तो वो लोग जो परेशान रहते हैं, औरतों के सो कॉल्ड स्वर्ण प्रेम से. वो इधर आवें. एक रिसर्च आई है. रिसर्च, सर्वे और नासा के नाम से आपके कान खड़े हो जाते हैं. हमको पता है. इस रिसर्च में जो कहा गया है उसके बाद आप भी चूड़ी-तरकी-मुंदरी की ओर भाग पड़ेंगे. दो दशक घिसने के बाद उस रिसर्च का नतीजा ये निकला कि स्पर्म सेल्स में सोने की मात्रा आदमियों की फर्टिलिर्टी के लिए बहुत जरूरी होती है. ये खबर छपी है अखबार में. पोस्टर नहीं लगे बाजार में. अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया है.

ये स्टडी हुई थी. डॉक्टर के.पी. स्कंदन की देखरेख में. पता लगा कि स्पर्म में सोने की मात्रा कम हो तो फर्टिलिर्टी पर फर्क पड़ता है. स्टडी में क्लेम किया गया कि नॉर्मल स्पर्म सेल के हर डेसीलीटर में में 17.66 माइक्रोग्राम सोने की मात्रा होती है. माने एक लीटर में 176.6 माइक्रोग्राम सोना होगा. इसको थोड़ा विजुअली इमेजिन करना. 10 लाख माइक्रो ग्राम माने एक ग्राम होता है.

डॉक्टर स्कंदन बीसियों सालों से इस फील्ड में काम कर रहे हैं, सोना जो होता है वो नॉन-रिएक्टिव मेटल होता है. इससे क्या होता है कि स्पर्म की गतिशीलता और उसका सर्वाइवल जो होता है, उसके लिए सही माध्यम मिल जाता है. तो भईया. ये खबर पढ़ने के बाद आप कभी यूज्ड कॉन्डोम फेंकेंगे नहीं. ;) मजाक है. सीरियसली ट्राई भी न कीजिएगा.
ये स्टोरी आशीष दैत्य ने की है.