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ट्विटर ने लगाया बड़ा आरोप, केंद्र सरकार ने बस एक साल में 1474 अकाउंट और 175 ट्वीट डिलीट करने को कहा

ट्विटर ने कोर्ट को बताया कि सरकार किसी खास ट्वीट्स के बारे में जानकारी देने के बजाय सीधे अकाउंट को ब्लॉक करने का आदेश दे रही है.

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केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव (फोटो- पीटीआई)

पिछले साल नए आईटी नियमों के लागू होने के बाद से ही ट्विटर और भारत सरकार के बीच तकरार जारी है. हाल में ट्विटर ने भारत सरकार के कुछ आदेशों के खिलाफ कर्नाटक हाईकोर्ट का रुख किया था. ये आदेश कुछ अकाउंट्स को ब्लॉक करने और कुछ कॉन्टेंट को हटाने को लेकर थे. अब पता चला है कि भारत सरकार ने फरवरी 2021 से 2022 के बीच अकाउंट्स ब्लॉक करने के 10 आदेश दिए थे. इनमें 1474 अकाउंट और 175 ट्वीट्स को हटाने को कहा गया था. ये आदेश सूचना प्रौद्योगिकी की धारा 69(A) के तहत जारी किए गए.

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ट्विटर ने याचिका में क्या कहा?

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्विटर ने हाईकोर्ट में जो याचिका दायर की, उनमें ऐसे 39 लिंक (अकाउंट) को ब्लॉक करने के आदेश को रद्द करने की मांग की गई. ट्विटर ने कोर्ट को बताया कि सरकार किसी खास ट्वीट्स के बारे में जानकारी देने के बजाय सीधे अकाउंट को ब्लॉक करने का आदेश दे रही है. कंपनी ने कहा, 

"ऐसे आदेश लगातार बढ़ रहे हैं. कई लिंक में राजनीतिक और पत्रकारीय कॉन्टेंट होते हैं. ऐसी सूचनाओं को ब्लॉक करने से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का घोर उल्लंघन है जो ट्विटर अपने यूजर्स को उपलब्ध कराता है."

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ट्विटर ने यह भी दावा किया है कि सूचना और प्रौद्योगिकी मंत्रालय कई बार ब्लॉक करने के आदेशों में "सही कारण" नहीं बताती है. जबकि धारा 69(A) के तहत यह जरूरी है. कई आदेशों में यह नहीं बताया गया कि कॉन्टेंट धारा 69(A) का उल्लंघन कैसे करती है.

कंपनी ने अपनी याचिका में ब्लॉक करने के कुछ आदेश को 'असंवैधानिक' बताया. ट्विटर ने कहा, 

"ब्लॉक करने के आदेश को इस आधार पर चुनौती दी गई है कि उन आदेशों का धारा 69(A) के तहत कोई लेना-देना नहीं है. ऐसे आदेश साफ तौर पर मनमाना है. इनमें यूजर्स को नोटिस जारी करने जैसी बात भी नहीं कही जाती है."

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सरकार ने दिया 'आखिरी मौका'

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट बताती है कि जिन अकाउंट्स और ट्वीट्स को सरकार ने हटाने का आदेश दिया, उन सभी के बारे में ट्विटर ने विस्तार से सील बंद लिफाफे में कोर्ट को जानकारी दी है. क्योंकि धारा 69(A) के तहत आदेशों को गोपनीय रखा जाता है. कंपनी ने यह भी कहा कि नियमों के उल्लंघन करने को लेकर जून में उसे मंत्रालय से नोटिस मिला और इसका जवाब विरोध दर्ज कराते हुए दिया गया.

पिछले महीने सूचना और प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने ट्विटर को नोटिस जारी किया था. इसे धारा 69(A) के तहत ब्लॉक करने के आदेश को मानने का "एक आखिरी मौका" कहा गया. इसमें कंपनी से कोई सहयोग नहीं मिलने की बात कही गई थी. नोटिस में यह भी कहा गया था कि मंत्रालय का आदेश नहीं मानने पर ट्विटर को इंटरमीडिएरी फायदों से हाथ धोना पड़ेगा. इसके तहत ऐसे प्लेटफॉर्म्स पर यूजर्स द्वारा पोस्ट किए जाने पर कंपनियां कानूनी कार्रवाई से बच जाती हैं.

नोटिस में सरकार ने ट्विटर को नए आईटी नियमों के हिसाब से काम करने के लिए 4 जुलाई तक का वक्त दिया था. इसके बाद ही ट्विटर ने कोर्ट जाने का फैसला किया.

याचिका से यह भी पता चलता है कि फरवरी 2021 से फरवरी 2022 के बीच आदेश जारी करने के कारण सरकार और ट्विटर के बीच खूब तनातनी हुई. ट्विटर ने मंत्रालय को लिखा कि अपने आदेशों पर पुनर्विचार करे. मंत्रालय ने ट्विटर के कम्प्लांयस ऑफिसर को दो दिनों के भीतर दो बार समन भी किया.

क्या है धारा-69(A) ?

IT एक्ट, 2000 की धारा 69(A) केंद्र सरकार के पास किसी अकाउंट या पोस्ट को ब्लॉक करने या हटाने के लिए आदेश देने का अधिकार है. सरकार "भारत की अखंडता और प्रभुता, भारत की रक्षा-सुरक्षा, दूसरे मुल्कों के साथ दोस्ताना संबंधों या किसी अपराध के बाद कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के हित में" सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को यह आदेश दे सकती है. नियमों के तहत ब्लॉक करने के ऐसे आदेशों को एक रिव्यू कमिटी के पास भी भेजा जाता है, जिसके बाद अंतिम निर्देश जारी होता है.

ट्विटर के हाईकोर्ट पहुंचने के बाद सरकार ने कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया. हालांकि इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर ने 5 जुलाई को ट्विटर पर लिखा था कि सभी प्लेटफॉर्म्स को कोर्ट जाने का अधिकार है लेकिन कानून का पालन करना उनकी जिम्मेदारी है.

वीडियो: एलन मस्क ने ट्विटर के लिए क्यों कहा 'अपनी कंपनी अपने पास रखो'

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