विडंबना ने ये तस्वीर देखने के बाद खुद पर पेट्रोल छिड़क लिया. पांव में भारी पत्थर बांध लिया, जहर खाकर खुद को मौत का इंजेक्शन लगाया और किसी पहाड़ी से किसी समुंदर में कूद गई जहां खतरनाक मछलियां उसे खा जाने के लिए तैयार बैठी थीं.

तस्वीर में लिखा है. अगर करोगे खुल्ले में शौच, जल्द दी जायेगी मौत. बगल में गांधी जी की फोटो है. वो आदमी जो ज़िंदगी भर अहिंसा की बातें कर-कर अंत में गोली खाकर मारा गया. उसकी फोटो के साथ ये लिखा है. वो आदमी जिसके नाम पर सफाई का इतना बड़ा आयोजन चल रहा है. गांधी की मौत खुद में विडंबना है. लेकिन उस विडंबना से कहीं बड़ी विडंबना ये तस्वीर है. इस होर्डिंग में गांधी जी का चश्मा और उनका रेखाचित्र लगा है. अब गांधी किसे कब से मौत देने लगे. इतने हिंसक?

अब माजरा क्या है. मध्यप्रदेश नाम का एक अमूमन शांत सा राज्य है, जहां की कसमें उठाया करते हैं कि भले लोग रहते हैं वहां. वहां के झाबुआ जिले में मेघनगर नगर पंचायत है. उसी ने ये होर्डिंग बनवाई हैं. जब उनसे पूछा गया, विरोध हुआ तो उनका तर्क आया ये पेंटिंग की गलती है. लिखा जाना चाहिए था 'अगर करोगे खुल्ले में शौच, तो जल्द हो जाएगी मौत'. उसकी जगह छप गया 'दी जाएगी मौत'. ये तर्क एक हद तक माना जा सकता है. हम ये भरोसा करना चाहेंगे कि नगर पंचायत वाले इतने डंब तो नहीं ही होंगे कि किसी को मौत की धमकी देंगे.

याद रहे एमपी में ही अभी कुछ दिन पहले एक बुजुर्ग के हाथों मल साफ कराने का वीडियो आया था. सयाने से एक आदमी का पेट खराब था, खुले में शौच करने के कारण उसे पीटा गया और उसकी धोती से उसका मल साफ़ कराया गया और जब वीडियो वायरल हो गया, तो ये कहकर पल्ला झाड़ लिया गया कि ऐसे करने वाले मिले नहीं कौन थे. पहचाने नहीं जा सके. ऐसा न हो कि स्वच्छता नई गौ माता हो जाए, नया राष्ट्रगान हो जाए, नया धर्म हो जाए जिसके नाम पर लोगों को मारने-पीटने की संस्कृति बन जाए. https://www.youtube.com/watch?v=vohv9vcyotk