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अमेरिका ने सबसे बड़ी सैन्य कमांड से 'INDO' शब्द हटाया, भारत के लिए क्या मेसेज?

अमेरिका ने अपने यूएस इंडो पैसिफिक कमांड का नाम बदल दिया है. इसका नाम फिर से यूएस पैसिफिक कमांड रख दिया है. साल 2018 में अमेरिकी रक्षा मंत्री जिम मैटिस ने इस सैन्य कमांड का नाम बदलकर इंडो-पैसिफिक कमांड कर दिया था.

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अमेरिका ने इंडो यूएस पैसिफिक कमांड से 'इंडो' शब्द हटा दिया है. (इंडिया टुडे)

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  • अमेरिका ने अपने यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड (USINDOPACOM) का नाम वापस उसके मूल नाम यूएस पैसिफिक कमांड (USPACOM) कर दिया है, जिसमें 'इंडो' शब्द हटा दिया गया है।
  • साल 2018 में नाम में 'इंडो' जोड़ने का कारण हिंद महासागर के बढ़ते रणनीतिक महत्व और भारत-अमेरिका की साझेदारी को मान्यता देना था, जबकि अब इसे पुराना नाम वापस लाने का फैसला किया गया।
  • इस नाम परिवर्तन से सैन्य कमांड की जिम्मेदारियों में कोई बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन इसे कुछ विशेषज्ञ अमेरिका की रणनीतिक प्राथमिकताओं में बदलाव के संकेत के रूप में देखते हैं।

अमेरिका ने अपने यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड (USINDOPACOM) का नाम फिर से बदल दिया है. कमांड से ‘INDO’ शब्द हटा दिया गया है. आठ साल पहले ही ये शब्द जोड़ा गया था. कमांड फिर से अपने मूल नाम यूएस पैसिफिक कमांड (USPACOM) पर लौट आया है. ये सब फ्रांस में पीएम नरेंद्र मोदी और US प्रेसिडेंट डॉनल्ड ट्रंप की मुलाकात के बीच हुआ है.

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खैर, राजनीति या कूटनीति में कुछ भी अनायास या अकारण नहीं होता. यहां ‘बिटवीन दि लाइन मैसेजिंग’ की रवायत होती है. कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस बदलाव को ‘क्वाड’ जैसे रणनीतिक समूहों के प्रति अमेरिका के बदलते स्टैंड के तौर पर देखा है. क्वाड भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया का एक नॉन मिलिट्री स्ट्रेटजिक ग्रुप है. अमेरिका की इस घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, 

क्वाड के ताबूत में एक और कील? थरूर ने इस पोस्ट के साथ अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ वॉर के आदेश का स्क्रीनशॉट भी शेयर किया है.

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साल 2018 में अमेरिकी रक्षा मंत्री जिम मैटिस ने इस सैन्य कमांड का नाम बदलकर ‘इंडो-पैसिफिक कमांड’ कर दिया था. तब अमेरिका की ओर से कहा गया कि हिंद महासागर का महत्व तेजी से बढ़ रहा है. अब हिंद महासागर और प्रशांत महासागर की सिक्योरिटी और स्ट्रेटजी एक दूसरे से ज्यादा जुड़ गई है. इसलिए कमांड के नाम में ‘इंडो’ जोड़ा गया. इसे भारत और अमेरिका के बीच बढ़ती रणनीतिक और द्विपक्षीय साझेदारी के प्रतीक के तौर पर भी देखा गया.

नाम बदलने पर अमेरिका ने क्या बताया?

यूएस पैसिफिक कमांड की स्थापना साल 1947 में तब के अमेरिकी राष्ट्पति हैरी ट्रूमैन ने की थी. अमेरिकी रक्षा मंत्रालय का कहना है कि ये नाम बहुत पुराना और ऐतिहासिक है. इसे वापस लाने से सैनिकों को अपनी विरासत पर गर्व होगा. यह नाम कई बड़े युद्धों और महत्वपूर्ण मिशनों से जुड़ा रहा है, इसलिए इसे फिर से अपनाया गया है.

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भारत के लिए क्या मायने हैं?

पेंटागन ने कहा है कि कमांड का सिर्फ नाम बदला है. रणनीति और जिम्मेदारियों में कोई बदलाव नहीं हुआ है. कमांड का दायरा अब भी अमेरिका के पश्चिमी तट से लेकर भारत की पश्चिमी सीमा तक रहेगा लेकिन डिफेंस एक्सपर्ट्स की माने तो 'इंडो' शब्द हटाने से ये मैसेज जाता है कि वॉशिंगटन अपनी स्ट्रेटजिक ब्रांडिंग में भारत को पहले जैसे महत्व नहीं दे रहा. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप अपने पहले कार्यकाल मे चीन को सबसे बड़ा खतरा मानते थे. 

बीजिंग को काउंटर करने के लिए एशिया में भारत उनकी स्ट्रेटजी का अहम हिस्सा था. उन्होंने ये भी जताने की कोशिश की थी कि हिंद महासागर और प्रशांत महासागर एक जैसे स्ट्रेटजिक महत्व के क्षेत्र हैं लेकिन अब शायद राष्ट्रपति ट्रंप की प्राथमिकताएं बदल गई हैं.

यूएस पैसिफिक कमांड क्या है?

अमेरिकी सेना पूरी दुनिया को अलग-अलग क्षेत्रों में बांटकर काम करती है. इन्होंने अलग-अलग इलाकों के लिए 11 कमांड बनाए हैं. इनमें से 6 स्ट्रैटेजिक और 5 फंक्शनल कमांड हैं. यूएस पैसिफिक स्ट्रैटिजिक कमांड का हिस्सा है. यह अमेरिका की सबसे बड़ी और सबसे अहम सैन्य कमांड में से एक है. यह कमांड एशिया और प्रशांत महासागर इलाके में एक्टिव है. यूएस पैसिफिक कमांड ने एशिया में सेकेंड वर्ल्ड वॉर के बाद की सुरक्षा व्यवस्था को आकार देने में अहम भूमिका निभाई है. 

कोरिया और वियतनाम युद्ध समेत अमेरिका के तमाम अभियानों में इसकी भूमिका रही है. यूएस पैसिफिक कमांड प्रशांत महासागर, हिंद महासागर के अधिकतर हिस्से, पूर्वी एशिया, दक्षिण पूर्व एशिया, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण एशिया जैसे विशाल स्ट्रेटजिक एरिया को कवर करती है.

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