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बाप ने चार दिन की बच्ची को ऐसे चाकू मारा कि किडनी और आंतें बाहर आ गईं

वो पहली बार था, जब उसने अपनी नवजात बेटी को देखा था.

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बाप को बेटे की चाहत थी. इस चाहत में पांच बेटियां पैदा हुईं. छठी बार भी ट्राय किया. इस बार भी बेटी ही हुई. गुस्से में उसने चार दिन की बच्ची के पेट पर चाकू मारकर उसकी जान ले ली (सांकेतिक तस्वीर, रॉयटर्स)
विमला और विष्णु. दोनों पति-पत्नी हैं. विमला 30 की है. विष्णु उससे दो साल बड़ा, 32 बरस का है. करीब 10 साल पहले दोनों की शादी हुई. 10 साल में कुल 120 महीने होते हैं. इनमें से 54 महीने अलग रखिए. इन 54 महीनों में विमला प्रेगनेंट थी. बेटे की चाह में एक के बाद एक पांच बेटियां हो गईं. विष्णु को बेटे का लालच था. बेटा नहीं हुआ, लालच खत्म नहीं हुआ. इसीलिए छठा बच्चा किया. फिर बेटी हुई. डिलिवरी के लिए विमला अपने मायके गई हुई थी. बच्चे के पैदा होने के चौथे दिन विष्णु अपनी बीवी और बच्चे को देखने ससुराल पहुंचा. जैसे ही उसने बच्ची को देखा, पागल हो गया. 32 साल के बाप ने गुस्से में अपनी चार दिन की बेटी का कत्ल कर दिया. चाकू से मारकर. बच्ची की किडनी और आंतें बाहर आ गईं. ये गुजरात के गांधीनगर जिले की बात है. यहां देहगाम नाम की तालुका है. वहां एक मोती मसांग गांव है. वहीं पर हुआ ये.
औलाद=बेटा. बेटियां=साग-भाजी.
गुजरात में फिलहाल 1,000 लड़कों पर औसतन 919 लड़कियां हैं. पहले तो हालत और भी खराब थी. 2014-16 के दौरान गुजरात का लिंगानुपात प्रति हजार लड़कों पर बस 848 था (फोटो: रॉयटर्स)
गुजरात में फिलहाल 1,000 लड़कों पर औसतन 919 लड़कियां हैं. पहले तो हालत और भी खराब थी. 2014-16 के दौरान गुजरात का लिंगानुपात प्रति हजार लड़कों पर बस 848 था (फोटो: रॉयटर्स)

ससुर ने दामाद के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई विष्णु राठौड़ के ससुर जसवंत जेतसिंह. ससुर ने दामाद के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने विष्णु को गिरफ्तार कर लिया. जेतसिंह ने अपनी कंप्लेंट में कहा. कि रविवार, यानी 24 जून की शाम को विष्णु अपनी पत्नी विमला से मिलने आया था. विमला उस समय सोई हुई थी, जब विष्णु ने बच्ची को चाकू मारा. बच्ची के रोने की आवाज सुनकर विमला जगी. तब तक विष्णु बच्ची पर वार कर चुका था. विष्णु ने वहां से भागने की कोशिश की. लेकिन ससुरालवालों ने उसे पकड़कर पुलिस के सुपुर्द कर दिया.
बच्ची को पहली नजर देखते ही उसे गुस्सा आया पुलिस का कहना है कि हां, विष्णु को बेटे की तमन्ना थी. उसे बेटा चाहिए ही था. लेकिन विष्णु बच्ची को मारने के इरादे से वहां नहीं गया था. वो तो बल्कि घी और बाकी खाने-पीने का सामान लेकर ससुराल पहुंचा था. क्योंकि विमला अभी कुछ दिन और अपने मायके में रहने वाली थी. मगर जैसे ही बच्ची विष्णु के सामने लाई गई, अचानक से वो बौखला गया. उसने बच्ची को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की. पुलिस का कहना है कि उसने बच्ची के पेट पर चाकू से चीरा लगाया. यही चीरा बच्ची के लिए जानलेवा साबित हुआ. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक, विष्णु ने इतने गहरे तक चीरा था बच्ची को कि उसकी किडनी और आंतें बाहर आ गई थीं.


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