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लहसुन सब्जी है या मसाला? 'इस सदी की सबसे बड़ी डिबेट' पर कोर्ट ने फैसला सुना दिया है

लहसुन एक मसाला है या सब्जी? एक आम सी लगने वाली बहस हाई कोर्ट तक पहुंच गई है. ये मामला 9 साल कोर्ट में चला, जिसपर हाल ही में फैसला आया.

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लहसुन मसाला है या सब्जी (तस्वीर : आजतक)

टमाटर सब्जी है या फल? लंबे समय तक टमाटर को सब्जी समझा गया. लेकिन बाद में पता चला कि टमाटर बोटैनिकली फल की कैटेगरी में आता है. कुछ ऐसी ही बहस लहसुन पर छिड़ी हुई है. मध्य प्रदेश के किसान और ट्रेडर्स लहसुन को कोर्ट ले गए. किसान चाहते थे कि लहसुन को सब्जी मानकर (garlic vegetable spice debate) बेचा जाए. वहीं ट्रेडर्स चाहते थे कि इसे एक मसाले की तरह ट्रीट किया जाए. यह मामला 9 साल से कोर्ट में पेंडिंग था, जिस पर हाल ही में फैसला आया है. 

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क्यों है लड़ाई?

किसान और ट्रेडर्स दोनों ही लहसुन को अपने हिसाब से बेचते हैं. किसान एजेंट के जरिए इसे सब्जी मण्डी में बेचते हैं. वहीं ट्रेडर्स इसे मसालों के बाजारों में बेचते हैं. अमूमन लोग सब्जी मंडी में खरीदारी करने जाते है, मसालों के बाजार की तुलना में. अगर लहसुन को मसाले की कैटेगरी में डाला गया तो उसकी बिक्री केवल मसाले के बाजार तक सीमित रह जाएगी. इससे एजेंटों के साथ किसानों का भी नुकसान होगा. वहीं अगर लहसुन को केवल सब्जी मंडी में बेचा जाए तो इससे ट्रेडर्स को नुकसान होगा. 

मोटा माटी लहसुन को सब्जी मंडी में बेचने पर किसानों को ज्यादा लाभ मिलता है. अलग-अलग राज्यों में इसकी दर अलग हो सकती है.  

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हिन्दुस्तान टाइम्स की खबर के अनुसार, साल 2015 में किसानों की मांग पर मध्य प्रदेश मंडी बोर्ड ने लहसुन को सब्जी की कैटेगरी में डाल दिया. लेकिन थोड़े ही दिन बाद एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट ने फैसले को पलट दिया. लहसुन को वापस मसाले की कैटेगरी में डाल दिया गया. एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट ने ‘कृषि उपज मंडी समिति अधिनियम 1972’ का हवाला दिया. इससे लहसुन की बिक्री सीमित हो गई. ये फैसला किसानों से ज्यादा ट्रेडर्स के लिए फायदेमंद साबित हुआ. 

कानूनी लड़ाई

साल 2016 में ये मामला कोर्ट पहुंचा. ‘आलू-प्याज-लहसुन कमीशन एजेंट एसोसिएशन’ इसे इंदौर हाई कोर्ट ले गए. साल 2017 में इस पर फैसला सुनाया गया. एक बार फिर लहसुन को सब्जी मान लिया गया. लेकिन इससे व्यापारी निराश दिखे. उनके मुताबिक, इस फैसले से केवल एजेटों को फायदा पहुंचेगा किसानों को नहीं. जुलाई 2017 यानी फैसले आने के 5 महीने के भीतर ही याचिकाकर्ता मुकेश सोमानी ने फैसले पर रिव्यू पिटीशन डाल दी.

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इस बार इस मामले की सुनवाई दो जजों की बेंच ने की. उन्होंने इस फैसले को पलट दिया. एक बार फिर लहसुन को मसाले की कैटेगरी में डाल दिया. इस बार इस फैसले का विरोध गार्लिक ट्रेडर और कमीशन एजेंट ने किया. मार्च के महीने में उन्होंने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. 

कोर्ट का फैसला

इस बार मामले की सुनवाई एस ए धर्माधिकारी और डी वेंकटरमन की बेंच ने की. 23 जुलाई 2024 के दिन कोर्ट ने इस पर फैसला सुरक्षित रख लिया. जिसे 12 अगस्त के दिन सुनाया गया. फैसले के अनुसार, कोर्ट ने साल 2017 के फैसले को दोहराया. माने कि लहसुन को अंततः सब्जी की कैटेगरी में ही डाला गया, लेकिन साथ ही इसे मसाले की कैटेगरी में भी बेचे जाने की अनुमति दे दी. इस तरीके से किसानों और ट्रेडर्स दोनों का फायदा हुआ. माने कोर्ट ने एक तीर से दो निशाने लगा दिए.

कोर्ट ने माना कि लहसुन के जल्दी खराब हो जाने के कारण इसे सब्जी माना जाना चाहिए. इसे बेचने में किसानों को प्राथमिकता दी जाए. लेकिन इसे सिर्फ सब्जी मंडी तक सीमित न रखा जाए.

पहले भी रहा है विवाद

लहसुन को लेकर ये पहला विवाद नहीं. साल 2017 में राजस्थान में भी लहसुन का विवाद कोर्ट पहुंच गया था. BBC Hindi की रिपोर्ट के मुताबिक वहां के विक्रेताओं को सब्जी मंडी में लहसुन को बेचने पर बिचौलिए ज्यादा कमीशन देते (6 प्रतिशत), वहीं इसे अनाज मंडी में बेचने पर ये कमीशन 2 फीसदी ही रह जाता जो कि उनकी परेशानी का कारण बनी.

तो आखिर में एक सवाल उठता है कि लहसुन असल में है क्या? लहसुन एक पौधा है. इस कारण बोटैनिकली लहसुन सब्जी की कैटेगरी में आता है. लेकिन आमतौर पर इसका इस्तेमाल मसाले की तरह किया जाता है. 

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