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3,700 किलोग्राम बारूद, 9,640 धमाके और इस तरफ जमींदोज़ हो गए ट्विन टावर

नोएडा में सुपरटेक के ट्विन टावर ढहाए गए.

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नोएडा के सुपरटेक ट्विन टावरों को गिराया गया (फोटो: पीटीआई और आजतक)

28 अगस्त की दोपहर 2:30 बजे उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के नोएडा (Noida) के सुपरटेक ट्विन टावर (Supertech Twin Tower) ढहा दिए गए. सुपरटेक ट्विन टावर्स को गिराने के लिए इसमें विस्फोटक लगाए गए थे. एक बटन दबाते ही दोनों इमारतें ताश के पत्तों की तरह ढह गईं. ट्विन टावर के धराशायी होने बाद धूल का जबरदस्त गुबार उठा. बताया जा रहा है कि करीब दो घंटे तक धूल का गुबार हवा में रहेगा.

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ट्विन टावर्स को गिराने में 3700 किलोग्राम बारूद का इस्तेमाल

रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्विन टावर्स को गिराने के लिए 3700 किलोग्राम से ज्यादा विस्फोटकों का इस्तेमाल किया गया था. इन टावरों में कई छेद कर बारूद भरा गया था. बताया जा रहा है कि दोनों टावरों में 9,640 छेद किए गए थे.

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इंडिया टुडे के शिव अरूर की रिपोर्ट के मुताबिक इन ट्विन टावर्स को गिराने के लिए जितने विस्फोटकों का इस्तेमाल किया गया, उससे अग्नि-V मिसाइल के तीन वारहेड्स, ब्रह्मोस मिसाइल के 12 या चार पृथ्वी मिसाइलों के वारहेड्स को भरा जा सकता है.

Noida Twin Towers  Agni Brahmos Prithvi missiles Explosives used in Noida Twin Towers demolition are equivalent to 3 Agni, 12 Brahmos, and 4 Prithvi missiles
(फोटो: इंडिया टुडे)
इम्प्लोजन तकनीक से धराशायी हुए ट्विन टावर्स

नोएडा के ट्विन टावर्स को ढहाने के लिए इम्प्लोजन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. इम्प्लोज़न (Implosion) अंग्रेजी के Implode से बना है. शाब्दिक अर्थ अंदर विस्फोट होना. ये ऊंची इमारतों को नियंत्रित विस्फोट के जरिए गिराने की प्रक्रिया है. 

इस पूरी प्रक्रिया में दो-तीन काम होते हैं. एक कि महीनों इसमें तोड़-फोड़ और बाकी तैयारी की जाती है. दूसरा बिल्डिंग में सैकड़ों और कई बार हजारों तक छेद किए जाते हैं, जिनमें विस्फोटक फिट किए जाते हैं और तीसरा काम होता है सेकंड्स के अंतराल पर डेटोनेटर की मदद से धमाके करना. 

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इस प्रक्रिया में शुरुआती तोड़-फोड़ इस हिसाब से की जाती है कि बिल्डिंग का वजन कम हो जाए और धमाके के साथ इमारत के हिस्से वर्टीकली नीचे धंस जाएं.

मामला क्या था?

दिग्गज रियल स्टेट कंपनी सुपरटेक एमराल्ड ने नोएडा की अपनी रेजिडेंशियल सोसाइटी में 1000 फ्लैट्स वाले 40 मंजिला 2 ट्विन टावर बनाए थे. निर्माण में अनियमितता बरते जाने की बात सामने आई. जांच हुई तो दोनों टावर्स का कंस्ट्रक्शन मानकों के मुताबिक़ नहीं था. जिसके बाद साल 2014 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने टावर्स को गिराने का आदेश दे दिया. हाईकोर्ट के इस ऑर्डर को नोएडा अथॉरिटी और सुपरटेक दोनों ने सुप्रीम कोर्ट में भी चैलेंज किया था. इस दौरान तमाम जांचें और हुईं. सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत की बात सामने आई. जिनपर कार्रवाई भी हुई. सोसाइटी बनाने के लिए ग्रीन बेल्ट की जमीन पर अवैध कब्जे का खुलासा भी हुआ.

इसके बाद बीते साल सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए ट्विन टावर्स को गिराने का अंतिम आदेश जारी कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि दोनों टावर्स गिराए जाएंगे, फ़्लैट मालिकों को उनका पैसा वापस दिया जाएगा और सुपरटेक कंपनी टावर्स के गिराने में आने वाला खर्च खुद उठाएगी.

वीडियो- प्रश्न प्रदेश: सुपरटेक एमराल्ड केस में सुप्रीम कोर्ट ने टावर्स तोड़ने का फैसला क्यों दिया?

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