के खिलाफ भी आईटी एक्ट के तहत लंका थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है.
जब बता रहे हैं कि बाहरी लोग थे तो BHU के छात्रों पर केस क्यों किया

अज्ञात छात्राओं पर गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है.
BHU के वीसी प्रोफेसर गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने इस आंदोलन के लिए बाहरी लोगों को जिम्मेदार बताया है. उन्होंने कहा, 'उपद्रव की घटना बाहरी लोगों की देन है. हमारे विश्वविद्यालय के छात्रावास में करीब 25 हजार छात्र रहते हैं और हमें इस बात की ख़ुशी है कि वे उपद्रव में शामिल नहीं थे.' ठीक है वीसी साहब, अगर आपकी ही बात सही है तो फिर आपने बीएचयू की 1200 छात्राओं के खिलाफ केस दर्ज क्यों करवाया है. अगर ये छात्राएं अंदर की थीं तो फिर आप इनकी बातें क्यों नहीं मान ले रहे हैं.
डीएम कह रहे हैं लाठीचार्ज नहीं हुआ तो अधिकारियों का सस्पेंशन क्यों

डीएम ने BHU में लाठीचार्ज की घटना से इनकार किया है.
वाराणसी के डीएम योगेश्वर राम मिश्रा का कहना है कि छात्राओं पर पुलिस ने लाठीचार्ज नहीं किया. चलिए हम आपकी ही बात मान लेते हैं. लेकिन आपने लंका थाने के एसएचओ, भेलुपुर के सीओ और एक एडिशनल सिटी मजिस्ट्रेट को बर्खास्त क्यों किया है. अगर लाठीचार्ज ही नहीं हुआ है, अगर वीडियो में दिखती हुई लड़कियों पर पड़ रही पुलिस की लाठियां झूठी हैं, अगर तस्वीरों में सिर पर पट्टी बांधे लड़कियों की तस्वीरें भी फेक हैं तो आपने तीन अधिकारियों को सस्पेंड क्यों किया है. इस बात का जवाब मिल जाए तो दे दीजिएगा.
समर्थन में उतरे राजनैतिक संगठन
बीएचयू की छात्राओं के समर्थन में राजनैतिक संगठन भी उतर आए हैं. 25 सितंबर को ABVP ने बीएचयू प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन का ऐलान किया है. कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI ने भी बीएचयू छात्रों के समर्थन में पूरे देश में विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है. 24 सितंबर को ही कांग्रेस के यूपी प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर बनारस पहुंच गए थे, जहां उन्हें हिरासत में ले लिया गया था. इसके बाद राज बब्बर ने कई ट्वीट किए.वीडियो में देखें कांग्रेस का प्रदर्शन
सुरक्षा चाहती हो तो हॉस्टल खाली करके घर चली जाओ

BHU के गर्ल्स हॉस्टल लगभग खाली हो चुके हैं.
बीएचयू की लड़कियों से ये बात बार-बार कही जा रही है. त्रिवेणी हॉस्टल हो या फिर आनंदी, सभी की लड़कियों से कहा गया है कि हॉस्टल खाली कर दो और घर जाओ. त्रिवेणी की एक लड़की ने बताया कि मुश्किल से पांच-सात लड़कियां ही हॉस्टल में बची हैं. वो भी अब घर चली जाएंगी. इसके बाद आंदोलन पूरी तरह से टूट जाएगा. सभी हॉस्टल के ऐसे ही हालात हैं. वहां पर हॉस्टल खाली करने की नोटिस लगी थी, जिसे बाद में फाड़ दिया गया. एक लड़की बताती है कि वो नोटिस इसलिए फाड़ा गया क्योंकि वीसी ने हॉस्टल खाली करने का आदेश दिया था, लेकिन उन्होंने मीडिया से कहा था कि हॉस्टल खाली करने का आदेश नहीं दिया गया है.
वीसी के सस्पेंशन के लिए ऑनलाइन मुहिम
बीएचयू में लड़कियों पर लाठीचार्ज के बाद वीसी को हटाने के लिए एक ऑनलाइन मुहिमचल रही है. change.org नाम की वेबसाइट पर राष्ट्रपति के नाम पत्र लिखकर वीसी को हटाने की मांग की गई है. इस पर अब तक 7774 लोगों का ऑनलाइन समर्थन मिल चुका है.
महामना के सम्मान के नाम पर प्रोफसरों का कैंडल मार्च

महामना के सम्मान के नाम पर कुछ छात्रों ने भी अलग से प्रदर्शन किया.
लड़कियों के विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ शरारती तत्वों के महामना की मूर्ति पर कालिख पोतने की बात सामने आई थी. हालांकि उनकी कोशिश छात्राओं ने ही फेल कर दी. इसके बाद आंदोलन के दौरान जब छात्राओं पर लाठीचार्ज हुआ तो 24 सितंबर की शाम बीएचयू के कुछ प्रोफेसर महामना के सम्मान के नाम पर मैदान में उतर आए और उन्होंने कैंडल मार्च किया. बीएचयू के इस आंदोलन में शामिल त्रिवेणी हॉस्टल की एक छात्रा बताती है कि इस आंदोलन को खत्म करने की हर मुमकिन कोशिश की जा रही है. पूरा आंदोलन छात्राओं की सुरक्षा की मांग को लेकर था, जिसे महामना के सम्मान से जोड़कर आंदोलन को दूसरी दिशा में मोड़ा जा रहा है.
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