"दीपक ने खुद अपना जुर्म कबूल किया. दीपक ने यह भी स्वीकारा कि यह सब करने में उसकी मां ने भी साथ दिया. दोनों आरोपियों ने सबूत मिटाने के लिए बच्ची के कपड़े भी जला दिए."गिरफ्तार होने के बाद से ही दोनों आरोपी डासना जेल में बंद थे. संजीव बखरवा ने बताया कि दोनों ने अब तक जेल में जितना टाइम बिताया है, उसे उम्रकैद की सजा के साथ एडजस्ट कर लिया जाएगा.
70 साल की महिला को 13 साल की बच्ची के रेप और मर्डर मामले में उम्रकैद हुई है
बच्ची चप्पल ठीक करवाने के लिए घर से निकली थी.
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बच्ची 4 मई 2015 को अपनी चप्पलें सही कराने के लिए बाहर गई थी. शाम तक वापस नहीं आई. अगली सुबह एक बोरे में उसकी लाश मिली.
2015 में 13 साल की एक बच्ची का रेप के बाद मर्डर कर दिया गया. इस मामले में 30 साल के आरोपी दीपक कुमार को दोषी पाया गया है. वहीं उसकी 70 साल की मां को भी इस मामले में दोषी पाया गया है. दोनों को उम्रकैद की सज़ा दी गई है. साथ ही दोनों पर डेढ़ लाख का जुर्माना लगाया गया है. दोनों आरोपियों को पॉक्सो एक्ट के तहत सज़ा दी गई है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नाबालिग बच्ची 4 मई, 2015 को अपनी टूटी चप्पल सिलवाने के लिए पास के बाज़ार गई थी. लेकिन देर शाम हो जाने के बाद भी वो घर नहीं लौटी. ऐसे में परिवारवालों ने उसे खोजना शुरू किया. अगली सुबह बच्ची की लाश दीपक के घर के पास मिली. लाश को बोरे में भरकर रखा गया था. बच्ची के परिवार वालों ने पूरी घटना की जानकारी पुलिस को दी. दीपक के घर की तलाशी लेने पर पुलिस को वहां जगह-जगह खून के धब्बे और खून से सनी एक चाकू मिली. इसके बाद पुलिस ने दीपक और उसकी मां के खिलाफ भोजपुर थाने में संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया. और दोनों को गिरफ्तार किया गया.
क्या कहा Ghaziabad की अदालत ने?
इस मामले में आठ गवाहों के बयान दर्ज किए गए. अदालत के फैसले के बारे में जानकारी देते हुए स्पेशल पब्लिक प्रॉसीक्यूटर संजीव बखरवा ने बताया,
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