वैसे देखा जाए, तो रैली के नामानुसार पैगाम-ए-मोहब्बत का पहला इग्ज़ाम्पल खुद बाबूलाल गौर ने ही सेट किया. लेकिन अगर उन्होंने ऐसा जान-बूझकर नहीं किया तो सच कहूं, उन्हें रेलवे क्रॉसिंग पर लिखे 'दुर्घटना से देर भली' वाली कहावत को ध्यान से पढ़ लेना चाहिए था. वैसे कहा ये भी जा रहा है कि देश के झंडे और कांग्रेस के झंडे में जो समानताएं हैं, उनकी वजह से ही ये सारा कन्फ्यूज़न हुआ होगा. लेकिन कहने को ये भी कहा जा सकता है कि हो न हो, ये भाजपा को एक इशारा हो. बाबूलाल गौर ने मॉनसून सत्र में अपनी ही पार्टी के खिलाफ़ बोलना शुरू किया था. बाबूलाल गौर को उनकी ही पार्टी ने मंत्री पद से हटा दिया था. रीकैप में बता दें कि ये वही बाबूलाल गौर हैं जो बसों के उद्घाटन के मौके पर एक महिला से बदसलूकी करते हुए वीडियो पर पकड़ाए थे. ये भी पढ़ें:
















