कॉलेज का किस्सा व्हाट्सएप विश्वविद्यालय तक जा पहुंचा. बार-बार हम तक मैसेज आने लगे. ये बड़ा अजीब था, सोचो कोई टॉयलेट में सीसीटीवी लगवा दे हमारा तो सूसू ही न उतरे. सारा टाइम हम कैमरा और कैमरा हमको देखता रहे. मतलब तकनीक-वकनीक ठीक है, सुरक्षा होनी चाहिए, पर ऐसी भी सुरक्षा क्या कि आदमी खुलकर हल्का भी न हो सके. चिंतातुर होकर हमने खबर का आगा पीछा खोजना चाहा. चुहिया निकल आई. फोटोशॉप है ये तो. असल किस्सा कुछ और ही है. दरअसल 24 तारीख को ये सर्कुलर निकला था कि उसमें जो लिखा था, उसका मतलब ये कि आयात वाली सॉफ्ट ड्रिंक्स खराब होती हैं, आप लोग जागरूक हैं. बाहर की सॉफ्ट ड्रिंक्स जो हैं, वो अब यहां सर्व न होंगी. उसकी जगह ताजा जूस मिला करेगा. बस किसी ने इसी सर्कुलर पर हाथ आजमा कर अपने हिस्से का नया सर्कुलर बना लिया. असली सर्कुलर ये था.
सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने कॉलेज के इस फैसले की तारीफ भी की थी. और शायद कुछ लोगों को ये पसंद न आया हो कि कॉलेज में सॉफ्ट ड्रिंक्स नहीं मिलेंगी. तो उनने विरोध का ये तरीका अपनाया कि पूरे आदेश की ही खिल्ली उड़ा दी. वैसे मजेदार था ;) लेकिन वी.एल.बी. वालों को खुश होना चाहिए. लड़के उनके लायक हैं. कॉलेज आर्ट्स एंड साइंस का है, फर्जी ही सही बच्चों ने आर्ट को साइंस के जरिये क्रिएटिव बनाकर मौज ले ली.
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