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कर्ज चुकाने के लिए व्यापारी ने खुद की ही किडनैपिंग की साजिश रची, घरवालों से मांगी 70 लाख रुपये की फिरौती

मामला उत्तर प्रदेश के गोंडा का है. पुलिस ने गोंडा के इस व्यापारी के प्लान पर पानी फेर दिया और 36 घंटे के अंदर उसे हरिद्वार से सही-सलामत खोज निकाला.

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कारोबारी को पुलिस ने सकुशल बरामद किया (फोटो-गोंडा पुलिस)

उत्तर प्रदेश के गोंडा में फूलों के एक कारोबारी ने लाखों का कर्ज चुकाने के लिए खुद के अपहरण की कहानी रच डाली. अपने घरवालों को आवाज बदल कर गुमराह करते हुए उसने 60 लाख की फिरौती की भी मांग की. उसका प्लान था कि फिरौती में अपने परिवार से मिले पैसों से वो कर्ज चुकाकर कुछ निवेश भी करेगा. लेकिन गोंडा पुलिस ने उसके प्लान पर पानी फेर दिया. 

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अपहरण की सूचना मिलते ही गोंडा पुलिस हरकत में आ गई और कारोबारी की तलाश शुरू कर दी. पुलिस ने कारोबारी को 36 घंटे के अंदर हरिद्वार से सही-सलामत बरामद किया. पुलिस के मुताबिक पूछताछ में पता चला कि कर्ज के बोझ के चलते कारोबारी ने अपने ही अपहरण का नाटक रचा था.

गोंडा के पुलिस अधीक्षक (SP) विनीत जायसवाल ने शनिवार, 27 जुलाई को इस पूरे मामले की जानकारी दी. उन्होंने बताया,

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"25 जुलाई को थाना कर्नलगंज पुलिस को चन्द्रिका प्रसाद, जो धौरहरा के निवासी हैं, उनके द्वारा सूचना दी गई कि उनका बड़ा बेटा अर्जुन राजपूत, जो फूलों की खेती का व्यवसाय करता हैm वो 24 जुलाई की शाम को बाजार जाने की बात कहकर निकला था और घर वापस नहीं आया. उसकी तलाशी के बाद जब वो नहीं मिला तो थाने पर परिवार द्वारा सूचना दी गई. इसमें गुमशुदगी का मुकदमा दर्ज किया गया और पुलिस द्वारा उनकी (अर्जुन की) तलाशी की जाने लगी. 

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SP ने बताया कि इसी बीच गुमशुदा व्यक्ति अर्जुन राजपूत के फोन से उनके परिजनों के एक कॉल आई. इस पर अज्ञात व्यक्ति ने उन लोगों से 70 लाख रुपये की फिरौती मांगी. परिवार ने फिरौती वाली बात पुलिस को बताई. इसके बाद पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया. इस घटना की गंभीरता को देखते हुए कुल चार टीमें बनाई गईं.

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इस दौरान अर्जुन राजपूत के फ़ोन से एक दो और कॉल्स आईं. एक कॉल एक अपरिचित व्यक्ति ने पैसों की मांग के लिए की थी. और बाकी दो कॉल पर खुद अर्जुन ने घरवालों को बताया गया कि उसके साथ मारपीट हो रही है. पहले उसने गोरखपुर में होने की बात बताई. फिर किसी अज्ञात जगह पर होने की बात कही.

SP गोंडा ने आगे बताया की तमाम CCTV फुटेज और टेक्निकल और मैन्युअल साक्ष्य के तहत पुलिस ने गुमशुदा अर्जुन राजपूत को हरिद्वार से बरामद किया. अर्जुन को वापस गोंडा लाकर मेडिकल कराया गया. अर्जुन एकदम स्वस्थ हैं, जिससे ये साफ होता है कि अर्जुन के साथ कोई मारपीट नहीं हुई है. SP गोंडा ने अर्जुन राजपूत से हुई पूछताछ की जानकारी देते हुए कहा, 

"अर्जुन ने बताया कि पिछले कुछ सालों में इनके ऊपर करीब 32 लाख का कर्जा हो गया था, उससे ये लगातार तनाव में रहते थे. इसलिए इन्होंने अपने ही अपहरण का षड्यंत्र रचा. जिससे ये अपने पिता से कुछ पैसा प्राप्त करके कर्जा चुका सकें. इस तरह अर्जुन 24 जुलाई को घर से निकले और कुछ घंटो बाद फोन बंद कर दिया. इसके बाद अपनी आवाज बदल कर परिजनों को फोन कर गुमराह करने की कोशिश की. उस वक्त ये लखनऊ में थे, लेकिन घर वालों को अपनी लोकेशन गोरखपुर बताई. उसके बाद ट्रेन से ये हरिद्वार पहुंचे. वहां किसी अज्ञात व्यक्ति को 100 रुपए देकर अपने घर पर कॉल कराई. और पैसों की मांग की. इनको हमारी टीम द्वारा शुक्रवार, 26 जुलाई को हरिद्वार से सकुशल बरामद किया गया."

SP गोंडा की ओर से इस साजिश का पर्दाफाश करने वाली पुलिस टीम को 10 हजार रुपये नगद पुरस्कार भी दिया गया है. वहीं खुद की ही किडनैपिंग की साजिश रचने वाले अर्जुन के खिलाफ कार्रवाई के लिए कानूनी राय ली जा रही है.

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