पीएम मोदी और इतालवी प्रधानमंत्री मारियो द्रागी (दाएं). बाईं तस्वीर प्रतीकात्मक है. (साभार- इंडिया टुडे और पीटीआई)
केंद्र सरकार ने इटली की लियोनार्डो एसपीए (Leonardo SpA) कंपनी पर लगा बैन हटा लिया है. इस कंपनी का अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले से संबंध है. दरअसल अगस्ता वेस्टलैंड, लियोनार्डो एसपीए की ही एक सहायक कंपनी है, जो हथियारों और रक्षा क्षेत्र से जुड़े अन्य उत्पादों की मैन्युफैक्चरिंग करती है. पहले इसका नाम फिनमकैनिका था. 2012-13 में वीवीआईपी हेलीकॉपटर घोटाले के सामने आने के बाद भारत सरकार ने लियोनार्डो एसपीए से होने वाली तमाम खरीद-फरोख्त पर बैन लगा दिया था. लेकिन अब इसे कुछ शर्तों के साथ हटा दिया गया है.
क्या शर्तें हैं?
अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्स्प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक लियोनार्डो एसपीए में इटालियन सरकार की 30 प्रतिशत हिस्सेदारी है. हाल ही में कंपनी ने भारत सरकार से बैन हटाने की अपील की थी. अब रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने बैन हटाए जाने की पुष्टि की है. इस अधिकारी ने बताया,
"सरकार ने कुछ शर्तों के तहत कंपनी पर से बैन हटाया है. कंपनी को ये शर्ते माननी ही होंगी. इनमें सबसे मुख्य शर्त ये है कि पहले के किसी भी सौदे के लिए ये कंपनी भारत के खिलाफ किसी भी तरह का कोई दावा या केस नहीं कर सकती."
अधिकारी ने आगे ये भी कहा,
"अभी सरकार ने लियोनार्डो एसपीए और उसकी सहायक कंपनियों पर से बैन हटा लिया है, लेकिन कंपनी के खिलाफ सीबीआई और ईडी की जांच जारी रहेगी."
बैन से भारतीय सेनाएं थी चिंता में
इंडियन एक्स्प्रेस के मुताबिक लियोनार्डो एसपीए पर लगे बैन ने भारतीय सेनाओं को भी चिंता में डाल रखा था. कंपनी के दूसरे उत्पादों में सेना की दिलचस्पी है. इनमें ब्लैक शार्प हेवीवेट टॉरपीडो भी शामिल है. ये टॉरपीडो भारत में बनने वाली स्कॉर्पियन पनडुब्बियों में काम आती है. लेकिन बैन की वजह से सेना इसे नहीं खरीद पा रही थी. इसके अलावा लियोनार्डो एसपीए रडार, जंग के लिए इलेक्ट्रॉनिक सूट और कम्यूनिकेशन सिस्टम भी बनाती है. बताया जाता है कि भारतीय सेना को इन नए गैजेट्स से काफी मदद मिल सकती है.
98 टॉरपीडो मिलने थे
लियोनार्डो एसपीए और अगस्ता वेस्टलैंड पर भारत सरकार ने जुलाई 2014 में बैन लगाया था. वहीं 2016 में उसने
लियोनार्डो एसपीए के साथ सभी डीलों को तोड़ दिया. उसी दौरान एक डील के तहत कंपनी से 98 ब्लैक शार्प टॉरपीडो भारत को मिलने थे. लेकिन बैन की वजह से इनकी डिलिवरी नहीं हो पाई. तब से सरकार इन टॉरपीडो को मंगवाने के लिए दूसरे विकल्प तलाश रही है. 2019 में सरकार ने इस बैन को जारी रखा. लेकिन अब इसे हटाने का फैसला कर लिया गया है.
मोदी की इटालियन पीएम से मुलाकात के बाद हटा बैन?
हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी G20 सम्मेलन में शामिल होने के लिए रोम गए थे. वहां 29 अक्टूबर को उन्होंने इटली के प्रधानमंत्री मारियो द्रागी से मुलाकात की थी. कहा जा रहा है कि इसके बाद ही भारत सरकार ने लियोनार्डो एसपीए पर से बैन हटाने का फैसला किया है. हालांकि रक्षा मंत्रालय के अधिकारी ने इंडियन एक्स्प्रेस को बताया,
"इस बैन का हटना और दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की मुलाकात का कोई संबंध नहीं है. दोनों नेताओं ने पिछले हफ्ते ही मुलाकात की है. इस तरह के फैसलों में उच्च स्तरीय कमिटी ही फैसला करती है. यहां तक कि कानून मंत्रालय की राय भी जरूरी होती है. इसमें लंबा समय लगता है. इतने कम समय में बैन नहीं हटता."
क्या है अगस्ता वेस्टलैंड घोटाला?
2010 में अगस्ता वेस्टलैंड और तत्कालीन यूपीए-2 सरकार के बीच एक सौदा हुआ. इस सौदे के तहत 3546 करोड़ रुपये के 12 AW101 हेलीकॉप्टर वायु सेना को सौंपे जाने थे. इनमें से 8 हेलीकॉपटरों को देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, उप-राष्ट्रपति समेत कई महत्वपूर्ण नेताओं की यात्रा के लिए इस्तेमाल किया जाना था. इसीलिए इस घोटाले को वीवीआईपी चॉपर घोटाला भी कहा गया. 2012 में कंपनी पर ये आरोप लगा कि उसने डील को सिक्योर करने के लिए भारत के कई नेताओं, अधिकारियों और एयर फोर्स के अधिकारियों को 360 करोड़ रुपये की रिश्वत दी थी. अगले साल 2013 में अगस्ता वेस्टलैंड के सीईओ को इटली के जांच अधिकारियों ने गिरफ्तार कर लिया. इसके बाद इस डील में घोटाला होने का दावा किया जाने लगा. इस काम में जिन 3 बिचौलियों का नाम सामने आया, उनमें क्रिश्चियन मिशेल सबसे ज्यादा चर्चा में रहा. आरोप है कि अगस्ता वेस्टलैंड ने डील को अपने फेवर में करने के लिए क्रिश्चियन मिशेल को हायर किया था. 2018 में मिशेल को यूएई से भारत लाया गया. जांच के दौरान उसने सीबीआई पर आरोप लगाया था कि जांच एजेंसी ने मामले में गांधी परिवार का नाम लेने के लिए उस पर दबाव बनाया था. हालांकि केंद्र सरकार की जांच एजेंसी ने इस आरोप को गलत बताया था. सीबीआई अभी भी इस मामले की जांच कर रही है. उसने वायु सेना के पूर्व एयर चीफ मार्शल एसपी त्यागी के खिलाफ कई केस दायर किए हैं. एसपी त्यागी पर ये आरोप है कि उन्होंने डील से जुड़े दस्तावेजों में फेरबदल किया था ताकि इतालवी कंपनी को फायदा हो सके, और इसके लिए उन्हें कंपनी की तरफ से रिश्वत भी दी गई थी.