The Lallantop

दुनिया का एकमात्र आदमी जो आतंकवाद का शर्तिया इलाज करता है

शांति का नोबेल पाया ये आदमी स्कैनिंग मशीन है. पॉलिटिक्स में न आया होता तो जिंदगी भर पढ़ते ही गुजार देता

Advertisement
post-main-image
फोटो - thelallantop
कोलंबिया एक छोटा सा देश है, साउथ अमेरिका का. अरे सिंगर शकीरा उसी देश की है. जिसने वाका वाका गाना गाया था. साउथ अफ्रीका में होने वाले फीफा वर्ल्ड कप के लिए, 2010 में. तो कोलंबिया अब फिर से चर्चा में आ गया है. और इस बार रीजन हैं कोलंबिया के प्रेसिडेंट जुआन मैनुअल सैंटोस. जिनको शुक्रवार को 2016 के लिए शांति का नोबल पुरस्कार मिला है.
जुआन को नोबल इसलिए मिला है क्योंकि इन्होंने कोलंबिया में पिछले करीब 52 सालों से चल रहे सिविल वॉर को खत्म करने के लिए बहुत मेहनत की है. जुआन ने इस प्रॉब्लम को सॉल्व करने के लिए अपना पूरा जोर लगा रखा है. खैर अभी भी समझ न आया हो कि कोलंबिया कहांं है तो ज्यादा जोर मत दो दिमाग पर, नीचे मैप देख लो जो हरे रंग का दिखाई पड़ रहा है वही है कोलंबिया देश.
Ubicación_de_Colombia
मैं हूं कोलंबिया

अभी कोलंबिया में सब शांति-शांति है

जुआन ने FARC यानी रिवोल्यूशनरी ऑर्म्ड फोर्सेस ऑफ कोलंबिया के गुरिल्ला लीडर रोड्रिगो लोंडोन के साथ सीजफायर का समझौता किया था. जिसके बाद सिविल वॉर रुक गया था. रोड्रिगो को कोलंबिया में लोग नॉम डे गुरे तिमोचेंको के नाम से भी जानते हैं. FARC कोलंबिया ने मार्क्सवादी रिबेल्स हैं. और रोड्रिगो इनके लीडर हैं. पर जनता ने दोनों के पीस प्लान को जनमत संग्रह में नकार दिया था. इसके बाद भी जुआन ने प्रॉमिस किया है कि वो कोलंबिया के लोगों के लिए तैयार किए गए इस पीस प्लान का रीव्यू करेंगें.
संडे को इस पर जनमत संग्रह हुआ था. इसके बावजूद भी जुआन की शांति बनाए रखने की कोशिश जारी है. कोलंबिया के लोगों की शिकायत है कि जुआन, रोड्रिगो के खिलाफ बड़ा नरम रुख अपनाते हैं. जुआन के लिए प्राइज अनाउंस करते हुए प्राइज कमेटी कि लीडर कसी कुलमन फाइव ने कहा, इस पुरस्कार को कोलंबिया के लोगों के लिए एक ट्रिब्यूट की तरह देखा जाना चाहिए. वोटर्स ने शांति को नहीं बस समझौते को न कहा है.
https://twitter.com/NobelPrize/status/784318196064985088?ref_src=twsrc%5Etfw
कुछ नोबल एक्सपर्ट ने जनमत संग्रह में पीस प्लान के लिए जनता की न के बाद इनको अपनी लिस्ट से निकाल दिया था. क्योंकि ज्यादातर वोटर्स का पीस प्लान को न कहना यूं देखा जा रहा था कि वो मानते हैं शांति वाला प्रॉसेस मर चुका है. पर जुआन अपनी शांति की कोशिश पर अड़े हुए हैं. नोबेल कमेटी ने भी कहा है कि हमें उम्मीद है कि दोनों ही पक्ष सीजफायर का सम्मान करेंगे. ये पुरस्कार इस बात को भी पक्का करता है.
जुआन को करीब 8 मिलियन स्वीडिश डॉलर अवॉर्ड के तौर पर दिए जाएंगे. जो इंडियन करेंसी के हिसाब से करीब 6 करोड़ 20 लाख के बराबर होते हैं. नोबेल का अवॉर्ड फंक्शन होगा 10 दिसंबर को. 10 दिसंबर माने मानवाधिकार दिवस.

जहां नौकरी करने जाते थे वहीं पढ़ाई करने लगते थे जुआन

1951 की पैदाइश है जुआन की. माने अभी 65 साल के हैं. जुआन जैसे ही ग्रेजुएट हुए, कोलंबियन नेवी में नौकरी करनी शुरू कर दी. इसके बाद वो अमेरिका चले गए और यूनिवर्सिटी ऑफ कंसास में पढ़ाई करने लगे. दो साल के अंदर उनको इकॉनमिक्स और बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में ग्रेजुएशन की डिग्री मिल गई.
ग्रेजुएशन के बाद वो लंदन चले गए. यहां उन्होंने बहुत जगहों पर नौकरी की. साथ ही साथ साइड में दो साल लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस में भी गुजारे. यहां से उन्होंने 1975 में इकोनॉमिक डेवलपमेंट में मास्टर्स की डिग्री पा ली. माने MA भी हो गया. 1981 में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी गए तो वहां भी पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में MA कर ड़ाला. आगे किसी शहर में नहीं गए वरना वहां भी पढ़ने लगते और पढ़ते-पढ़ते ही जिंदगी काट लेते.

पत्रकारिता करते-करते नेता बन गए जुआन

1981 में ही जुआन कोलंबिया लौट आए और अपने परिवार के ही अखबार में काम करना शुरू कर दिया. अल टिंपो नाम के इस अखबार में आज भी उनके अच्छे-खासे शेयर हैं. अखबार में काम करते-करते पॉलिटिकल कनेक्शन बनने लगे और 10 साल के अंदर कोलंबिया के फॉरेन ट्रेड मिनिस्टर बन गए, जो कि उनकी पहली पॉलिटिकल जिम्मेदारी थी. इसी वक्त वो वहां चल रही दो स्ट्रीम से अलग एक तीसरी स्ट्रीम के बारे में सोचने लगे. इस तीसरी स्ट्रीम में कंजर्वेटिव पॉलिटिक्स और फ्री मार्केट कैपिटलिज्म का मिला जुला प्रयोग था.
इस तरह से इन्होंने लिबरल सोशल पॉलिसीज का प्रयोग पॉलिटिक्स में किया. जब तक जुआन खुद प्रेसिडेंट नहीं बन गए 2010 में, तब तक उन्होंने बहुत से प्रेसिडेंट की सरकारों में अलग-अलग इंपॉर्टेंट पद संभाले. उनके करियर को सबसे ज्यादा तारीफ इसलिए होती है क्योंकि उन्होंने कोलंबिया में आतंकवाद पर इफेक्टिवली लगाम लगा रखी है. खासकर FARC को ठंडा कर देना उनका सबसे इंपॉर्टेंट काम है. साथ ही उनकी इकोनॉमिक ग्रोथ के जरिए कोलंबिया में खुशहाली लाने के लिए भी तारीफ की जाती है.


ये भी पढ़ें -

50 साल पहले की रिसर्च के लिये मिला फिजिक्स का नोबेल

मौत पर जीत की ओर सबसे बड़ा कदम बढ़ाने वाले को मिला नोबेल

दुनिया खत्म हो, उससे पहले इन भारतीयों को नोबेल प्राइज जरूर मिले

जिस पर भारत में देशद्रोह का आरोप लगा, उसे नोबेल किस बात के लिए मिला

 

Advertisement
Advertisement