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अगले महीने से इंडिया में बनेगी कोरोनावायरस की वैक्सीन, 1 हज़ार रुपए होगा दाम

लेकिन सितंबर में लॉन्चिंग के पहले एक पेच है.

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कोरोनावायरस की वैक्सीन को लेकर बड़ी ख़बर है. इटली ने कहा है कि मिल गयी.
महाराष्ट्र का पुणे. कोरोना से ग्रस्त. लेकिन एक अच्छी ख़बर भी. यहां मौजूद Serum Institute of india (SII) ने कहा है कि अगर सबकुछ ठीक रहा तो अगले 2-3 हफ़्ते में -- यानी मई महीने से -- कोरोना की वैक्सीन बनाना शुरू कर देंगे. और सबकुछ ठीक कैसे होगा? Oxford में चल रहे कोरोना वैक्सीन के ह्यूमन ट्रायल के सफल होने पर ही सबकुछ ठीक होगा. हिंदुस्तान टाइम्स में छपी ख़बर बताती है कि Oxford विश्वविद्यालय ने दुनिया के 7 बड़े संस्थानों से बातचीत की है. अगर Oxford का ह्यूमन ट्रायल सफल रहा, तो ये 7 बड़े संस्थान — जिनमें SII शामिल है — कोरोना की वैक्सीन का वितरण और निर्माण शुरू कर देंगे. और सितम्बर-अक्टूबर आते-आते वैक्सीन बाज़ार में.  Oxford लम्बे समय से कोरोना की वैक्सीन पर काम कर रहा था. वैक्सीन का फ़ार्मूला तो तैयार हो गया. लेकिन अब इसे जांचने की ज़रूरत थी. ह्यूमन ट्रायल की ज़रूरत. 23 अप्रैल को ये भी शुरू हो गया. इस वैक्सीन का नाम है ChAdOx1 nCoV-19. 800 एकदम स्वस्थ लोगों ने वैक्सीन की टेस्टिंग के लिए अपना नाम लिखवाया है.  लेकिन इधर भारत में SII के CEO आदर पूनावाला ने कहा है कि अगले महीने यानी मई से वैक्सीन का निर्माण शुरू करने के फ़ैसले में एक रिस्क है. क्या रिस्क है? उन्होंने अपने मीडिया स्टेटमेण्ट में बताया,
“SII वैक्सीन बनाना शुरू कर रहा है. ये सोचते हुए कि सितम्बर-अक्टूबर में Oxford ट्रायल के ख़ुश करने वाले नतीजे सामने आ जायेंगे. बिना नतीजों के वैक्सीन निर्माण शुरू करना एक रिस्क है. लेकिन हम ये तैयारी इसलिए कर रहे हैं ताकि अगर वैक्सीन ह्यूमन ट्रायल में सफ़ल हो गयी, तो हमारे पास पहले से कुछ डोज़ मौजूद होंगे. और उस समय भी हम वैक्सीन का निर्माण कर रहे होंगे, जिससे बड़ी मात्रा में लोगों को वैक्सीन मिल सकेगी.”
उन्होंने ये भी बताया कि पुणे में मौजूद उनकी कम्पनी के पुरानी निर्माण इकाई में ही काम शुरू होगा, क्योंकि नया सेटअप बनाने में एक से दो साल का वक़्त लग जाएगा. इसके लिए वो पोलियो और दूसरे रोगों के लिए बनाई जाने वाली वैक्सीन का निर्माण कुछ दिनों के लिए रोक देंगे.  SII की टीम Oxford में काम कर रही प्रोफेसर ऐड्रीआना हिल के सम्पर्क में लगातार बनी हुई है. कम्पनी का कहना है कि पहले 6 महीनों तक हम हर महीने 50 लाख वैक्सीन के डोज़ बनायेंगे. उसके बाद हम हर महीने लगभग 1 करोड़ वैक्सीन का निर्माण शुरू करेंगे. PTI के मुताबिक़ कम्पनी ICMR और डिपार्टमेंट ऑफ़ बायोटेक्नॉलॉजी के सम्पर्क में है. ताकि इंडिया में क्लिनिकल ट्रायल करने की तैयारी शुरू की जा सके.  पूनावाला ने एकाध जानकारी और दी है. कहा है कि वे वैक्सीन का निर्माण तो शुरू करेंगे, लेकिन इस वैक्सीन का पेटेंट नहीं करायेंगे. ताकि दूसरे दावा निर्माता भी इस फ़ार्मूले का इस्तेमाल कर सकें, और वैक्सीन का निर्माण कर सकें. पूनावाला ने ये भी कहा है कि वैक्सीन का मार्केट दाम वो 1000 रुपये प्रति वैक्सीन पर रखेंगे. ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोग इस वैक्सीन का लाभ उठा सकें.  पूनावाला के आत्मविश्वास के पीछे डॉ. सराह गिल्बर्ट का बयान है. डॉ. सराह Oxford में वैक्सीन का ट्रायल कर रही टीम की हेड हैं. Business Insider की ख़बर मानें तो डॉ. सराह ने कहा है कि बहुत सम्भव है कि ये वैक्सीन काम करेगी. क्योंकि जिस तरीक़े से इस वैक्सीन को बनाया गया है, उस प्रक्रिया पर उनकी टीम का भरोसा है. Oxford की टीम 10 जनवरी से वैक्सीन पर काम कर रही है. डॉ. सराह और उनकी टीम ने इसके पहले MERS यानी मिडल ईस्ट रेस्पाइरेटरी सिंड्रोम के लिए सफलता से वैक्सीन का निर्माण कर लिया था. वही भरोसा इस बार भी.  
कोरोना ट्रैकर :

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