पोलिंग अफसर ने जितने वोट रजिस्टर किए, उसमें और EVM के दर्ज किए गए आंकड़े में 45 वोटों का फर्क है. हमने 30 नवंबर को ही अपनी रिपोर्ट चुनाव आयोग के पास भेज दी थी. वोटों की गिनती में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए. ऐसा लगता है कि असली मतदान शुरू होने से पहले बूथ के प्रिसाइडिंग ऑफिसर EVM में से मॉक डेटा डिलीट करना भूल गए थे. हमारे पास VVPAT पर्चियां हैं. गिनती के समय इनसे भी मदद मिलेगी.घबराने की बात नहीं, छोटी सी गड़बड़ है टाइम्स ऑफ इंडिया ने जिला चुनाव अधिकारी अनुभव श्रीवास्तव से भी बात की. उन्होंने बताया-
वोटों की गिनती में कोई दिक्कत नहीं होगी. पोलिंग बूथ पर जो वोटिंग होती है, उनकी गिनती की जाती है. इसीलिए दोबारा मतदान करवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. असली वोटिंग से पहले हम पॉलिटिकल पॉर्टियों को EVM की टेस्टिंग करवाते हैं. ये दिखाने के लिए EVM सही काम कर रहा है कि नहीं. इस दौरान कुछ मॉक (झूठ-मूठ में) वोट डाले जाते हैं. इस डेटा को बड़ी आसानी से असली मतदान के आंकड़ों के साथ मैच किया जा सकता है. ऑर्ब्जवर ने इस मामले की रिपोर्ट चुनाव आयोग के पास भेज दी है. हम पोलिंग ऑफिसर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करेंगे. मगर वो हमारी आंतरिक प्रक्रिया है.
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