देश में पेट्रोल और डीजल की कीमत में जल्द ही कटौती हो सकती है. इसकी वजह यह है कि इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमत में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. कच्चे तेल की कीमत इस साल जनवरी के बाद सबसे कम स्तर पर आ गई है. इससे ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के प्रॉफिट में इजाफा हुआ है. मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि इस वजह से पेट्रोल-डीजल की कीमत में कटौती की गुंजाइश बन गई है. जम्मू-कश्मीर और हरियाणा में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. उसके बाद महाराष्ट्र और झारखंड में भी चुनाव होंगे. इसके मद्देनजर भी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कटौती की संभावना जताई गई है.
क्या पेट्रोल-डीजल की कीमत गिरने वाली है?
जानकारों के मुताबिक, चीन में मांग में आई कमी के कारण कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है. वहीं दूसरी ओर ओपेक भी एक अक्टूबर से प्रोडक्शन बढ़ाने के संकेत दे चुका है. जिसका असर कच्चे तेल की कीमतों में देखा जा रहा है.


अभी देश के कई शहरों में पेट्रोल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा है. डीजल भी 90 रुपये के आसपास है. बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत का भारत की कच्चे तेल की खरीद लागत पर असर पड़ता है. इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार 4 सितंबर को इसकी कीमत 73.58 डॉलर प्रति बैरल हो गई. जो की इस साल का सबसे निचला स्तर है. इससे पहले मंगलवार, 3 सितंबर को इसकी कीमत में 5% की गिरावट आई थी. रिपोर्ट के अनुसार इस कच्चे तेल की कीमत में गिरावट का मुख्य कारण तेल की मांग में आई कमी है, जो मुख्यतः चीन में दर्ज की गई है.
जानकारों का कहना है कि कीमतों में गिरावट के कुछ अन्य कारण भी हैं. मसलन,
- लीबिया की सप्लाई मार्केट में वापसी,
- OPEC+ ग्रुप का अक्टूबर से उत्पादन कटौती का फैसला वापस लेना,
- और ग्रुप के बाहर के स्रोतों का तेल उत्पादन में बढ़ोतरी दर्ज करना.
इन कारणों से अधिक आपूर्ति की संभावना बनेगी जिससे तेल की मौजूदा कीमतों के कम होने की प्रबल संभावना है.
सरकार ने आम चुनाव से ठीक पहले 14 मार्च को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की कटौती की थी. अप्रैल में मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि इस कटौती के बावजूद सरकारी कंपनियों ने अप्रैल में 2 रुपये प्रति लीटर से अधिक का मार्जिन कमाया था.
लेकिन अभी यह साफ नहीं है कि सरकार पेट्रोल-डीजल की कीमत में कटौती करेगी या नहीं. वित्तीय सेवा कंपनी यूबीएस ने तेल बाजार में कम आपूर्ति रहने का अनुमान लगाया है. वहीं, गोल्डमैन सैश ने भी इसके $70-85 प्रति बैरल बने रहने का अनुमान लगाया है. जानकारों का कहना है कि यदि मौजूदा कम कीमतें लंबे समय तक नहीं टिकती हैं और 85 डॉलर पर स्थिर हो जाती हैं तो भी सरकार आरामदायक स्थिति में रहेगी. इससे वह सरकारी रिटेलर्स को पेट्रोल-डीजल की कीमत स्थिर रखने के लिए कह सकती है.
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