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सांसद, केंद्रीय मंत्री, CM जैसे पदों पर रहे गुलाम नबी, कांग्रेस नेताओं ने पूछा- तब क्यों नहीं बोले?

गुलाम नबी ने इस्तीफा देते हुए लगाए बड़े आरोप. कांग्रेस नेता बोले- जब तक पार्टी से सबकुछ मिलता रहा, तब तक चुप रहे.

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गुलाम नबी आजाद, मल्लिकार्जुन खड़गे और सोनिया गांधी. (फाइल फोटो: पीटीआई)

कांग्रेस में एक लंबा-चौड़ा वक्त बिताने के बाद गुलाम नबी आजाद (Ghulam Nabi Azad) ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है. उनका आरोप है कि इस समय कांग्रेस को चापलूसों के गिरोह द्वारा चलाया जा रहा है, जिसके कारण वो शीर्ष नेतृत्व से खुश नहीं हैं. हालांकि, इसके साथ ही गुलाम नबी आजाद पर भी सवाल उठ रहे हैं. उनकी उम्र 73 साल है, जिसमें से करीब 49 साल उन्होंने कांग्रेस में बिताए हैं. इस दौरान उन्होंने कांग्रेस के कार्यकर्ता से लेकर सांसद, मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री तक का सफर तय किया है.

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1973 में शुरू हुआ राजनीतिक करियर

गुलाम नबी आजाद ने कश्मीर यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के बाद साल 1973 में अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी. वो कांग्रेस पार्टी की तरफ से जम्मू के डोडा जिले में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के सचिव बनाए गए थे. इसके बाद 1975-76 में वो जम्मू और कश्मीर यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष बने थे.

साल 1977 में वो इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) के महासचिव बने थे. उस समय यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष संजय गांधी थे. बाद में जब संजय गांधी का निधन हो गया ,तो साल 1980 में गुलाम नबी आजाद को इंडियन यूथ कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया था.

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गुलाम नबी आजाद साल 1982 से लेकर 2014 के बीच इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, पीवी नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह के कार्यकाल में केंद्रीय मंत्री रहे. इतना ही नहीं, 1980 के दशक के मध्य से लेकर अब तक ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के सभी अध्यक्षों के कार्यकाल में वो महासचिव रहे.

इसके अलावा गुलाम नबी आजाद पिछले करीब चार दशकों से लगातार कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) के सदस्य रहे हैं. वो कांग्रेस संसदीय बोर्ड के सदस्य भी थे. पिछले 35 सालों में देश के हर एक राज्य और केंद्रशासित प्रदेश में कभी न कभी आजाद कांग्रेस की ओर से महासचिव इंचार्ज रहे हैं.

बीजेपी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार के सत्ता में आने के बाद 7 सालों तक गुलाम नबी आजाद राज्यसभा में विपक्ष के नेता थे. कुल मिलाकर वो कांग्रेस की टिकट पर दो बार लोकसभा सांसद और पांच बार राज्यसभा सांसद बने. साल 2005 में वो जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री बने थे.

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कांग्रेस नेताओं ने साधा निशाना!

अब पार्टी के तमाम नेता कांग्रेस में गुलाम नबी आजाद के इतने लंबे करियर का हवाला देते हुए उनपर सवाल उठा रहे हैं. नेताओं ने कहा कि जिस पार्टी ने उन्हें इतना कुछ दिया, आज वे उसी की कमियां क्यों गिना रहे हैं?

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने कहा, 

'गुलाम नबी आजाद जी को कांग्रेस ने संगठन व सरकार में अनेकों बार कई पदों से नवाजा. 2 बार लोकसभा सांसद बनाया, जम्मू-कश्मीर का मुख्यमंत्री बनाया. चुनाव की हार जीत से बचाकर 5 बार राज्यसभा सांसद बनाया. उसके बाद उन्होंने कांग्रेस पार्टी छोड़ दी. मुझे इस बात का बड़ा दुख है.'

वहीं कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा, 

'अगर उन्हें इतना ही यकीन था कि 2012 से पार्टी में गलत हो रहा है, तो उस समय उन्होंने अपना मुंह क्यों नहीं खोला? क्या इसलिए कि वे उस समय मंत्री थे और चुप रहना जरूरी समझा?'

गुलाम नबी आजाद 2009 से लेकर 2014 तक केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री थे. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी आजाद के इस्तीफे पर चिंता जाहिर की है. उन्होंने कहा,

'उनके (गुलाम नबी आजाद) त्यागपत्र के बारे में भावनाएं व्यक्त करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं. वो पार्टी में कई सारे पदों पर रहे हैं. किसी को उम्मीद नहीं थी कि वो इस प्रकार का पत्र लिखेंगे. इससे पहले जब सोनिया गांधी मेडिकल चेकअप के लिए अमेरिका गई थीं, तब भी उन्होंने एक ऐसा पत्र लिखा था.'

गहलोत ने आगे कहा, 'कांग्रेस ने उन्हें सब कुछ दिया. आज वो इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और सोनिया गांधी की वजह से चर्चित नेता हैं.'

वहीं कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा कि ये महज संयोग नहीं है कि संसद में उन्हें लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आंसू बहाए थे, फिर उन्हें पद्म विभूषण मिला और फिर मकान का एक्सटेंशन हो गया. उन्होंने कहा, 

'जिस व्यक्ति को कांग्रेस नेतृत्व ने सबसे ज्यादा सम्मान दिया, उसी व्यक्ति ने कांग्रेस नेतृत्व पर व्यक्तिगत आक्रमण करके अपने असली चरित्र को दर्शाया है. पहले संसद में मोदी के आंसू, फिर पद्म विभूषण, फिर मकान का एक्सटेंशन…यह संयोग नहीं सहयोग है!'

कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि पार्टी ने 1980 से लेकर 2021 तक लगातार उन्हें सरकार और संगठन दोनों में महत्वपूर्ण पदों पर रखा, लेकिन अंत उन्होंने उन्हीं लोगों पर दाग लगा दिया. यह दर्शाता है कि व्यक्ति का चरित्र कैसा है.

कांग्रेस पार्टी के सचिव विनीत पुनिया ने कहा कि ये संयोग नहीं हो सकता कि कांग्रेस अध्यक्ष को G-23 के नाम से गुलाम नबी आजाद ने पत्र तब लिखा, जब वो अस्पताल में थीं. गुलाम नबी आजाद ने आज तब इस्तीफा दिया, जब कांग्रेस अध्यक्ष अपने इलाज के लिए विदेश में हैं. पत्र की भाषा व उसकी टाइमिंग से ही नेता के स्तर का पता चलता है.

सोशल लिस्ट: गुलाम नबी आजाद के इस्तीफे को भारत जोड़ो यात्रा से जोड़ लोगों ने बवाल काट दिया!

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