कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष को चुने जाने के लिए 17 अक्टूबर को वोटिंग होगी. लंबे इंतजार के बाद कांग्रेस वर्किंग कमिट (CWC) ने पार्टी अध्यक्ष के चुनावी शेड्यूल को मंजूरी दी. यह CWC मीटिंग तब हुई जब दो दिन पहले ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था. इस मीटिंग की अध्यक्षता सोनिया गांधी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए की. सोनिया गांधी मेडिकल चेकअप के लिए देश से बाहर गई हैं. उनके साथ राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी मौजूद हैं.
17 अक्टूबर को होगा कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव, 9 हजार से ज्यादा नेता करेंगे वोट
गुलाम नबी आजाद के इस्तीफे के बाद CWC की मीटिंग में फैसला लिया गया.


कांग्रेस के कार्यक्रम के मुताबिक, अध्यक्ष के चुनाव के लिए 22 सितंबर को नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा. इसके बाद 24-30 सितंबर के बीच नामांकन दाखिल किए जाएंगे. नामांकन जांच एक अक्टूबर को होगी. नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख 8 अक्टूबर है. वहीं मतदान 17 अक्टबूर होगा. वोटों की गिनती दो दिन बाद यानी 19 अक्टबूर को होगी.
28 अगस्त को CWC मीटिंग के बाद कांग्रेस नेता मधूसूदन मिस्त्री ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया,
राहुल गांधी ने 2019 में दिया था इस्तीफा"अगर एक ही उम्मीदवार रहा तो नामांकन वापस की तारीख यानी 8 अक्टूबर को ही रिजल्ट बताया जाएगा. अगर एक से ज्यादा उम्मीदवार हुए तो सभी प्रदेश कांग्रेस कमिटी में 17 अक्टूबर को चुनाव होंगे. नामांकन दिल्ली में ही होगा. करीब 9 हजार से ज्यादा कांग्रेस नेता अपने-अपने राज्य मुख्यालय में वोटिंग करेंगे."
कांग्रेस में अध्यक्ष पद के चुनाव का इंतजार लंबे समय से था. 2019 लोकसभा चुनावों में हार के बाद उसी साल जुलाई में राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने इस्तीफा देते हुए एक ओपन लेटर लिखा था जिसमें उन्होंने लोकसभा चुनाव में हार की जिम्मेदारी ली थी. इसके बाद सोनिया गांधी ने अंतरिम अध्यक्ष के रूप में दोबारा पार्टी की जिम्मेदारी अपने पास रखी थी. जब अगस्त 2020 में कुछ नेताओं ने नेतृत्व पर सवाल उठाए तो सोनिया गांधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की भी पेशकश की थी.
गुलाम नबी आजाद भी CWC के सदस्य थे. वे कांग्रेस के उन 23 नेताओं में भी शामिल थे जिन्होंने साल 2020 में सोनिया गांधी को पत्र लिखकर नेतृत्व पर सवाल उठाए थे और पार्टी में संगठनात्मक बदलाव की मांग की थी. इन नेताओं के समूह को 'G-23' कहा गया था. बाद में इस समूह के कई नेताओं ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था. G-23 नेताओं में आनंद शर्मा और मुकुल वासनिक कांग्रेस वर्किंग कमिटी के सदस्यों में शामिल हैं.
26 अगस्त को गुलाम नबी आजाद ने पार्टी से इस्तीफा देते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को 5 पेज लंबा पत्र लिखा. आजाद ने कहा कि इस समय 'चापलूसों का एक गिरोह' पार्टी को चला रहा है और सोनिया गांधी सिर्फ 'नाम की अध्यक्ष' बनी हुई हैं. आजाद ने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी 'अपरिपक्व' हैं और उन्होंने पार्टी के पुराने विचार-विमर्श के ढांचे को धराशायी किया है. उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा था कि साल 2019 के चुनाव के बाद से पार्टी की स्थिति और खराब हुई है.
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