अमेरिका के टेनेसी प्रांत में हत्या की एक दोषी महिला क्रिस्टा पाइक को जानलेवा इंजेक्शन देकर मौत की सजा दी गई. लेकिन 2 इंजेक्शन देने के बाद भी क्रिस्टा की मौत नहीं हुई. लगभग एक हफ्ते बाद क्रिस्टा होश में आ गई है. यानी उस पर इंजेक्शन का असर नहीं हुआ. हालांकि जब उसे पेंटोबार्बिटल दवा की दो डोज दी गई, उसके बाद उसकी हालत बहुत गंभीर हो गई थी.
दो बार जानलेवा इंजेक्शन देने के बाद भी कैसे जिंदा है हत्या की दोषी Christa Pike?
टेनेसी में 30 सितंबर को क्रिस्टा पाइक को Pentobarbital की दो डोज देकर lethal injection से मौत की सजा देने की कोशिश हुई थी. लेकिन उनकी मौत नहीं हुई और उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा. अब उनके वकीलों के मुताबिक वह होश में हैं और बातचीत कर रही हैं.

पाइक के वकीलों का कहना है कि अब वह होश में हैं और बातचीत कर रही है. उनके वकीलों को सलाह देने वाले मेडिकल एक्सपर्ट्स ने इसे एक अनोखी घटना बताया है. एक्सपर्ट्स हैरान हैं कि दवा की 2 डोज के बावजूद कोई कैसे बच सकता है. इसे लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं. जैसे कि क्या क्रिस्टा के शरीर ने ड्रग को मात दे दी? एक सवाल यह भी है कि दवा उसके खून में पहुंची भी थी या नहीं?
पेंटोबार्बिटल क्या है?बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक पेंटोबार्बिटल बार्बिट्यूरेट्स (barbiturates) नाम की दवाओं की कैटेगरी में आता है. यह सेंट्रल नर्वस सिस्टम को बहुत ज्यादा धीमा कर देता है. इससे दिमाग काम करना, सांस लेना और शरीर के दूसरे जरूरी काम स्लो हो जाते हैं. बहुत ज्यादा डोज लेने पर, यह सांस लेने से जुड़े दिमाग के कंट्रोल को बहुत कमजोर कर सकता है. इससे शरीर में ऑक्सीजन का लेवल गिर जाता है और आखिरकार दिल धड़कना बंद कर देता है. इस दवा के जानलेवा इंजेक्शन से दवा नस में जाकर तेजी से खून में मिल जाती है. लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि पाइक के मामले में शायद ऐसा ठीक से नहीं हो पाया.
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क्या पाइक की नस में दिक्कत थी?पाइक की टीम को सलाह देने वाले एनेस्थिसियोलॉजिस्ट (बेहोशी आदि जैसी दवाओं के एक्सपर्ट) डॉ जोएल जिवोट ने BBC को बताया,
अगर वह सामान्य रूप से खून में पहुंचे, तो 2 डोज पेंटोबार्बिटल आम तौर पर किसी व्यक्ति की जान लेने के लिए काफी होती है.
रिपोर्ट के मुताबिक दूसरी ओर ऐसी बातें भी सामने आई हैं कि इंजेक्शन वाली जगह के आस-पास छाले पड़ गए थे. एक वजह यह हो सकती है कि नस फट गई हो या सुई नस के अंदर सही जगह पर न रही हो. इसलिए, सीधे खून में बहने के बजाय, दवा शायद स्किन के नीचे आस-पास के टिशू में चली गई हो. इसे एक्स्ट्रावासेशन (extravasation) का नाम दिया जाता है.
अगर ऐसा हुआ, तो शरीर दवा को बहुत धीरे-धीरे और कम मात्रा में सोखेगा. इससे खून में दवा का वह बहुत ज्यादा कंसंट्रेशन नहीं बन पाएगा. और यही मौत का कारण बनने के लिए जरूरी होता है.
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