अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने एक ‘मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ (MoU) पर दस्तखत किए हैं. यह दोनों देशों के बीच चल रही जंग को खत्म करने की दिशा में उठाया गया पहला और सबसे बड़ा कानूनी कदम है. यह समझौता तुरंत लागू हो गया है. शुक्रवार, 19 जून को इस डील पर औपचारिक रूप से फाइनल मुहर लगेगी.
US-ईरान डील पर ट्रंप और पेजेशकियन ने किए साइन, इन 14 प्वाइंट्स पर लगी मुहर
US-Iran Deal: अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने MoU पर डिजिटल साइन किए. तुरंत लागू हुआ यह समझौता 19 जून को जेनेवा में औपचारिक रूप से पक्का होगा. 14 पॉइंट वाले इस समझौते में क्या-क्या है?


इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, इस दस्तावेज पर बुधवार, 17 जून को दोनों राष्ट्रपतियों ने डिजिटल रूप से साइन किए. इससे पहले रविवार, 14 जून को अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कालिबाफ ने इस पर डिजिटल साइन किए थे.
ट्रंप ने किए साइनएक अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने आज रात (बुधवार) पैलेस ऑफ वर्सेल्स में डिनर के दौरान अमेरिका-ईरान समझौते की हार्ड कॉपी पर साइन कर दिए हैं. वाइट हाउस ने डिनर टेबल पर फ्रांस के प्रेसिडेंट इमैनुएल मैक्रों के साथ साइनिंग का एक वीडियो भी जारी किया है. डॉनल्ड ट्रंप ने भी पत्रकारों से बात करते हुए इसकी पुष्टि की.
वाइट हाउस के एक अधिकारी का कहना है कि समझौते को लागू करने के लिए ईरान और मध्यस्थता करने वाले देशों को साइन वाली तस्वीर भेजी गई थी. अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि इस MoU का मकसद लगभग चार महीने से चल रहे संघर्ष को खत्म करना और 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को फिर से खोलना है.
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि तेहरान को अपना तेल बेचने की इजाजत होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान के फ्रीज किए गए फंड को अनफ्रीज करने का वादा किया है. बघाई ने आगे कहा कि तेल से जुड़े बैन तुरंत हटाए जाने चाहिए.
उन्होंने यह भी कहा कि MoU में 60-दिन का फ्रेमवर्क बनाया गया है, जिसके दौरान किसी भी पक्ष को ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए जिससे एग्रीमेंट कमजोर हो. बघाई के मुताबिक, दूसरे पक्ष को इस दौरान क्षेत्र में नए प्रतिबंध लगाने या सैन्य तैनाती बढ़ाने से बचना चाहिए.
डील के 14 पॉइंट्स1. लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध को स्थायी और तत्काल रूप से समाप्त किया जाए.
2. अमेरिका ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगा और ईरान इस्लामी गणराज्य की संप्रभुता का सम्मान करेगा.
3. नौसैनिक नाकाबंदी को 30 दिनों के भीतर पूरी तरह से हटा दिया जाए.
4. अमेरिका द्वारा ईरान के आसपास के क्षेत्रों से अपनी सेनाओं को वापस बुलाया जाए.
5. ईरानी एग्रीमेंट के तहत 30 दिनों के भीतर स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज फिर से खोला जाए.
6. तेल सैंक्शन और पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स पर लगे सैंक्शन हटाए जाएं.
7. अमेरिका और उसके सहयोगी ईरान के पुनर्निर्माण की कम से कम 300 अरब डॉलर की योजना प्रस्तुत करेंगे.
8. परमाणु मुद्दों और अमेरिका द्वारा लगाए गए प्राइमरी और सेकेंडरी सैंक्शन को पूरी तरह हटाने के लिए 60 दिनों की बातचीत.
9. ईरान ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी नीति (एनपीटी) के तहत परमाणु हथियार न बनाने की अपनी बात दोहराई है.
10. जब तक बातचीत चल रही है तब तक अमेरिका ने इस क्षेत्र में अपनी सेना न बढ़ाने की बात मानी है.
11. एग्रीमेंट को लागू करने के लिए सुपरवाइजरी मैकेनिज्म बनाई जाए.
12. जब तक ईरान पर लगे सैंक्शन और नेवल ब्लॉकेड हट नहीं जाते तब तक फाइनल समझौता नहीं होगा.
13. अंतिम वार्ता के 60 दिनों की अवधि के दौरान ईरान के फ्रीज़ 24 अरब डॉलर के कोष को जारी किया जाए. इस राशि का आधा हिस्सा वार्ता शुरू होने से पहले ईरान को उपलब्ध कराया जाना चाहिए.
14. अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के माध्यम से अप्रूव किया जाएगा.
न्यूक्लियर प्रोग्राम का मुद्दा सेंसिटिवइस्माइल बघाई ने कहा कि ईरान का एनरिच्ड यूरेनियम देश के अंदर ही रहेगा और इसे विदेश नहीं भेजा जाएगा. उन्होंने कहा कि चर्चा में एक विकल्प एनरिच्ड यूरेनियम का डाइल्यूशन है. यानी यूरेनियम की ताकत या शुद्धता को कम करना, ताकि उससे परमाणु बम न बनाया जा सके. ईरानी अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि एग्रीमेंट के फारसी और इंग्लिश वर्जन में एक जैसे नियम हैं और दोनों तरफ से उन पर साइन किए गए हैं.
‘मिसाइलों पर बात नहीं होगी’ईरान ने अपने मिसाइल प्रोग्राम पर किसी भी बातचीत से इनकार कर दिया है. बघाई ने कहा कि ईरान की मिसाइलें सिर्फ दागने के लिए हैं, उन पर बातचीत के लिए नहीं. उन्होंने यह भी कहा कि देश की रक्षा क्षमताओं पर किसी भी पक्ष के साथ चर्चा नहीं की जाएगी.
‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलेगा’ईरान के टॉप नेगोशिएटर मोहम्मद बाकर कालिबाफ ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलेगा. हालांकि, यह वैसा नहीं होगा, जैसा जंग से पहले था. तेहरान इंटरनेशनल कानून और समुद्री नेविगेशन नियमों के तहत काम करना जारी रखेगा. उन्होंने कहा कि ईरान होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को दी जाने वाली सर्विस के लिए फीस लेगा. ईरानी अधिकारियों ने यह भी कहा कि स्ट्रेट की जिम्मेदारी ईरान और ओमान की है.
कालिबाफ ने कहा कि MoU में ईरान में लगभग 300 बिलियन डॉलर के इन्वेस्टमेंट का प्रावधान है. इसमें से कुछ फंड लड़ाई के बाद रिकंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स के लिए रखा गया है.
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ट्रंप ने ईरानी मिसाइलों पर क्या कहा?
पेरिस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि अगर इस इलाके के दूसरे देशों के पास बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, तो ईरान को बैलिस्टिक मिसाइलें न देना गलत होगा. ट्रंप ने कहा,
"अगर सऊदी अरब और कतर, और उन सभी के पास कुछ है, तो मुझे लगता है कि यह ठीक है."
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने यह भी इशारा किया कि एग्रीमेंट के बावजूद अमेरिकन मिलिट्री फोर्स कुछ समय के लिए गल्फ में रहेगी.
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