लें तो दिल्ली में बहुत तादाद है मुसलमानों की. आप लोग तय कर लें कि होम मिनिस्टर के घर को घेरना है. इनकी हिम्मत नहीं है कि आपके किसी एक बच्चे की तरफ आंख उठाकर देख ले."
आम आदमी पार्टी के नेता हैं. अमानतुल्ला खान. ओखला से विधायक. नेताओं का लेखा-जोखा देने वाली वेबसाइट कहती है. दो करोड़ तिहत्तर हजार तीन सौ सोलह रुपये की जायदाद, बारहवीं तक की पढ़ाई और IPC की चार धाराओं वाला एक क्रिमिनल केस इनके हिस्से है. 16 फरवरी को लाल किले में मुशायरा चल रहा था. अमानतुल्ला मंच पर आए. और मोदी सरकार को हरामखोर कह डाला. ये अमानतुल्ला ने नहीं कहा था. ये आम आदमी पार्टी के विधायक ने कहा था. एक क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं. मुशायरे में आए थे. मुशायरे उर्दू में होते हैं न? उर्दू के साथ तमीज़ और तहज़ीब जैसा कुछ जुड़ा होता है न? उर्दू के मंच से ये कैसी बेअदबी थी? https://youtu.be/K23faeMnc3c मुशायरे में बोल रहे थे. आम आदमी से अचानक मुसलमान हो गए. सामने भीड़ भी अच्छी खासी थी, और जाहिर है मुसलमान ज्यादा रहे होंगे. अमानतुल्ला जो बहके तो भूल गए कि वो नेता हैं. वो भूल गए कि दुनिया उतनी ही नहीं बची है जो उनके सामने नजर आ रही है. भीड़ पीकर बहकने जैसा एक्सपीरियंस दे सकती है.
2 दिसंबर, 2014 को मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने एक बयान दिया था. रामजादे और हरामजादे वाला. फिर उन्हें माफी मांगनी पड़ी. प्रधानमंत्री को राज्यसभा में कहना पड़ा, नई मंत्री हैं. गलती हो गई. बात यहीं थोड़े खत्म हो गई थी. यहां तक आ पहुंची कि जेल जाते-जाते बचीं. बेशक घटिया बयान था. उतना ही जितना अमानतुल्ला का ये बयान.
याद कीजिए आम आदमी पार्टी ने 'हरामजादे' के वक़्त क्या स्टैंड लिया था. क्या मनीष सिसोदिया ने ये नहीं कहा था कि भाजपा माहौल बिगाड़ना चाहती है? भाजपा के मंत्रियों के ऐसे बयान बांटने वाले हैं. क्या अमानतुल्ला का बयान उससे कुछ अलग है? ये उतना ही गलत था जितना ओपी शर्मा का भरी सदन में अमानतुल्ला को आतंकवादी कह देना. अमानतुल्ला बात किसकी कर रहे थे? 
मौलाना अब्दुस समी कासिम की. एटीएस और एनआईए ने अब्दुल को हरदोई के संडीला से पकड़ा. समी पर आरोप है. वो अपनी तक़रीर में बगदादी को शेर कहते थे. यूथ को ISIS से जुड़ने के लिए उकसाते थे. 22 जनवरी को  ISIS के जो संदिग्ध पकडे गए उनने समी का नाम लिया था. एटीएस के एडीजी दलजीत सिंह चौधरी के बताए अनुसार वो एनआईए की रिमांड में हैं. उससे जो फैक्ट मिल रहे हैं. उसकी जांच-पड़ताल होगी.  
मोदी सरकार या भाजपा से आपके मतभेद हो सकते हैं. पर आप यूं मंच से हरामखोर नहीं कह सकते. अमानतुल्ला पॉलिटिकल आदमी हैं. जहां पर हैं वहां से ज्यादा बुराईयां नजर आती होंगी. आम आदमी पार्टी और भाजपा की सगे पड़ोसियों सी बनती है. एक-दूसरे को मौक़ा ताड़ कर कोसते हैं. कोसना भी चाहिए. लेकिन हरामखोर नहीं कहना चाहिए. एक सवाल और है. सर जी आप हरामखोर का मतलब जानते हैं? किसी भाषाविज्ञानी से नहीं तो ओखला के किसी टपरे पर खड़े चार लोगों से पूछ लीजिए. पता चल जाएगा. और अभी तो एनआईए जांच कर रही है. ये जांच में सामने आएगा कि समी के टेररिस्ट कनेक्शन थे या नहीं. लेकिन अमानतुल्ला कैसे लोगों को इस बात के लिए भड़का सकते हैं कि गृहमंत्री के घर का घेराव करे. अभी जांच तो होनें दे, कुछ चीजें सामने आएं. बेगुनाह होंगे तो खुद ही छूट जाएंगे. मुद्दा तो ये था कि एक वर्ग विशेष को जबरिया टारगेट किया जा रहा है, लेकिन इस मुद्दे पर आप कुछ करना ही चाहते हैं तो गंभीरता से कहिए ना.  उन्हें समझ नहीं आता कि वो एक ऐसे आदमी की गिरफ्तारी के खिलाफ लोगों को इकठ्ठा होने के लिए कह रहे हैं, जिस पर आतंकवाद के आरोप लगे हैं. उनके पास सबूत भी क्या हैं. समी की बीवी से उनने बात की. समी की बीवी को तो खुद पता नहीं वो अपनी तकरीर में कहां क्या बोलता था. [facebook_embedded_post href="https://www.facebook.com/229774440515150/videos/575586719267252"]
कौन हैं अमानतुल्ला छोटे से शुरू करें. 6 महीने बच्चों की स्कूल फीस न दी. वजह बताई सैलरी ही बहुत कम है. लोग कहते हैं ये विधायकों की सैलरी हाइक कराने का बहाना था.
ये वही अमानतुल्ला हैं. जिन्होंने विहिप के अशोक सिंघल को श्रद्धांजलि देने से मनाकर दिया था क्योंकि अमानतुल्ला के हिसाब से वो आतंकी थे. इसके बाद दिल्ली विधानसभा में बड़ा बवाल हुआ था. 
जुलाई 2014 में आम आदमी पार्टी के मनीष सिसोदिया और आशुतोष समेत कई बड़े नेता एक केस में धरे गए थे. क्यों? कांग्रेस के आसिफ मोहम्मद और दो और नेताओं के खिलाफ पोस्टर लगे थे. आम आदमी पार्टी की तरफ से. पोस्टर्स में जो लिखा था उसका ये मतलब था कि ये मुस्लिमों के नाम पर धब्बा हैं, बीजेपी-आरएसएस को सपोर्ट कर रहे हैं. ये पोस्टर अमानतुल्ला ने लगाए थे. 2015 में जब आम आदमी पार्टी की सरकार बनीं तब अमानतुल्ला ओखला से विधायक बन चुके थे. पार्टी ने उन्हें टिकट दिया था. राजनीति में उनकी शुरुआत ही इतनी विवादास्पद थी. यहां सब गलत है. जिस मंच से वो बोल रहे हैं, वहां मुशायरा हो रहा था. किस मुशायरे में गालियां स्वीकारी जाती हैं? गलत वो भी हैं जो अमानतुल्ला की बात से चौंककर फिर खिलखिलाने लगते हैं. वो भी जो नीचे बैठे आंखे बचाकर मोबाइल स्क्रॉल कर रहे होते हैं. वो तमाम लोग जो गालियां सुनते ही उनसे माइक न छुडा लेते हैं.

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