लंदन (London,UK) में एक बच्चा जन्म लेता है. जिसने कैथोलिक चर्च की शिक्षाओं को ऑनलाइन फैलाने का काम किया. लोगों ने उसे ‘भगवान का इंफ्लुएंसर’(God's Influencer) नाम दिया. अब बच्चे को संत (Saint) का दर्जा दिए जाने की बात कही जा रही है. किसी को संत का दर्जा किन शर्तों पर दिया जाता है?
दो ‘चमत्कारों’ की बात मानकर बच्चे को अब संत का दर्जा दिया जाएगा, कहा जा रहा है 'God's influencer'
Pope Francis की अनुमति के बाद अब बच्चे को संत की उपाधी देने का रास्ता साफ हो गया है. इन दो 'चमत्कारों' के आधार पर लिया गया है फैसला.

15 साल के कार्लो एक्यूटिस की मौत साल 2006 में हो गई थी. ऐसे में कार्लो पहले ऐसे मिलेमियल यानी 80 से 90 के दशक में जन्मे शख्स होंगे, जिन्हें ‘कैनोनॉइज्ड’ किया जाएगा. मतलब संत का दर्जा दिया जाएगा.
ऐसा किन बातों को लेकर किया जा रहा है?BBC की खबर के मुताबिक, पोप फ्रांसिस के बच्चे के द्वारा किए गए दूसरे ‘चमत्कार’ को मानते हुए, ये फैसला लिया गया है. जिसमें उसने फ्लोरेंस यूनिवर्सिटी में एक छात्र की दिमागी चोट और बहते खून को ठीक किया था, ऐसा कहा जा रहा है.
इससे पहले कार्लो को एक और ‘चमत्कार’ का श्रेय भी दिया जाता है. जिसमें ब्राजील के एक बच्चे की पेनक्रियाज की बीमारी ठीक करने की बात कही जा रही है. जो उसे जन्म से ही थी.
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जिसके बाद पोप ने वेटिकन के संत बनाने वाले डिपार्टमेंट के साथ एक मीटिंग रखी. और दोनों ‘चमत्कारों’ को मान्यता दे दी. हालांकि ‘कैनोनॉइज्ड’ करने की तारीख अभी तय नहीं है.
कैंसर की वजह से कार्लो एक्यूटिस की मौत हो गई थीइटली में ज्यादातर बचपन बिताने के बाद. यहीं के मोंज़ा में कार्लो की ल्यूकेमिया की वजह से मौत हो गई थी. जिसके एक साल बाद कार्लो के शरीर को अस्सीसी लेकर जाया गया. अभी इनका शरीर यहीं लोगों के दर्शन के लिए रखा गया है.
इस वेबसाइट की वजह से कहे जाते हैं ‘भगवान के इंफ्लुएंसर’अब तक हुए ‘चमत्कारों’ का हिसाब रखने के लिए कार्लो ने एक वेबसाइट बनाई थी. जो उनकी मौत के कुछ दिन पहले ही लांच की गई थी. जिसके बाद उन्हें ‘भगवान का इंफ्लुएंसर’ (God’s influencer) नाम दिया गया था. इस वेबसाइट का अब तक कई भाषाओं में अनुवाद किया जा चुका है.
ऐसे ‘चमत्कार’ को तब मान्यता दी जाती है, जब कोई कुछ ऐसा कर देता है जो कुदरत में आमतौर पर संभव ना हो. जैसे किसी को ठीक करके उसकी जान बचा लेना. जब किसी शख्स के नाम पर ऐसे दो ‘चमत्कार’ हो जाते हैं. तब उसका संत बनने का रास्ता खुल जाता है.
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