ACP मनस्वी वशिष्ठ इन दिनों वकीलों से विवाद और सस्पेंशन को लेकर चर्चा में हैं. उन्होंने IIT खड़गपुर से पढ़ाई की, SSB में नौकरी, उपराष्ट्रपति रहे जगदीप धनखड़ के PSO की जिम्मेदारी और फिर दिल्ली पुलिस में ACP का पद.
IIT से पढ़ाई, SSB में जॉब, उपराष्ट्रपति के रहे PSO... कौन हैं सस्पेंड हुए ACP मनस्वी वशिष्ठ?
दिल्ली पुलिस के ACP मनस्वी वशिष्ठ इन दिनों वकीलों से विवाद और सस्पेंशन को लेकर चर्चा में हैं. उन्होंने IIT खड़गपुर से पढ़ाई की, SSB में नौकरी की, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के PSO की जिम्मेदारी संभाली और उसके बाद दिल्ली पुलिस में ACP का पद.

2 हफ्ते पहले एक वकील से विवाद हुआ. वकीलों ने उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की. फिर उनका ट्रांसफर हुआ. इसके विरोध में दिल्ली पुलिस के करीब 100 जवान अपने ही पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन करने पहुंच गए. इस प्रदर्शन को मनस्वी वशिष्ठ ने लीड किया. अगले ही दिन गृह मंत्रालय ने उन्हें सस्पेंड कर दिया.
तो इस वीडियो में जानेंगे कि आखिर ACP मनस्वी वशिष्ठ कौन हैं? उनका करियर कैसा रहा है? शाहदरा थाने का विवाद क्या था और मामला उनके सस्पेंशन तक कैसे पहुंचा?
मनस्वी वशिष्ठ राजस्थान की राजधानी जयपुर के रहने वाले हैं. उनका परिवार डॉक्टरों का है. उन्होंने 2009 से 2013 के बीच IIT खड़गपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. साल 2016 में वो सशस्त्र सीमा बल यानी SSB में शामिल हुए. यहां करीब चार साल तक उनकी तैनाती जम्मू-कश्मीर और बिहार में रही.
इसके बाद वह DANIPS में शामिल हुए. DANIPS यानी दिल्ली, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, दादरा और नगर हवेली, दमन-दीव पुलिस सेवा है. वो 2019 बैच के DANIPS अधिकारी हैं.
अप्रैल 2025 से जुलाई 2025 तक उन्होंने तत्कालीन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर यानी PSO के तौर पर काम किया. धनखड़ ने जुलाई 2025 में उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद वशिष्ठ दिल्ली पुलिस की सिक्योरिटी यूनिट में तैनात हुए. इस दौरान AI समिट और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के समय सुरक्षा व्यवस्था में उनकी भूमिका रही.
दिसंबर 2025 में उन्हें असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस यानी ACP, गांधी नगर के पद पर तैनात किया गया. इस पद पर उन्होंने करीब तीन महीने तक काम किया. फिर मार्च 2026 में वो एक बार फिर इसी पद पर तैनात हुए.
गृह मंत्रालय ने उन्हें सस्पेंड किया3 नवंबर को गृह मंत्रालय ने उन्हें सस्पेंड कर दिया है. सस्पेंशन के तुरंत बाद वशिष्ठ ने कहा, "मैं आहत नहीं हुआ हूं, मजबूत हो गया हूं. देश का कानून अपना काम करेगा और न्याय की जीत होगी."
वहीं, गृह मंत्रालय ने सस्पेंशन की वजह के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है. मंत्रालय के मुताबिक, सस्पेंशन के दौरान मनसवी वशिष्ठ का मुख्यालय दिल्ली में रहेगा. वह किसी सीनियर अधिकारी की अनुमति के बिना दिल्ली से बाहर नहीं जा सकेंगे. इस दौरान उन्हें गुजारा भत्ता यानी सब्सिस्टेंस अलाउंस मिलेगा. यह रकम उनके आधे वेतन के हिसाब से तय होगी. इसके अलावा उन्हें नियमानुसार महंगाई भत्ता भी दिया जाएगा.
हालांकि, ये भत्ता पाने के लिए उन्हें एक प्रमाण पत्र देना होगा. इसमें उन्हें बताना होगा कि सस्पेंशन के दौरान वह कोई ऐसा काम या कारोबार नहीं कर रहे हैं, जिससे उन्हें कमाई हो रही हो.
अब बात करते हैं इस विवाद के बैकग्राउंड की.
इस पूरे विवाद की शुरुआत 23 अक्टूबर को दिल्ली के शाहदरा पुलिस स्टेशन से हुई. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, इस दिन दिल्ली के शाहदरा थाने के इलाके में सैलून के बाहर बाइक खड़ी करने को लेकर विवाद हुआ. इसमें वकील ललित बंसल के सिर में गंभीर चोट लगी. इसके बाद वकीलों ने आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की. उनका आरोप था कि ACP मनस्वी वशिष्ठ और SHO अरुण कुमार ने कार्रवाई का भरोसा दिया, लेकिन गिरफ्तारी नहीं हुई.
अगले दिन थाने पहुंचे वकीलों की पुलिस अधिकारियों से बहस हो गई. वकीलों ने आरोप लगाया कि ACP ने सर्विस रिवॉल्वर दिखाकर उन्हें धमकाया और बदसलूकी की. वहीं, पुलिस ने वकीलों पर मारपीट, सरकारी काम में बाधा और SHO को खींचने का आरोप लगाया. करीब 15-20 वकीलों पर केस दर्ज हुआ. CCTV फुटेज भी सामने आया.
इसके बाद दिल्ली की जिला अदालतों के वकीलों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी. उनकी मांग थी कि ACP और SHO समेत जिम्मेदार पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया जाए. 28 अक्टूबर को दोनों अधिकारियों का ट्रांसफर कर दिया गया.
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अधिकारियों पर क्या एक्शन हुआ?ACP मनस्वी वशिष्ठ को गांधी नगर सब-डिवीजन से हटाकर स्पेशल पुलिस यूनिट फॉर वुमेन एंड चिल्ड्रेन यानी SPUWAC भेज दिया गया. वहीं, SHO अरुण कुमार को शाहदरा थाने से हटाकर सिक्योरिटी यूनिट में भेज दिया गया. इसके बाद वकीलों ने अपनी हड़ताल खत्म कर दी.
लेकिन पुलिसकर्मियों में नाराजगी बनी रही. 2 नवंबर को करीब 80-100 पुलिसकर्मी दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर जमा हुए. ACP मनस्वी वशिष्ठ भी उनके साथ थे. प्रदर्शनकारियों ने दोनों अधिकारियों का ट्रांसफर रद्द करने और पुलिसकर्मियों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट नियम बनाने की मांग की. बाद में उनकी पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार और वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात हुई. अगले दिन यानी 3 नवंबर को गृह मंत्रालय ने मनस्वी वशिष्ठ को सस्पेंड कर दिया.
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