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कूनो में चीतों की निगरानी के लिए लाए गए विदेशी एक्सपर्ट्स के सनसनीखेज दावे, SC को लिखा लेटर

पैनल के विदेशी एक्सपर्ट्स ने चीता प्रोजेक्ट के मैनेजमेंट पर गंभीर सवाल उठाए हैं.

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मंगलवार को कूनो नेशनल पार्क में एक और चीते की मौत हो गई. 5 महीने में यह 9वीं मौत है. (तस्वीर साभार- आजतक & इंडिया टुडे)

कूनो नेशनल पार्क में मंगलवार को एक और दक्षिण अफ्रीकी चीते की मौत हो गई. बीते 5 महीनों में यह नौवीं मौत है. मरने वालों चीतों में 6 वयस्क हैं, बाकी 3 शावक. इसे लेकर चीता प्रोजेक्ट स्टीयरिंग कमेटी के सभी विदेशी एक्सपर्ट्स ने सुप्रीम कोर्ट को खत लिखकर नाराजगी जताई है. उन्होंने प्रोजेक्ट के मैनेजमेंट पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि कमेटी को अनदेखा करते हुए उससे कई चीजें छिपाई गई हैं.

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दी इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक एक्सपर्ट्स ने लिखा है, 

"अगर जानवरों की सही निगरानी और उचित देखभाल की गई होती इनमें से कुछ चीतों को बचाया जा सकता था. हमें कमेटी में रखा गया, लेकिन हम सिर्फ शो पीस बनकर रह गए. हमें (एक्सपर्ट्स) इग्नोर करने की बजाय अगर लगातार स्थिति से अवगत रखा गया होता तो ये हाल ना होता."

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बता दें कि चीता प्रोजेक्ट स्टीयरिंग कमेटी इसी साल 26 मई को बनाई गई थी. इसमें भारत से 11 सदस्य और चार इंटरनेशनल चीता एक्सपर्ट्स को बतौर कंसल्टिंग पैनल रखा गया था.

जुलाई में कूनो में दो नर चीतों तेजस और सूरज की मौत हुई थी. तब भी नामीबिया चीता कन्जर्वेशन फंड की एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. लॉरी मार्केर ने सुप्रीम कोर्ट को एक लेटर लिखा था. मार्कर चीता प्रोजेक्ट स्टीयरिंग कमेटी में इंटरनेशनल कंसल्टिंग पैनल में भी शामिल हैं. उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, 

“उस लेटर में भी हमने मांग की थी कि एक्सपर्ट्स के साथ बेहतर संवाद हो, उन पर भरोसा किया जाए, चीतों की और बढ़िया तरीके से निगरानी हो और इसकी रिपोर्ट लगातार एक्सपर्ट्स के साथ शेयर की जाए.”

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लेटर में दक्षिण अफ्रीकी एक्सपर्ट्स ने कहा है कि फिलहाल जिन लोगों को प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी दी गई है उनके पास साइंटिफिक ट्रेनिंग का कोई अनुभव नहीं है. उसमें बताया गया है कि कैसे विदेशी एक्सपर्ट्स की राय को अनदेखा किया जा रहा है, बहुत मिन्नत करने के बाद उन्हें प्रोजेक्ट की कोई जानकारी मिलती है. उन्होंने ये तक कहा कि वे सिर्फ दिखावे भर के लिए एक्सपर्ट रह गए हैं.

कमेटी में ही शामिल एक अन्य पैनलिस्ट और वेटेरिनरी वाइल्डलाइफ स्पेशलिस्ट डॉक्टर एड्रियन टॉरडिफ ने भी जुलाई में एक लेटर लिखा था. उन्होंने भी मार्कर जैसी ही शिकायत की थी. टॉरडिफ ने कहा था, 

"कूनो प्रोजेक्ट के तहत जो चीते गए हैं, उनके बारे में हमें नाम मात्र जानकारी दी जा रही है. हमें चीता प्रोजेक्ट स्टीयरिंग कमेटी में इंटरनेशनल एक्सपर्ट बनाया गया है, लेकिन इसके बाद हमसे ना कभी कोई सलाह ली गई, ना किसी मीटिंग में बुलाया गया."

एक्सपर्ट्स को दरकिनार करने का ही नतीजा है कि कूनो में एक के बाद एक चीतों की हालत बिगड़ रही है. इस बात को साबित करने का दावा करते हुए एड्रियन ने कहा था कि 11 जुलाई को एक नर चीते के शरीर पर कुछ जख्म दिखे थे. कूनो फील्ड टीम ने कहा था कि मादा चीता ने हमला किया, जिससे ये चोटें आईं. एड्रियन का दावा है कि ऐसा होने की संभावना न के बराबर है.

एड्रियन का आरोप था कि इसके बाद भी स्टाफ जख्मी चीते को इलाज के नहीं ले गए. वे उसे जख्मी छोड़कर मादा चीता को देखने चले गए कि कहीं उसे चोट तो नहीं आई है. इस बीच समय पर इलाज नहीं मिलने से नर चीते की हालत और बिगड़ी जिससे उसकी मौत हो गई. इतना ही नहीं, एक्सपर्ट्स को घटना वाले दिन इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई. अगले दिन पोस्टमार्टम की कुछ फोटो और एक रिपोर्ट उन्हें भेज दी गई.

सुप्रीम कोर्ट को लिखे लेटर में कमेटी ने लिखा है कि अगर ये प्रोजेक्ट फेल होता है तो इसका असर आने वाले सालों में भी दिखेगा. सरकारें ऐसे प्रोजेक्ट्स शुरू करने से बचेंगी. इसलिए चीतों की मेडिकल रिपोर्ट एक्सपर्ट कमेटी के साथ तुरंत शेयर करने का आदेश दिया जाए, ताकि चीतों के इलाज को लेकर तुरंत फैसला लिया जा सके. इसके अलावा स्टीयरिंग कमेटी के सभी कामों में उन्हें सक्रियता से शामिल किया जाए. अखबार ने आगे बताया है कि पर्यावरण मंत्रालय जल्द ही एक्सपर्ट्स के लेटर चीता स्टीयरिंग कमेटी के सामने रखकर उसके सदस्यों से जवाब मांगेगा.

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