गोबर को गरीब आदमी कई तरह से काम में लेता है. वो गोबर से कंडे बनाता है, जिससे खाना पकाने में मदद मिलती है. गांवों में गोबर से जमीन भी लीपी जाती है, गेरू मिलाकर. एकदम सुर्ख लाल रंग. दिवाली के बाद गोबर, गोवर्धन पूजा में भी काम आता है. यानी आस्था से भी जुड़ा है. लेकिन गुजरात की एक अदालत (Gujarat court) ने अब गोबर का एक और फायदा गिना डाला है! एटॉमिक रेडिएशन से बचाने वाला.
गाय के गोबर से घर पर एटॉमिक रेडिएशन का असर नहीं होता- गुजरात की कोर्ट ने कहा
"गौ हत्याएं रोक दी जाएं तो धरती की सारी समस्याएं अपने आप ही खत्म हो जाएंगी."


दरअसल, गुजरात के तापी जिले की अदालत ने मुख्य जिला जज ने ये बात कही है. गौ हत्या पर टिप्पणी करते हुए अदालत ने ये बात सामने रखी. लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक अदालत ने कहा कि अगर गौ हत्याएं रोक दी जाएं तो धरती की सारी समस्याएं अपने आप ही सुलझ जाएंगी.
जज समीर विनोदचंद्रा व्यास ने अपनी बात कहते हुए गाय के गोबर के गुण गिनाए. उन्होंने कहा,
"गाय के गोबर के इस्तेमाल से घरों में एटॉमिक रेडिएशन का भी असर नहीं होता है."
एटॉमिक रेडिएशन जो मानव शरीर के लिए हानिकारक होती हैं. उदाहरण के तौर पर कहें तो एक्स-रे (X-ray) या गामा रे (Gamma Ray). यही नहीं, अदालत ने ये भी कहा,
“गौमूत्र बहुत सी लाइलाज बीमारियों के इलाज में कारगर साबित होता है.”
लेकिन, यहां पर एक जरूरी बात. इन दावों को कोई भी साइंटिफिक आधार नहीं है.
गाय को कष्ट दिया तो होगा गलत असरगुजरात की अदालत ने इन बातों के लिए विभिन्न श्लोकों का उदाहरण भी दिया. अदालत ने कहा,
“अगर किसी गाय को कष्ट दिया जाता है या दुख पहुंचाया जाता है तो इसका गलत प्रभाव इंसान की धन-संपत्ति पर पड़ता है.”
अपनी बात रखते हुए जज ने गौ हत्या को जलवायु परिवर्तन से भी जोड़ा. उन्होंने कहा कि आज विश्व में जो समस्याएं हैं, वो बढ़ते चिड़चिड़ेपन और गर्म स्वभाव के कारण हैं. ऐसी समस्याओं के बढ़ने का सबसे बड़ा कारण गायों की हत्या भी है. उन्होंने ये भी कहा कि जब तक इस पर पूरी तरह से रोक नहीं लगाई जाती है, तब तक जलवायु परिवर्तन को रोकने में हम कामयाब नहीं हो सकते हैं.
वीडियो: डेवेन जॉनसन को गाय की फ़ोटो पर टैग किया, जवाब पूरी दुनिया देखती रह गई






















