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कोरोना से जूझ रही दुनिया के लिए ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से एक बढ़िया ख़बर आई है

ख़बर कोरोना की दवा और टीके से जुड़ी है.

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ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी 23 अप्रैल से इंसानों पर टीके का ट्रायल शुरू करने जा रही है. फोटो: PTI
कोरोना वायरस से जूझ रही दुनिया के लिए एक अच्छी ख़बर है. 23 अप्रैल से ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी पहले फेज़ का ह्यूमन क्लिनिकल ट्रायल शुरू करने जा रही है. मतलब इंसानों पर टीके का टेस्ट होगा. इस टीके का नाम का नाम ChAdOx1 nCOV-19 है. ये टीका 500 वॉलंटियर पर टेस्ट किया जाएगा, जिनकी उम्र 15 से 55 साल है. ब्रिटेन के टेम्स इलाके में ये टेस्ट होंगे, ताकि पता लगे कि वायरस के ख़िलाफ़ इम्यून सिस्टम कैसी प्रतिक्रिया दे रहा है. ब्रिटेन के हेल्थ सेक्रेटरी मैट हैनकॉक ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि सरकार नई और सफल वैक्सीन बनाने के लिए हरसंभव कोशिश कर रही है और ब्रिटेन इस मामले में सबसे आगे चल रहा है. कौन-सी टीम इसे लीड कर रही है? न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, इस टेस्ट का दायरा और बढ़ाया जाएगा, जिसमें बुजुर्ग शामिल होंगे और अंतिम फेज में करीब 5,000 लोगों पर टेस्ट करने की संभावना जताई जा रही है. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के इस प्रोजेक्ट को प्रोफेसर सारा गिलबर्ट लीड कर रही हैं. उनकी टीम में प्रोफेसर एंड्यू पोलार्ड, प्रोफेसर टेरेसा लांबे, डॉक्टर सैंडी डगलस और प्रोफेसर एड्रियाना हिल हैं. इससे पहले इस टीम ने मिडल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (MERS) के लिए टीका विकसित किया था. ये टीका MERS के ख़िलाफ़ एक साल तक इम्यूनिटी डेवलप करता था. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के जेनर इंस्टीट्यूट के अलावा इंपीरियल कॉलेज में भी ये वैक्सीन बन रही है. ब्रिटेन ने जगहों पर वैज्ञानिकों को क्लिनिकल ट्रायल के लिए 44.5 मिलियन पाउंड का फंड अलोकेट किया है, ताकि तेजी से काम हो सके. इसके अलावा वैक्सीन का टेस्ट सफल होने पर प्रोडक्शन के लिए भी फंड जारी किया जाएगा. ओरल पोलियो वैक्सीन का सुझाव वहीं, दूसरी जगहों पर भी प्रयास जारी हैं. जर्मनी में भी रेगुलेटरी बॉडी PEI ने देश के पहले ह्यूमन ट्रायल को मंजूरी दे दी है. अमेरिका में दवाई मिलने तक ओर पोलियो वैक्सीन का इस्तेमाल करने का सुझाव दिया गया है. यूनिवर्सिटी ऑफ मेरीलैंड में इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन विरोलॉजी के डायरेक्टर डॉक्टर रॉबर्ट गैलो ने 'इंडिया टुडे' से बातचीत में कहा कि जब तक दवा नहीं मिल जाती, ओरल पोलियो वैक्सीन भी कोरोना से लड़ने में मदद कर सकती है. साथ ही साउथ एशिया और इंडिया को इससे फायदा मिल सकता है. दुनियाभर में कोरोना वायरस के अब तक 26 लाख से ज़्यादा मामले सामने आ चुके हैं और करीब एक लाख 83 हज़ार लोगों की मौत हो चुकी है. भारत में कोरोना से 681 मौत हुई हैं और करीब 21 हज़ार मामले सामने आए हैं.
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