ज्ञानवापी मामले में अब बौद्ध पक्ष की एंट्री हुई है. बुधवार, 3 अगस्त को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ASI को ज्ञानवापी परिसर में सर्वे करने की मंजूरी दी. इसी दिन ने एक बौद्ध धर्म गुरु ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की. इसमें दावा किया गया है कि ज्ञानवापी ना तो मस्जिद है, ना ही मंदिर है, वह बौद्ध मठ है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक सुमित रतन भंते ने सुप्रीम कोर्ट में ये दावा किया है. इसको लेकर सर्वे कराने की मांग भी की गई है.
ज्ञानवापी 'ना मस्जिद ना मंदिर', बौद्ध धर्म गुरू का सुप्रीम कोर्ट में एक और बड़ा दावा
सुमित रतन भंते ने बद्रीनाथ, केदारनाथ सहित अन्य मंदिरों को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने की बात कही है.
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सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में आगे कहा गया है कि देश में तमाम ऐसे मंदिर हैं जो बौद्ध मठों को तोड़कर बनाए गए हैं. भंते ने याचिका में आगे कहा कि ज्ञानवापी में पाए गए त्रिशूल और स्वास्तिक जैसे चिह्न बौद्ध धर्म के हैं. इतना ही नहीं, याचिका में कहा गया कि केदारनाथ या ज्ञानवापी में जिसे ‘ज्योतिर्लिंग’ बताया जा रहा है, वह बौद्ध धर्म के 'स्तूप' हैं.
सुमित रतन भंते ने बताया कि सभी मंदिरों और मस्जिदों को उनके मूल स्वरूप में आना चाहिए. जहां-जहां बौद्ध मठ थे उनका स्वरूप बदल दिया गया है. उन्होंने कहा कि बौद्ध मठों को अपने मूल स्वरूप में आना चाहिए. बकौल भंते बौद्ध धर्म के मानने वाले लोग भी यही चाहते हैं.
भंते ने आगे कहा कि वो बद्रीनाथ, केदारनाथ सहित अन्य मंदिरों को लेकर भी याचिका दायर करेंगे. उन्होंने कहा,
"अगर ASI ने सही से सर्वे किया तो वहां बौद्ध मठ ही पाया जाएगा. और अगर पाया जाए तो हमें ज्ञानवापी सौंप दिया जाए… इस्लाम 1500 साल पहले आया और हिंदू धर्म 1200 साल पहले. बौद्ध धर्म ढाई हजार साल पहले का है."
याचिका में आगे कहा गया है कि देश में आपसी फूट की जो परंपरा शुरू हुई है वह उचित नहीं है. बौद्ध मठों का भी सर्वेक्षण करके उन्हें बौद्ध समाज को वापस करना चाहिए. अगर सही फैसला होता तो वहां पर बौद्ध मठ होता.
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 3 अगस्त को ज्ञानवापी परिसर के ASI सर्वे को मंजूरी दे दी है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कोर्ट की तरफ से कहा गया है कि ये ‘न्याय के हित के लिए जरूरी’ है. हाई कोर्ट ने अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी की अपील खारिज कर दी है. मामले को लेकर वकील विष्णु जैन ने मीडिया से बात करते हुए कहा,
“कोर्ट ने कहा है कि ASI का सर्वे शुरू होना चाहिए, इससे किसी को नुकसान नहीं है. जिला अदालत का फैसला तत्काल प्रभाव से लागू होना चाहिए. हमारी पूरी दलीलों को कोर्ट ने मान लिया है. मुझे लगता है सर्वे शुरू होना चाहिए. जो भी बात है सच या झूठ, कोर्ट के सामने आनी चाहिए.”
इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या का बयान सामने आया. उन्होंने ANI से बात करते हुए कहा कि वो इस फैसले का स्वागत करते हैं. उन्हें भरोसा है कि ASI सर्वे के बाद सच्चाई सामने आ जाएगी. जिसके बाद ज्ञानवापी का मामला सुलझ जाएगा.
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